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कृषि फसल बीमा योजना 2025 में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की अचानक कार्रवाई से हड़कंप

कृषि फसल बीमा योजना 2025 में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की अचानक कार्रवाई से हड़कंप

राजस्थान के चूरू जिले में स्थित सालासर कस्बे का SBI बैंक अचानक सुर्खियों में आ गया, जब प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा बिना पूर्व सूचना के शाखा पहुंच गए। कृषि फसल बीमा योजना 2025 के अंतर्गत बड़े घोटाले की आशंका की शिकायतों पर मंत्री की यह कार्रवाई हुई। बैंक पहुंचते ही उन्होंने दस्तावेज, खाते और फसल बीमा की एंट्री रिकॉर्ड्स की जांच की, जिसके बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मंत्री ने बताया कि यहां गंभीर स्तर पर फर्जी किसानों के नाम पर बीमा करवाया गया, जिसके पीछे माफिया, बीमा कंपनी और बैंक कर्मियों की सांठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता। मंत्री के निरीक्षण के दौरान बैंक कर्मियों में स्पष्ट रूप से घबराहट देखी गई।

71 किसानों के नाम पर काटे गए 15 लाख रुपये, मिलने वाले थे 9 करोड़ के क्लेम

मंत्री की जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे कृषि विभाग को हिला दिया। सालासर शाखा में 71 किसानों के नाम पर बीमा राशि काटी गई थी और यह राशि लगभग 15 लाख रुपये बैठती है। लेकिन गड़बड़ी यहां खत्म नहीं होती। इन 71 किसानों को करीब 9 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम दो दिनों के भीतर जारी होने वाला था।

घटना की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने तुरंत भुगतान प्रक्रिया रुकवाई और पूरी फाइल की जांच शुरू की। उनका कहना है कि समय रहते हस्तक्षेप न किया जाता, तो करोड़ों रुपये गलत खातों में पहुंच जाते और सरकारी धन का बड़ा नुकसान हो जाता।

पूरे राज्य में 15 हजार किसानों के नाम पर 1150 करोड़ के घोटाले की आशंका

कृषि मंत्री ने केवल सालासर की घटना को ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में इसी तरह की गड़बड़ियों की संभावना जताई। उनके अनुसार लगभग 15 हजार किसानों के नाम पर बीमा योजनाओं में फर्जी तरीके से 1150 करोड़ रुपये के घोटाले का प्रयास हुआ है।

राजस्थान में केसीसी धारकों की संख्या लगभग 67 लाख 25 हजार है, जिनमें 21 लाख 52 हजार किसान सरकारी बैंकों में खाते रखते हैं। इनमें से एसबीआई में करीब 7 लाख 28 हजार खाते दर्ज हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में खातों का होना घोटालेबाजों के लिए आसान निशाना बन सकता है, और इस मामले में संगठित तरीके से फर्जीवाड़ा करने का प्रयास किया गया।

पिता और पुत्र का एक ही नाम; फर्जी रिकॉर्ड से खुला बड़ा राज

सालासर शाखा में किए गए बीमा रजिस्ट्रेशन की जांच के दौरान एक और विचित्र तथ्य सामने आया। कई बीमा आवेदन पत्रों में किसान का नाम और उनके पिता का नाम बिल्कुल एक जैसा दर्ज किया गया था। जैसे—अजय कुमार नायक के पिता का नाम भी अजय कुमार नायक लिखा गया, अनिल सारस्वत और अंकिता सारस्वत के मामलों में भी यही त्रुटि पाई गई।

यह पैटर्न देखकर स्पष्ट हुआ कि ये पहचानें बनावटी थीं और दस्तावेज किसी सुनियोजित तरीके से तैयार किए गए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि गजनेर क्षेत्र की भूमि को आधार बनाकर बीमा पॉलिसी दिखाई गई, लेकिन गजनेर तहसीलदार ने राजस्व रिकॉर्ड के मिलान में पाया कि संबंधित व्यक्तियों के नाम पर कोई भूमि, खसरा या रकबा दर्ज ही नहीं था। 9 फरवरी को तहसीलदार की रिपोर्ट आते ही कृषि विभाग सक्रिय हुआ और मामला उच्च स्तर तक पहुंचा।

एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की भूमिका पर भी सवाल

इस पूरे प्रकरण में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी (AIC) पर भी आरोप लगाए गए हैं। मंत्री ने कहा कि कंपनी ने बिना भूमि सत्यापन और पात्रता की उचित जांच किए बीमा जारी कर दिया, जो गंभीर लापरवाही का मामला है। सालासर के 71 किसानों की भूमि गजनेर के चक ग्रामों में फर्जी रूप से दिखाई गई, जैसे—11 एनबीएम, 7-8 टीपीएम, 1-2-3 टीपीएसएम, 6-7-8-9 एनबीएन आदि। ये सभी रिकॉर्ड बाद में गलत पाए गए।

शाखा प्रबंधक नहीं दे सके संतोषजनक जवाब

कृषि मंत्री ने शाखा प्रबंधक उमेश कुमार से सवाल किए, लेकिन वे किसी भी प्रश्न का ठोस उत्तर नहीं दे सके। मंत्री ने संबंधित फाइलें और पत्रावलियां मांगीं, लेकिन शाखा प्रबंधक दस्तावेज उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे। इससे संदेह और गहरा हो गया कि बैंक के अंदर भी कई स्तरों पर अनियमितताएं हुई हैं। इस पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और पूरी फाइल सरकारी अभिरक्षा में लेने के आदेश दिए।

ग्रामीणों में चिंता बढ़ी, बैंक पर भरोसा कमजोर होने का डर

जब मंत्री बैंक की जांच कर रहे थे, तब बड़ी संख्या में ग्रामीण भी बैंक के बाहर इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों ने चिंता जताई कि यदि बैंक जैसे संस्थान में ही इस तरह की अनियमितताएं हों, तो आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई कहां सुरक्षित रखे? लोगों का कहना था कि बैंक और बीमा कंपनियों पर उनका विश्वास था, लेकिन इस मामले ने भरोसे को झटका दिया है।

एफआईआर के संकेत, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और इसके लिए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि विस्तृत जांच के बाद दोषियों की पहचान की जाएगी और उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं शाखा प्रबंधक ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह अभी इस विषय में कुछ नहीं कहना चाहते।

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