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सिटी रेलवे स्टेशन की 136 करोड़ की जमीन 99 साल की लीज पर, वाणिज्यिक और आवासीय प्रोजेक्ट का रास्ता साफ

सिटी रेलवे स्टेशन की 136 करोड़ की जमीन 99 साल की लीज पर, वाणिज्यिक और आवासीय प्रोजेक्ट का रास्ता साफ

शहर के बीचोंबीच स्थित सिटी रेलवे स्टेशन की महत्वपूर्ण भूमि को अब रेलवे प्रबंधन 99 साल की लीज पर देने की तैयारी में है। रेल भूमि विकास प्राधिकरण, आरएलडीए के माध्यम से इस परियोजना को स्वरूप दिया जा रहा है। रेलवे प्रशासन की ओर से इस जमीन को एक बड़े वाणिज्यिक और आवासीय प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है, जिसे लेकर निविदा प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। इस भूमि पर निजी डेवलपर को न केवल बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी जाएगी, बल्कि रेलवे से जुड़े कई आवश्यक पुनर्निर्माण कार्य भी अनिवार्य रूप से पूरे करने होंगे।

जानकारी के अनुसार रेलवे ने जिस भूमि को लीज पर देने का निर्णय किया है, वह सेंट्रल जेल के सामने तथा पुलिस लाइन रोड के दूसरे छोर पर स्थित है। यह भूखंड लगभग 19,588.47 वर्ग मीटर का है, जिसे 99 वर्षों के लिए पट्टे पर देने का प्रस्ताव है। इसकी अनुमानित कीमत 136.66 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। रेलवे ने इच्छुक कंपनियों और डेवलपर्स से ऑनलाइन ई-बिड आमंत्रित की हैं, जिसकी अंतिम तिथि 26 फरवरी तय की गई है। निविदा लेने वाले डेवलपर को भूखंड प्राप्त करने के बाद रेलवे की वर्तमान आरपीएफ बैरक का पुनर्निर्माण भी करवाना होगा, जिस पर करीब 78 लाख रुपये की लागत आएगी।

यह भूमि शहर की प्रमुख लोकेशन पर स्थित है, जहां से बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पुलिस लाइन, प्रशासनिक भवन और अनेक सरकारी संस्थाएं बेहद नजदीक हैं। प्रस्तावित प्रोजेक्ट की खासियत यह भी है कि यह 45 मीटर चौड़ी मास्टर प्लान सड़क से जुड़ा हुआ है, जो भविष्य में इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी, यातायात व्यवस्था और व्यावसायिक संभावनाओं को और मजबूत बनाएगी। रेलवे प्रबंधन का मानना है कि यह परियोजना शहर के विकास की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम होगी, क्योंकि इस लोकेशन पर निजी क्षेत्र द्वारा विकसित होने वाली आधुनिक सुविधाएं पूरे क्षेत्र की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगी।

परियोजना के तहत भूमि का उपयोग नगर नियोजन नियमों और जोनल प्लान 2031 के अनुसार किया जाएगा। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि कुल भूमि का 70 प्रतिशत आवासीय उपयोग में लिया जाएगा, जबकि 30 प्रतिशत भाग वाणिज्यिक उपयोग हेतु आरक्षित रहेगा। इससे एक मिश्रित उपयोग वाला आधुनिक टाउनशिप क्षेत्र विकसित होने की संभावना है, जिसमें निवास, व्यापार, पार्किंग, कार्यालयों और अन्य लोक उपयोगी संरचनाओं का संतुलित निर्माण किया जा सकेगा।

डेवलपर को इस परियोजना के अंतर्गत कई अनिवार्य कार्य भी पूरे करने होंगे। वर्तमान में रेलवे की भूमि पर बने आरपीएफ बैरक को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से दो मंजिला भवन बनाना होगा। यह भवन 310 वर्ग मीटर क्षेत्र में निर्मित किया जाएगा, जिसमें आवासीय कमरे, विद्युत, जल आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही रेलवे यार्ड को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उसकी सीमा से सटे लगभग 463 मीटर लंबे क्षेत्र में नई बाउंड्रीवॉल का निर्माण भी डेवलपर को करवाना होगा।

इसके अतिरिक्त, परियोजना स्थल पर मौजूद वर्तमान संरचनाओं का ध्वस्तीकरण, लॉन्ड्री और अन्य अस्थायी निर्माणों का स्थानांतरण तथा स्क्रैप सामग्री का निस्तारण भी डेवलपर की जिम्मेदारी होगा। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि परियोजना को चरणबद्ध रूप से पूरा करना होगा ताकि रेलवे परिसर की सुरक्षा और संचालन प्रभावित न हो सके।

इस क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं को भी परियोजना का हिस्सा बनाया गया है। डेवलपर को पर्याप्त जलापूर्ति व्यवस्था, सीवरेज सिस्टम, ड्रेनेज व्यवस्था, बिजली की आंतरिक एवं बाह्य सप्लाई, सुगम सड़क व्यवस्था, पाथवे, पार्किंग और हरित क्षेत्र के विकास का कार्य भी पूरा करना होगा। इन सुविधाओं के निर्माण के बिना परियोजना को पूर्ण नहीं माना जाएगा। रेलवे का कहना है कि इस तरह की आधारभूत सुविधाओं से यह क्षेत्र भविष्य के शहरी विकास का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है और इससे शहर के व्यावसायिक और आवासीय दोनों क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।

परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसे निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित किया जाएगा, जिससे न केवल रेलवे को राजस्व प्राप्त होगा, बल्कि शहर को एक आधुनिक और योजनाबद्ध उपनगरीय क्षेत्र भी मिलेगा। रेलवे प्रबंधन का मानना है कि लंबे समय से खाली पड़ी इस भूमि का उपयोग इस प्रकार के विकास कार्यों में किया जाना शहर और रेलवे दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। चूंकि यह क्षेत्र पहले से ही प्रशासनिक और आवासीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां विकसित होने वाली परियोजना से आसपास के इलाकों में भी विकास की गति बढ़ेगी।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कौन-सी कंपनी या डेवलपर इस परियोजना में रुचि दिखाता है और निविदा प्रक्रिया के बाद इस भूखंड का विकास किसे सौंपा जाता है। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में यह इलाके के विकास को एक नई दिशा दे सकती है और शहर की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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