राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में गुरुवार को एसटी मोर्चा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष गोपीचंद मीणा का पदभार ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। समारोह में राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की उपस्थिति विशेष रही। पदभार ग्रहण के अवसर पर भाजपा नेताओं ने इसे संगठनात्मक दृष्टि से अहम बताते हुए कहा कि इससे आदिवासी समाज में पार्टी की पकड़ और अधिक मजबूत होगी। कार्यक्रम के दौरान गोपीचंद मीणा का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और उन्हें संगठन को नई दिशा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा संगठन को लेकर भ्रम: किरोड़ी लाल मीणा
समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि लंबे समय से यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि आदिवासी क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी का कोई मजबूत संगठन नहीं है। उन्होंने कहा कि गोपीचंद मीणा का भव्य स्वागत उसी भ्रम का जवाब है।
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि आज उनके पदभार ग्रहण समारोह में पूरे प्रदेश से आदिवासी समाज के लोग उमड़े हैं। यह साफ दर्शाता है कि भाजपा की जड़ें आदिवासी समाज में गहराई तक फैली हुई हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पार्टी नेतृत्व और एसटी मोर्चा मिलकर आदिवासी समाज के बीच अपनी पैठ और मजबूत करेगा तथा भाजपा की विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
एससी-एसटी वोट बैंक की राजनीति पर कांग्रेस पर हमला
कृषि मंत्री ने कांग्रेस पर एससी-एसटी वर्ग को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस अब खुद को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की हितैषी बताकर उनका वोट हासिल करना चाहती है। उन्होंने संसद में पंडित जवाहर लाल नेहरू के आरक्षण के खिलाफ दिए गए पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास एससी-एसटी विरोधी रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एससी-एसटी समाज को अपना स्थायी वोट बैंक बनाना चाहती है, लेकिन भाजपा अब सच्चाई लेकर जनता के बीच जाएगी। किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी किसी आदिवासी व्यक्ति को राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद तक नहीं पहुंचाया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने यह कर दिखाया है।
डिस्टर्ब्ड एरिया बिल पर सरकार का पक्ष
इस मौके पर किरोड़ी लाल मीणा ने एक दिन पहले मंजूर हुए राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया बिल पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब किसी क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव या दंगों जैसी स्थिति बनती है, तो वहां रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोग डर या दबाव में अपनी जमीन और मकान औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसी स्थिति को रोकने के लिए यह कानून लाया गया है। इस बिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति दबाव में आकर अपनी संपत्ति न बेचे और न ही उसकी संपत्ति कम कीमत पर खरीदी जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग अशांति फैलाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डोटासरा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
जब मीडिया ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा इस बिल को गुंडागर्दी को बढ़ावा देने वाला बताए जाने का सवाल किया, तो किरोड़ी लाल मीणा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डोटासरा बेलगाम बयान देते रहते हैं और बिना जानकारी के टिप्पणी करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह बिल गुंडागर्दी को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि उसे रोकने के लिए लाया गया है। किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि डोटासरा को जयपुर के रामगंज जैसे इलाकों में जाकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए, जहां एक वर्ग के लोग डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं और उनकी संपत्तियां कम दामों में खरीदी जा रही थीं।
डिस्टर्ब्ड एरिया बिल की प्रमुख विशेषताएं
यदि किसी क्षेत्र को सरकार द्वारा ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया जाता है, तो वहां संपत्ति की खरीद-बिक्री पर विशेष नियम लागू होंगे। ऐसे क्षेत्रों में कोई भी व्यक्ति कलेक्टर या सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मकान, दुकान या जमीन नहीं बेच सकेगा। संपत्ति बेचने से पहले कलेक्टर यह जांच करेगा कि विक्रेता अपनी मर्जी से सौदा कर रहा है या उस पर किसी प्रकार का दबाव है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संपत्ति उचित बाजार मूल्य पर ही बेची जा रही है। यह कानून अशांत क्षेत्रों में रहने वाले पुराने किरायेदारों को जबरन बेदखली से भी सुरक्षा प्रदान करता है। नियमों का उल्लंघन करने पर तीन से पांच साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। यह अपराध गैर-जमानती होगा, जिससे कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
आदिवासी राजनीति में नई सक्रियता
भाजपा एसटी मोर्चा के नए अध्यक्ष के पदभार ग्रहण के साथ ही प्रदेश की आदिवासी राजनीति में नई सक्रियता देखने को मिल रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे न केवल संगठन मजबूत होगा, बल्कि आगामी चुनावों में आदिवासी समाज का विश्वास भी और अधिक भाजपा के साथ जुड़ेगा।


