राजस्थान शिक्षा विभाग ने भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के एक गंभीर मामले में कड़ा कदम उठाते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जूनी बाली में पदस्थापित रहे व्याख्याता हरसनराम देवासी को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। शिक्षा निदेशालय द्वारा कराई गई विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि हरसनराम ने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अन्य अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा दी, पहचान से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर किया और एक अभ्यर्थी को नौकरी दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
विभागीय जांच में हरसनराम के खिलाफ गंभीर आरोप साबित
शिक्षा निदेशालय की जांच रिपोर्ट के अनुसार हरसनराम के खिलाफ परीक्षा अधिनियम सहित कुल 9 धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। जांच में यह भी सामने आया कि प्रोबेशन अवधि के दौरान उसका आचरण, कार्य-व्यवहार और सत्यनिष्ठा शिक्षक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं थी। विभागीय नियमों का उल्लंघन, अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहना और जेल जाने की जानकारी विभाग से छिपाना जैसे गंभीर आरोप भी जांच में सिद्ध पाए गए। इन्हीं आधारों पर निदेशालय ने उसे सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया।
मेधावी छात्र से आरोपी तक का सफर
सांचौर के जोधावास निवासी हरसनराम उर्फ हरीश या हरचंद, पुत्र आईदानाराम देवासी, पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहा है। उसने तीन बार NET-JRF परीक्षा क्वालिफाई की और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। वर्ष 2016 में उसे तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में पहली सरकारी नौकरी मिली। इसी वर्ष द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में उसने प्रदेश में तीसरी रैंक प्राप्त की, जिससे उसका नाम शिक्षा जगत में तेजी से उभरा।
लगातार मिलती रहीं बड़ी सफलताएं
हरसनराम का वर्ष 2018 में संस्कृत व्याख्याता पद पर चयन हुआ। इसी साल हिंदी व्याख्याता भर्ती परीक्षा में भी उसने प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जूनी बाली में उसकी नियुक्ति हुई। उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों और परीक्षाओं में लगातार उच्च रैंक के कारण उसे एक होनहार शिक्षक के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन बाद में सामने आए मामलों ने उसकी पूरी छवि को कटघरे में खड़ा कर दिया।
20 लाख रुपये में तय हुई थी डील
जांच में सामने आया कि 13 सितंबर 2021 को हरसनराम ने दौसा जिले के महवा निवासी डालूराम मीणा की जगह सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा दी थी। इसके बदले दोनों के बीच 20 लाख रुपये की डील तय हुई थी। इसके अगले दिन वह अपने गांव के दोस्त जैसाराम की जगह भी परीक्षा देने पहुंचा। पहली पारी की परीक्षा वह सफलतापूर्वक दे चुका था, लेकिन दूसरी पारी के दौरान संदेह होने पर उसे पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
निलंबन के बावजूद चलता रहा मामला
मामले की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने हरसनराम को निलंबित कर दिया था। इस बीच डालूराम मीणा को एसआई भर्ती परीक्षा में 1402वीं रैंक मिली और वह प्रशिक्षण पर भी चला गया। करीब ढाई साल बाद शिकायत के आधार पर दस्तावेजों और फोटो का मिलान किया गया, जिसमें डमी परीक्षार्थी बैठने की पुष्टि हुई। इसके बाद फरवरी 2024 में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने हरसनराम और डालूराम मीणा दोनों को गिरफ्तार किया।
असिस्टेंट प्रोफेसर चयन भी बना विवाद
हैरानी की बात यह रही कि इन गंभीर आरोपों और लंबित मामलों के बावजूद वर्ष 2024 में हरसनराम का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भी हो गया। हालांकि विभागीय जांच पूरी होने और आपराधिक मामलों की गंभीरता को देखते हुए आखिरकार शिक्षा निदेशालय ने उसे राजकीय सेवा से बाहर करने का फैसला लिया। विभाग का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है ताकि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।


