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मदन दिलावर का ऐलान: राजस्थान में शुरू हुई ‘ऑन डिमांड परीक्षा

मदन दिलावर का ऐलान: राजस्थान में शुरू हुई ‘ऑन डिमांड परीक्षा

मनीषा शर्मा। शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) के मौके पर राजस्थान में शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल की गई। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर (Madan Dilawar) ने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में हिस्सा लिया और इस अवसर पर कई अहम घोषणाएँ कीं। इनमें सबसे बड़ी घोषणा रही ‘ऑन डिमांड परीक्षा’ (On Demand Examination Program) की शुरुआत। यह कार्यक्रम छात्रों के लिए एक तोहफा है, जिससे उन्हें अब फेल होने के डर से मुक्ति मिलेगी और उनका कीमती साल बर्बाद नहीं होगा।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा सर्वेक्षण में राजस्थान 11वें स्थान से छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह राज्य के शिक्षा तंत्र की बड़ी उपलब्धि है और इसी कड़ी में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए यह नई पहल की गई है।

क्या है ‘ऑन डिमांड परीक्षा’ और कैसे मिलेगी सुविधा?

‘ऑन डिमांड परीक्षा’ का उद्देश्य छात्रों को परीक्षा के दबाव से मुक्त करना है। इस व्यवस्था के तहत अब छात्र अपनी सुविधानुसार परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

  • पहले चरण में यह सुविधा जयपुर, उदयपुर और बीकानेर में शुरू की जा रही है।

  • हर दिन 100 छात्र परीक्षा दे सकेंगे।

  • यदि कोई छात्र किसी परीक्षा में फेल हो जाता है, तो उसे पूरे साल इंतजार करने की आवश्यकता नहीं होगी। वह इस प्रोग्राम के तहत जल्दी परीक्षा देकर अगली कक्षा में प्रवेश पा सकेगा।

इससे छात्रों का समय बचेगा और वे बिना किसी देरी के अपने करियर को आगे बढ़ा सकेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह प्रणाली विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगी और पढ़ाई के प्रति उनके दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाएगी।

‘प्रखर राजस्थान 2.0’ अभियान की शुरुआत

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस मौके पर एक और महत्वपूर्ण कार्यक्रम ‘प्रखर राजस्थान 2.0’ की शुरुआत की। यह अभियान 90 दिनों तक चलेगा और इसका उद्देश्य कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों में पढ़ने की क्षमता को मजबूत बनाना है।

इस अभियान के तहत:

  • कमजोर विद्यार्थियों की भाषा संबंधी समझ को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

  • एआई आधारित ओआरएफ (Oral Reading Fluency) प्रणाली से बच्चों का प्रारंभिक टेस्ट लिया गया है।

  • बच्चों की सीखने की गति और उनकी पढ़ने की क्षमता को डिजिटल और आधुनिक तकनीक के जरिए बेहतर बनाया जाएगा।

यह पहल खासकर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण होगी, जो पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं और जिन्हें अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।

शिक्षा विभाग में ‘स्वदेशी’ पर जोर

समारोह के दौरान शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग में स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विभाग अब केवल स्वदेशी उत्पादों का ही इस्तेमाल करेगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में स्वदेशी के प्रति गर्व और जागरूकता भी पैदा करेगा।

इसके अलावा समारोह में शिक्षा मंत्री ने शिक्षक सम्मान पत्रिका और शिक्षा विभाग की ‘शिविरा’ पत्रिका के विशेषांक का भी विमोचन किया। यह पत्रिकाएँ शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचार और उपलब्धियों को दर्शाती हैं।

पर्यावरण संरक्षण में शिक्षा विभाग की भूमिका

शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब तक राजस्थान में 11 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। इनमें से 4 करोड़ पौधे अकेले शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि शिक्षा विभाग न केवल शिक्षा सुधार बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

राजस्थान के छात्रों के लिए नए युग की शुरुआत

‘ऑन डिमांड परीक्षा’ और ‘प्रखर राजस्थान 2.0’ जैसे कार्यक्रमों से यह स्पष्ट हो जाता है कि राज्य सरकार शिक्षा को और अधिक छात्र-केंद्रित, आधुनिक और लचीला बनाने की दिशा में काम कर रही है।

  • अब छात्रों को असफल होने के डर से छुटकारा मिलेगा।

  • उन्हें अपनी पढ़ाई में तेजी लाने और करियर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

  • स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण जैसी पहलें शिक्षा के व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखती हैं।

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