राजस्थान में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी ANTF ने पिछले 175 दिनों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस दौरान की गई कार्रवाई ने न केवल प्रदेश में सक्रिय ड्रग्स नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं, बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले तस्करी के संगठित गिरोहों को भी बड़ा झटका दिया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन 175 दिनों के भीतर एएनटीएफ ने पूरे राजस्थान में एमडी ड्रग्स बनाने वाली 30 अवैध फैक्ट्रियों का पर्दाफाश किया है। इनमें से 6 फैक्ट्रियों पर सीधे एएनटीएफ की टीम ने छापेमारी कर कार्रवाई की, जबकि शेष मामलों में अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय के जरिए इन नेटवर्क्स को ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन और सप्लाई का नेटवर्क काफी व्यापक था, जिसे अब व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है।
इसके साथ ही एएनटीएफ ने गांजा और अफीम की अवैध खेती से जुड़े पांच बड़े सिंडिकेट्स का भी खुलासा किया है। यह सिंडिकेट लंबे समय से अवैध खेती के जरिए नशे का कारोबार संचालित कर रहे थे। इन पर की गई कार्रवाई से न केवल उत्पादन स्तर पर रोक लगी है, बल्कि सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है।
इस अभियान के दौरान नशे के कारोबार से जुड़े कुल 45 तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इनमें कई ऐसे अपराधी शामिल हैं जिन पर 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक का इनाम घोषित था। इन तस्करों की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट होता है कि एएनटीएफ ने छोटे स्तर के अपराधियों के साथ-साथ बड़े और संगठित गिरोहों पर भी प्रभावी कार्रवाई की है।
गिरफ्तार किए गए तस्करों में 13 आरोपी राजस्थान के बाहर के राज्यों से पकड़े गए हैं, जिनमें दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि नशे का यह कारोबार केवल राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। वहीं शेष 32 तस्करों को राजस्थान के विभिन्न जिलों से गिरफ्तार किया गया है।
एएनटीएफ की कार्रवाई का दायरा केवल फैक्ट्रियों और तस्करों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी सफलता देखने को मिली है। इस दौरान अफीम तस्करी की पांच बड़ी अंतरराष्ट्रीय खेपों को भी जब्त किया गया है, जो देश के बाहर भेजी जाने वाली थीं। इन खेपों की बरामदगी से यह साफ होता है कि राजस्थान नशे की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क में भी एक महत्वपूर्ण कड़ी बनता जा रहा था, जिसे समय रहते नियंत्रित करना आवश्यक था।
इस पूरी कार्रवाई को लेकर पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि पिछले 175 दिनों में केवल छापेमारी और गिरफ्तारियां ही नहीं हुई हैं, बल्कि एक मजबूत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया गया है। वर्तमान में एएनटीएफ के पास 18 चौकियां, एक थाना और एक अत्याधुनिक मुख्यालय है, जहां प्रशिक्षित और विशेषज्ञ कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मजबूत तंत्र के कारण नशे के कारोबारियों में दहशत का माहौल बन गया है। लगातार हो रही कार्रवाई और सख्ती के चलते अब तस्कर अपने नेटवर्क को संचालित करने में असहज महसूस कर रहे हैं। इससे प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को और बल मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की निरंतर और संगठित कार्रवाई से ही नशे के बढ़ते खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है। एएनटीएफ की यह सफलता न केवल कानून व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है कि सरकार और पुलिस प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं।


