शोभना शर्मा। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के हालिया बयान ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। उनका यह बयान न केवल पार्टी के भीतर संभावित संगठनात्मक बदलावों की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भजनलाल शर्मा सरकार के कुछ मंत्री जल्द ही संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं। राठौड़ ने साफ तौर पर कहा कि भाजपा में संगठन सर्वोपरि है और पार्टी सत्ता से संगठन व संगठन से सत्ता में लोगों को भेजने की परंपरा पर विचार कर रही है।
मदन राठौड़ ने कहा, “हम तो कई मंत्रियों को संगठन में लेने की सोच रहे हैं। सत्ता से संगठन में और संगठन से सत्ता में जा सकते हैं। संगठन ही सत्ता बनता है।” उनके इस बयान को भाजपा की “वन मैन, वन पोस्ट” नीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के पीछे पार्टी का स्पष्ट संदेश है—संगठन की मजबूती ही चुनावी सफलता की कुंजी है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बेहतर प्रदर्शन के बाद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह एहसास हुआ है कि जमीन पर संगठन को और मजबूत करने की आवश्यकता है। ऐसे में अनुभवी और मेहनती मंत्रियों को संगठन में लाकर कार्यकर्ताओं के बीच ऊर्जा और जोश भरने की रणनीति बनाई जा सकती है। यह कदम पार्टी को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारियों में बढ़त दिलाने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।
राठौड़ का बयान उस समय आया है जब पार्टी के भीतर मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा पहले से ही चल रही थी। उनके अनुसार, भाजपा का कार्यकर्ता एक सिपाही की तरह होता है और जहां भी उसे भेजा जाता है, वह पूरी निष्ठा से काम करता है। उन्होंने कहा, “कौन किसी मोर्चे पर जाएगा, यह संगठन तय करता है।” इस बयान का संदेश साफ है कि सत्ता और संगठन के बीच संतुलन कायम रखने के लिए पार्टी हर संभव कदम उठाने को तैयार है।
इस बयान से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि भजनलाल शर्मा मंत्रिमंडल में कुछ चेहरे बदले जा सकते हैं। अगर कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा जाता है, तो उनकी जगह नए चेहरों को मौका मिल सकता है। इससे मुख्यमंत्री के पास अपनी टीम को और संतुलित व मजबूत करने का अवसर होगा। यह कदम युवा और सक्रिय नेताओं को भी सरकार में स्थान देने का रास्ता खोल सकता है।
जब राठौड़ से संगठन के विस्तार और नई कार्यकारिणी के गठन के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “जब जरूरत होगी, तब नई कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी।” यह बयान भले ही सीधा न हो, लेकिन इसके पीछे का संदेश स्पष्ट है कि भाजपा आलाकमान सही समय का इंतजार कर रहा है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, संगठन विस्तार की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसकी घोषणा जल्द हो सकती है।