भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक फैसलों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के सात मोर्चों में से दो की जिम्मेदारी पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को दिए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या यह कदम प्रमोशन है या फिर डिमोशन। इसी चर्चा के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने आधिकारिक रूप से बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष का पदभार संभाल लिया है। उनके पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का बयान सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
मदन राठौड़ से जब इस नियुक्ति को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसे रणनीतिक कदम बताते हुए कहा कि लंबी छलांग लगाने के लिए पीछे आना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब लॉन्ग जंप करनी होती है तो पहले थोड़ा पीछे हटना जरूरी होता है। इसी तर्ज पर उन्होंने कैलाश चौधरी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे थोड़ा पीछे आकर अब लंबी छलांग लगाएंगे। उनके इस बयान को संगठन के भीतर भविष्य की बड़ी राजनीतिक भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।
BJP में पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को मिली मोर्चों की जिम्मेदारी
बीजेपी ने हाल ही में संगठनात्मक फेरबदल करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को किसान मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री निहालचंद मेघवाल को अनुसूचित जाति मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया है। इन दोनों नियुक्तियों के बाद यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या पार्टी इन नेताओं को संगठन में नई भूमिका देकर आगे की राजनीतिक तैयारी कर रही है या फिर उन्हें सत्ता की मुख्य धारा से अलग किया गया है। मदन राठौड़ के बयान ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
किसान मोर्चा अध्यक्ष पद से जुड़ा अजीब संयोग
किसान मोर्चा के अध्यक्ष पद से जुड़ा एक दिलचस्प राजनीतिक संयोग भी चर्चा में है। पिछले सात वर्षों में इस पद पर रहने वाले नेताओं का राजनीतिक सफर खासा उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कैलाश चौधरी पहले भी किसान मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं। उस दौरान उन्होंने वर्ष 2018 में बाड़मेर की बायतू विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
हालांकि इसके बाद पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्हें बाड़मेर से टिकट दिया। इस बार उन्होंने जीत दर्ज की और केंद्र सरकार में मंत्री बने। इसी तरह उनसे पहले किसान मोर्चा के अध्यक्ष रहे भागीरथ चौधरी का राजनीतिक सफर भी इसी तरह का रहा है।
भागीरथ चौधरी को वर्ष 2023 में किसान मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी ने उन्हें किशनगढ़ से टिकट दिया, लेकिन वे चुनाव हार गए। इसके बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए 2024 के लोकसभा चुनावों में अजमेर से मैदान में उतारा। इस चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की और वर्तमान में केंद्र सरकार में कृषि राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
संगठनात्मक पद या भविष्य की तैयारी?
इन घटनाक्रमों को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि किसान मोर्चा का अध्यक्ष पद केवल संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी राजनीतिक भूमिका की तैयारी का मंच भी हो सकता है। मदन राठौड़ के “लॉन्ग जंप” वाले बयान को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।


