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भ्रष्टाचार पर सख्त हुए मदन दिलावर

भ्रष्टाचार पर सख्त हुए मदन दिलावर

राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान में बुधवार को आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय वनस्पतिक बीज बैंक कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए विकास अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने अधिकारियों को न केवल चेतावनी दी बल्कि कार्य के प्रति जिम्मेदारी निभाने की नसीहत भी दी।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति : मदन दिलावर

मदन दिलावर ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है और इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारी काम में लापरवाही या बहानेबाजी करते हैं, लेकिन अब यह व्यवस्था नहीं चलेगी। मंत्री ने कहा कि सड़क को तलब बताकर या अन्य बहाने बनाकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को संदेश देते हुए कहा कि काम तो करना ही पड़ेगा और जिम्मेदारी से पीछे हटने की गुंजाइश नहीं है।

मंत्री ने यह भी कहा कि वह हर जगह व्यक्तिगत रूप से निगरानी नहीं कर सकते, लेकिन यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ गड़बड़ी की शिकायत सामने आई और वह जांच में सही पाई गई, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

गड़बड़ी करने वालों से वसूली की चेतावनी

अपने संबोधन में मंत्री दिलावर ने सख्त लहजे में कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों से एक-एक पाई की वसूली की जाएगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन जनता की मेहनत की कमाई से आता है और इसका उपयोग पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।

मंत्री ने अधिकारियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह किसी के दुश्मन नहीं हैं। यदि कोई अधिकारी ईमानदारी से काम करेगा और अच्छे परिणाम देगा तो उसे सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जाएगा। लेकिन यदि किसी से गलती होती है या जानबूझकर गड़बड़ी की जाती है तो उसके लिए दंड भी तय है।

चारागाह विकास के लिए बीज बैंक योजना

कार्यशाला के दौरान मंत्री ने राज्य सरकार की वनस्पतिक बीज बैंक योजना पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के बजट में सरकार ने पशुधन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। मंत्री ने कहा कि राजस्थान में बड़ी संख्या में पशुधन है और उनके लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से गोचर और औरण भूमि में घास, चारा और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के विकास के लिए यह जरूरी है कि घास और देशी वृक्षों के बीजों का संग्रह और संरक्षण किया जाए। गांवों में पहले इस प्रकार की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण कई स्थानीय प्रजातियां धीरे-धीरे समाप्त होने की स्थिति में पहुंच रही थीं।

प्रदेश के 30 जिलों में 150 बीज बैंक स्थापित

मंत्री दिलावर ने बताया कि राज्य सरकार ने बजट घोषणा के अनुरूप प्रदेश के 30 जिलों में कुल 150 वनस्पतिक बीज बैंक स्थापित किए हैं। इन बीज बैंकों का उद्घाटन 22 अप्रैल 2025 को किया गया था।

उन्होंने कहा कि इन बीज बैंकों का उद्देश्य स्थानीय प्रजातियों के घास, चारा और वृक्षों के बीजों का संग्रहण और संरक्षण करना है, ताकि भविष्य में चारागाह विकास के कार्यों में उनका उपयोग किया जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ बीज बैंक अच्छा कार्य कर रहे हैं, लेकिन कई स्थानों पर अपेक्षित स्तर पर बीजों का संग्रहण नहीं हो रहा है। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस दिशा में गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।

स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण पर जोर

मंत्री दिलावर ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय प्रजाति के वनस्पति बीजों के संग्रहण और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि इन बीजों का व्यवस्थित भंडारण किया जाए और जहां भी आवश्यकता हो वहां उन्हें उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो इससे चारागाह विकास को गति मिलेगी और पशुधन के लिए चारे की समस्या भी कम होगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। गांवों के लोग बीजों के संग्रहण और संरक्षण की प्रक्रिया से जुड़कर आय का नया स्रोत प्राप्त कर सकेंगे।

विलुप्त होती प्रजातियों को बचाने की पहल

मंत्री ने कहा कि वनस्पतिक बीज बैंक केवल चारे और घास की उपलब्धता सुनिश्चित करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण साधन बन सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे इस योजना को गंभीरता से लागू करें और इसे सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। मंत्री ने कहा कि यदि सभी अधिकारी जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे तो यह योजना आने वाले समय में राजस्थान के लिए एक उदाहरण बन सकती है।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों को बीज बैंक की कार्यप्रणाली, उनके संचालन और भविष्य की रणनीति के बारे में भी जानकारी दी गई। मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस पहल से राज्य में चारागाह विकास को नई दिशा मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

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