महाशिवरात्रि पर्व के निकट आते ही अजमेर में एक बार फिर धार्मिक और ऐतिहासिक बहस गहराती दिखाई दे रही है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने आधिकारिक रूप से जिला प्रशासन को पत्र भेजकर मांग की है कि महाशिवरात्रि के अवसर पर अजमेर दरगाह परिसर में रुद्राभिषेक और शिव पूजा की अनुमति दी जाए। इस पत्र के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
रुद्राभिषेक के लिए मांगी अनुमति, दरगाह को बताया प्राचीन शिव मंदिर
डॉ. परमार द्वारा भेजे गए पत्र में यह दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह परिसर का संबंध लंबे समय से एक प्राचीन हिंदू शिव मंदिर से रहा है। उनका कहना है कि कई ऐतिहासिक संदर्भ और धार्मिक कथाएं इस स्थान के प्राचीन स्वरूप की पुष्टि करती हैं। इसी आधार पर उनकी संस्था ने मांग की है कि महाशिवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर शिवभक्तों को वहां रुद्राभिषेक करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन के समक्ष यह भी कहा है कि यह मांग केवल धार्मिक आधार पर नहीं बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। उनकी संस्था का उद्देश्य समाज में सौहार्द बनाए रखते हुए ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर करना है।
शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन का दावा, सुरक्षा व्यवस्था की मांग
डॉ. परमार ने जिला कलेक्टर को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि अनुमति मिलती है, तो पूरा धार्मिक अनुष्ठान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया है कि कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी संभावित विवाद या अव्यवस्था से बचा जा सके। उनका कहना है कि महाशिवरात्रि करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं के लिए आस्था का पर्व है और इस अवसर पर रुद्राभिषेक के अधिकार को धार्मिक स्वतंत्रता के रूप में देखा जाना चाहिए।
न्यायालय में भी प्रस्तुत किया गया शिव मंदिर होने का दावा
यह विवाद केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं है। डॉ. परमार ने इसी दावे को लेकर न्यायालय का भी रुख किया है। अदालत में दाखिल याचिका में उन्होंने कहा है कि उपलब्ध ऐतिहासिक और धार्मिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्थल मूल रूप से प्राचीन शिव मंदिर रहा है, और बाद में इसके स्वरूप में बदलाव आया। इस मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को निर्धारित की गई है। इसलिए सभी की निगाहें अब अदालत के निर्णय और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। मामले के न्यायिक पक्ष के चलते यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण हो गया है।
प्रशासन ने पत्र मिलने से किया इंकार
मीडिया में मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा गर्म हो गई है। कई संगठनों और श्रद्धालुओं में उत्सुकता है कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाएगा। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि उन्हें इस प्रकार का कोई औपचारिक पत्र प्राप्त हुआ है। प्रशासन के इस बयान से स्थिति और भी दिलचस्प हो गई है, क्योंकि एक ओर संस्था का दावा है कि पत्र भेजा जा चुका है और दूसरी ओर प्रशासन इसकी पुष्टि नहीं कर रहा।
बढ़ती चर्चाएं और आगामी निर्णय की प्रतीक्षा
अजमेर में यह मुद्दा केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक दावों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और न्यायालयी फैसलों का भी संगम बन गया है। महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व से पहले इस प्रकार की मांग का उठना स्थानीय वातावरण में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और न्यायालय पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मामले पर आगे क्या रुख अपनाते हैं। महाशिवरात्रि के निकट आते ही यह प्रश्न और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या दरगाह परिसर में रुद्राभिषेक करने की अनुमति दी जा सकेगी या नहीं।


