राजस्थान में क्रिकेट प्रशासन एक बार फिर चर्चा में है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की एडहॉक कमेटी में राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए नए कन्वीनर और सदस्यों की नियुक्ति की है। इस फैसले के तहत डीडी कुमावत को हटाकर भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव को कमेटी का नया कन्वीनर बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब पिछले दो वर्षों से आरसीए के चुनाव लंबित हैं और एडहॉक कमेटी के माध्यम से ही प्रशासनिक कार्य संचालित किए जा रहे हैं। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक पुनर्गठन और चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
नए चेहरों की एंट्री, पुराने सदस्यों की छुट्टी
नई एडहॉक कमेटी में कुछ नए चेहरों को शामिल किया गया है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कमेटी में पूर्व मंत्री चंद्रराज सिंघवी के पोते अरिष्ट सिंघवी और भादरा से विधायक संजीव बेनीवाल के बेटे अर्जुन बेनीवाल को सदस्य बनाया गया है। वहीं, कुछ मौजूदा सदस्यों को हटाया भी गया है। पूर्व कन्वीनर दीनदयाल कुमावत के साथ भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पिंकेश जैन को भी कमेटी से बाहर कर दिया गया है। इस फेरबदल को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल प्रशासनिक बदलाव है या इसके पीछे राजनीतिक समीकरण भी काम कर रहे हैं।
पुराने सदस्यों को फिर मिला मौका
नई कमेटी में कुछ ऐसे चेहरे भी हैं, जिन्हें पहले की तरह बरकरार रखा गया है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर और भाजपा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी को फिर से एडहॉक कमेटी में जगह दी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार कुछ अनुभवी सदस्यों के साथ निरंतरता बनाए रखना चाहती है, ताकि प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो। हालांकि, परिवारवाद को लेकर भी इस फैसले पर सवाल उठने लगे हैं।
लगातार बढ़ रहा एडहॉक कमेटी का कार्यकाल
आरसीए की निर्वाचित कार्यकारिणी भंग होने के बाद से भजनलाल शर्मा सरकार लगातार एडहॉक कमेटी के जरिए ही काम चला रही है। पिछले दो वर्षों में यह नौवीं बार है, जब एडहॉक कमेटी का कार्यकाल बढ़ाया गया है। यह स्थिति दर्शाती है कि अब तक आरसीए के चुनाव नहीं हो पाए हैं, जिससे क्रिकेट प्रशासन में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक एडहॉक व्यवस्था पर निर्भर रहना संस्था के विकास के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
तीन महीने का कार्यकाल, चुनाव सबसे बड़ी चुनौती
नई एडहॉक कमेटी का कार्यकाल तीन महीने के लिए निर्धारित किया गया है। इस अवधि में कमेटी के सामने सबसे अहम जिम्मेदारी आरसीए के लंबित चुनावों को संपन्न कराना है। यदि इस बार भी चुनाव नहीं हो पाए, तो यह मुद्दा और गंभीर हो सकता है और कानूनी विवाद भी बढ़ सकता है। पहले भी आरसीए से जुड़े कई मामले अदालत तक पहुंच चुके हैं, इसलिए सरकार और कमेटी दोनों पर दबाव बना हुआ है।
पहले भी हो चुके हैं कई बदलाव
आरसीए की एडहॉक कमेटी में यह पहला बदलाव नहीं है। 28 मार्च 2024 को सरकार ने कार्यकारिणी को भंग कर पहली बार एडहॉक कमेटी का गठन किया था, जिसमें भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी को कन्वीनर बनाया गया था। इसके बाद 28 जून 2025 को एक और बदलाव करते हुए दीनदयाल कुमावत को कन्वीनर नियुक्त किया गया। अब एक बार फिर नेतृत्व में बदलाव करते हुए मोहित यादव को यह जिम्मेदारी दी गई है। लगातार हो रहे इन बदलावों से यह स्पष्ट है कि सरकार स्थायी समाधान की दिशा में प्रयासरत है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है।
राजनीतिक चर्चा और संभावित विवाद
नई नियुक्तियों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोग इसे भाजपा के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे प्रशासनिक जरूरत बता रहे हैं। क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल से जुड़ी संस्था में बार-बार हो रहे बदलावों का असर खिलाड़ियों और क्रिकेट संरचना पर भी पड़ सकता है। यदि समय रहते चुनाव नहीं कराए गए, तो यह मामला एक बार फिर अदालत में जा सकता है।
आगे की राह और चुनौतियां
आरसीए की नई एडहॉक कमेटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से चुनाव करवाने की होगी। इसके साथ ही क्रिकेट गतिविधियों को सुचारु बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि खिलाड़ियों के करियर पर असर न पड़े।


