अजमेर में एक बालिग हिंदू युवती के घर से अचानक लापता होने और बाद में एक युवक के साथ पाए जाने से मामला संवेदनशील स्थिति में पहुंच गया है। बाबूगढ़ निवासी तानिया यादव 2 फरवरी को बिना बताए घर से चली गई थी, जिसके बाद परिवार ने उसकी खोजबीन शुरू की। बाद में सूचना मिली कि युवती सुजानगढ़ के नया बाजार चौक निवासी समीर दमामी के साथ है। इस लिव इन रिलेशनशिप खुलासे के बाद परिवार में तनाव और चिंता बढ़ गई है।
मामले को गंभीर बनाने वाली बात यह है कि युवती ने परिवार को स्पष्ट रूप से बताया है कि वह अपनी इच्छा से युवक के साथ रहना चाहती है। परिवार द्वारा समझाने की कई कोशिशों के बावजूद उसने कथित रूप से यह कहा कि वह किसी भी कीमत पर समीर से अलग नहीं होगी। उसके इस भावनात्मक बयान ने विवाद को और जटिल बना दिया है, क्योंकि परिवार का आरोप है कि युवती को बहला–फुसलाकर अपने साथ ले जाया गया है, जबकि युवती स्वयं अपनी स्वतंत्र इच्छा का दावा कर रही है।
लिव-इन कार्ड और कोर्ट प्रक्रिया के दावों से बढ़ी उलझन
परिजनों ने यह भी कहा है कि युवती और युवक ने करीब 45 हजार रुपये खर्च कर एक लिव-इन रिलेशनशिप कार्ड बनवाया है। उनका दावा है कि यह दस्तावेज कोर्ट की प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया है। हालांकि इस कथित दस्तावेज की वैधता को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की जांच की जाएगी और इसी के आधार पर स्पष्ट होगा कि यह कागज कानूनी रूप से मान्य है या नहीं।
परिवार की ओर से लगाए गए आरोप और युवती के अपने बयान के बीच स्पष्ट विरोधाभास होने के कारण मामला और अधिक पेचीदा हो गया है। एक ओर परिवार का कहना है कि युवती पर मानसिक दबाव डाला गया, जबकि दूसरी ओर युवती लगातार यह दोहरा रही है कि वह अपनी मर्जी से युवक के साथ रहना चाहती है। ऐसे मामलों में कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करता है, लेकिन साथ ही यह देखना भी आवश्यक होता है कि कोई व्यक्ति दबाव, धोखे या भय के कारण तो निर्णय नहीं ले रहा।
गंज थाने के बाहर समझाइश और पुलिस की दखलअंदाजी
जैसे ही मामले की जानकारी स्थानीय लोगों और संगठनों को मिली, वे गंज थाना के बाहर एकत्र होने लगे। यहां युवती को समझाने का प्रयास किया गया और स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई। पुलिस को मौके पर पहुंचकर माहौल शांत करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार का तनाव फैलने से रोकना अनिवार्य होता है, इसी कारण मौके पर समझाइश दी गई और सभी पक्षों को शांत रहने का आग्रह किया गया।
पुलिस ने दोनों पक्षों की उपस्थिति में प्रारंभिक बातचीत कराई और युवती से उसकी इच्छा, सुरक्षा और मानसिक स्थिति को लेकर प्रश्न पूछे गए। ऐसे मामलों में पुलिस काउंसलिंग को प्राथमिकता देती है ताकि किसी भी व्यक्ति पर अनावश्यक दबाव न पड़े और निर्णय स्वेच्छा से लिया जाए।
दस्तावेजों और उम्र की जांच, कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवती की उम्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया वह बालिग प्रतीत हो रही है, लेकिन आधिकारिक उम्र प्रमाणपत्रों के मिलान के बाद ही इस पर अंतिम पुष्टि होगी। इसके साथ ही युवक और युवती दोनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ सके।
पुलिस काउंसलिंग के जरिए मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि युवती बालिग है और वह अपनी मर्जी से कहीं जाना चाहती है, तो कानून उसे यह अधिकार देता है। लेकिन यदि परिवार के आरोप सही पाए गए या किसी प्रकार का लालच, धोखा या दबाव सिद्ध होता है, तो कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था प्रभावित न होने पाए। यह मामला उन संवेदनशील स्थितियों में से एक है, जिनमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक दबाव और पारिवारिक चिंताओं—तीनों का संतुलन बैठाना कानून और प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है।


