राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अजमेर में एक कार्यक्रम के दौरान राजनीति, समाज, आरक्षण और अपने राजनीतिक जीवन से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति कॉमर्शियल हो गई है और लोग धंधा करने के लिए राजनीति में आ रहे हैं, जबकि उनका उद्देश्य केवल सेवा का रहा है।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि समरावता कांड में गिरफ्तार बच्चों से जेल में मिलने पर उन्हें मंत्री रहते हुए डांट तक पड़ी थी, लेकिन उन्होंने इसे अपना नैतिक कर्तव्य बताया।
“संकट में समाज को नहीं संभालना सबसे बड़ा पाप होता”
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि जब वे समरावता हिंसा के बाद जेल में बंद बच्चों से मिलने गए, तब उन्हें यह कहकर फटकार लगाई गई कि मंत्री रहते हुए अपराधियों से नहीं मिलना चाहिए। इस पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“अगर संकट की घड़ी में समाज के भाई-बहनों को जाकर नहीं संभालूंगा, तो उससे बड़ा पाप कुछ नहीं हो सकता। डांट पड़ेगी तो पड़ जाएगी, मंत्री पद ही तो जाएगा।”
राजनीति को बताया सेवा का माध्यम
उन्होंने कहा कि वे कभी दल या क्षेत्र देखकर मदद नहीं करते। जरूरत पड़ने पर वे हर व्यक्ति की सेवा के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आजकल नेता व्यापार की तरह राजनीति कर रहे हैं, लेकिन उनका भाव केवल जनसेवा का है।
वसुंधरा राजे से मतभेद और फिर एक पार्टी में वापसी
किरोड़ी मीणा ने अपने राजनीतिक संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि—
एक समय वसुंधरा राजे ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था
उनका टिकट भी काट दिया गया
उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा, जिसमें वे जीत गए
उन्होंने 2009 के दौसा लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस चुनाव में सेना, ड्रोन और हवाई निगरानी तक लगाई गई थी, लेकिन जनता ने उन्हें रिकॉर्ड मतों से जिताया और भाजपा-कांग्रेस दोनों उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
“मेरे रहते आरक्षण का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता”
किरोड़ी मीणा ने आरक्षण के मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा—
“जब तक मेरे शरीर में प्राण हैं, तब तक आपके आरक्षण का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
उन्होंने बताया कि एक समय 32 विधायक आरक्षण के मुद्दे पर एकजुट हुए थे, लेकिन जब दिल्ली तक पत्र भेजने का समय आया तो 31 विधायक पीछे हट गए। उस समय अकेले उन्होंने सड़कों पर उतरकर विरोध किया।
कांग्रेस शासन में गिरफ्तारी और RPSC आंदोलन
उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। अजमेर में RPSC में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान वे खुद आयोग के अंदर घुस गए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
पेपर लीक में बड़े अधिकारी और अध्यक्ष तक शामिल थे
सिर्फ आदिवासी अधिकारियों को गिरफ्तार करना गलत है
RPSC के तत्कालीन अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए
“देश में राजस्थान के कृषि मंत्री को सब जानते हैं”
किरोड़ी मीणा ने कहा कि कृषि मंत्री का पद छोटा समझा जाता है, लेकिन उन्होंने अपने काम से इस पद की पहचान बदली है। उनके अनुसार—
“राजनीति में अगर किसी को देश जानता है, तो राजस्थान के कृषि मंत्री को जानता है।”
उन्होंने कहा कि पद उनका लक्ष्य नहीं है, बल्कि किसानों और जनता की सेवा उनका उद्देश्य है।
सामाजिक मुद्दों पर भी बोले किरोड़ी
महिलाओं और बच्चों के संस्कारों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि माता-बहनें ही असली यूनिवर्सिटी हैं, जो बच्चों को संस्कार देती हैं। उन्होंने समाज में बढ़ती गिरावट पर चिंता जताई और परिवारों से बच्चों पर ध्यान देने की अपील की।
हनुमान बेनीवाल पर क्या बोले?
हनुमान बेनीवाल से चल रहे विवाद पर उन्होंने कहा कि—
“यह परिवार का मामला है। अभी मेरी उनसे कोई बात नहीं हुई। अगर वे बात करेंगे, तो मैं भी कर लूंगा।”


