मनीषा शर्मा। भारत में हर साल लाखों लोग इनकम टैक्स से राहत पाने के लिए तरह-तरह के निवेश और कानूनी रास्तों की तलाश करते हैं। धारा 80C, HRA क्लेम, होम लोन और इंश्योरेंस जैसी स्कीमें तो अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि टैक्स बचाने का सबसे बड़ा हथियार उनके घर के भीतर ही मौजूद है—उनकी पत्नी।
यह कोई मजाक नहीं है, बल्कि इनकम टैक्स कानून में छिपा हुआ एक ऐसा प्रावधान है, जिसे सही ढंग से इस्तेमाल करके आप हजारों रुपए की टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं। अक्सर लोग पत्नी के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर करते हैं, लेकिन ‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ (Clubbing of Income) के नियम में फंस जाते हैं और फायदा उठाने की बजाय मुश्किल में पड़ जाते हैं। इसलिए इस पूरे कानूनी प्रावधान को समझना बेहद जरूरी है।
क्लबिंग प्रावधान क्या है?
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 64 (Section 64 of Income Tax Act) के तहत यदि आप अपनी पत्नी को पैसे देते हैं और वह पैसा किसी निवेश में लगाया जाता है, तो उससे होने वाली कमाई (जैसे ब्याज, किराया, डिविडेंड या कैपिटल गेन) आपकी आय में जोड़ दी जाती है। इसे ही क्लबिंग ऑफ इनकम कहा जाता है। इसका सीधा मतलब है कि यदि पत्नी को गिफ्ट किए गए पैसे से कोई आय उत्पन्न होती है, तो उस पर टैक्स आपको भरना होगा।
यहीं पर लोग उलझ जाते हैं और मान लेते हैं कि पत्नी के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का कोई फायदा नहीं। लेकिन हकीकत यह है कि सही रणनीति और कानूनी समझ के साथ यही तरीका आपकी टैक्स बचाने की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
गिफ्ट टैक्स और क्लबिंग का पेंच
इनकम टैक्स कानून के अनुसार, पति-पत्नी के बीच दिया गया गिफ्ट पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है। इसका मतलब यह है कि यदि आप अपनी पत्नी को पैसे, शेयर, प्रॉपर्टी या अन्य कोई संपत्ति गिफ्ट करते हैं, तो उस पर किसी तरह का गिफ्ट टैक्स नहीं लगेगा।
लेकिन समस्या तब आती है जब पत्नी उस पैसे को कहीं निवेश करती हैं। ऐसे निवेश से जो आय उत्पन्न होगी, वह आपकी आय में जुड़ जाएगी। इसलिए टैक्स प्लानिंग करते समय यह समझना जरूरी है कि कहां निवेश करना है और किस तरीके से, ताकि क्लबिंग का नियम लागू न हो या फिर कम से कम असर दिखाए।
टैक्स बचाने के स्मार्ट तरीके
पत्नी की टैक्स स्लैब का फायदा
अगर आपकी पत्नी की कोई अलग आय नहीं है या वे कम टैक्स स्लैब (5% या 10%) में आती हैं, तो आप उनके नाम पर निवेश करके काफी टैक्स बचा सकते हैं। मसलन, PPF, टैक्स-फ्री बॉन्ड्स और इक्विटी शेयर जैसे विकल्पों में निवेश करने से परिवार की कुल टैक्स देनदारी काफी घट सकती है।
HRA का फायदा
अगर घर आपकी पत्नी के नाम पर है, तो आप उन्हें हर महीने किराया देकर HRA क्लेम कर सकते हैं। इस स्थिति में आपकी टैक्सेबल इनकम घटेगी और टैक्स देनदारी कम होगी। पत्नी को किराए की इनकम पर टैक्स दिखाना होगा, लेकिन अगर वे कम टैक्स स्लैब में हैं तो उनकी देनदारी बहुत ही मामूली होगी।
लोन का कानूनी रास्ता
क्लबिंग का नियम गिफ्ट पर लागू होता है, लेकिन लोन पर नहीं। आप अपनी पत्नी को कम ब्याज पर लोन दे सकते हैं और इसका पूरा डॉक्यूमेंटेशन रख सकते हैं। इस पैसे से होने वाली इनकम पत्नी की आय मानी जाएगी और आपकी आय में क्लब नहीं होगी।
जॉइंट अकाउंट में प्राथमिक धारक बनाएं पत्नी
अगर आप निवेश के लिए जॉइंट अकाउंट खोलते हैं, तो प्राथमिक धारक (Primary Holder) पत्नी को बनाएं। नियमों के अनुसार, जॉइंट अकाउंट से होने वाले ब्याज पर टैक्स की देनदारी प्राथमिक धारक पर होती है। ऐसे में पत्नी का नाम पहले रखने से टैक्स स्लैब के आधार पर परिवार की टैक्स देनदारी काफी कम हो सकती है।
कानूनी रास्ते जो टैक्स बचा सकते हैं
शादी से पहले गिफ्ट – यदि आप शादी से पहले मंगेतर के नाम पर संपत्ति या गिफ्ट देते हैं, तो क्लबिंग प्रावधान लागू नहीं होता। इसका कारण यह है कि उस समय वह रिश्ता पति-पत्नी का नहीं माना जाता।
स्त्रीधन का लाभ – पत्नी को घर खर्च के लिए दिए गए पैसे अगर वह बचाकर निवेश करती हैं, तो उस पर होने वाली आय उनकी मानी जाएगी, आपकी नहीं। इसे स्त्रीधन का दर्जा दिया जाता है।
हेल्थ इंश्योरेंस – धारा 80D के तहत आप अपनी पत्नी के नाम पर हेल्थ इंश्योरेंस लेकर ₹25,000 तक की टैक्स छूट पा सकते हैं।
डॉक्यूमेंटेड लोन – पत्नी को दिया गया पैसा गिफ्ट न दिखाकर लोन दिखाएं। ब्याज का भुगतान समय पर हो और पूरा एग्रीमेंट बैंकिंग चैनल से किया गया हो, तो इससे टैक्स बचत हो सकती है।
जॉइंट निवेश – एफडी, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश साधनों में पत्नी को प्राथमिक धारक बनाकर टैक्स स्लैब का लाभ उठाएं।
क्या करें और क्या न करें
टैक्स सेविंग करते समय हमेशा ध्यान रखें कि हर लेन-देन कानूनी और डॉक्यूमेंटेड हो। गलत जानकारी देना या क्लबिंग प्रावधानों को नजरअंदाज करना आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकता है। किसी बड़े निवेश या टैक्स प्लानिंग से पहले फाइनेंशियल एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर रहेगा।


