मनीषा शर्मा। राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने मंगलवार को एक अनूठी पहल करते हुए अपने कार्यालय परिसर के बाहर स्थित लॉन में बैठकर जनसुनवाई की। आमतौर पर मंत्रियों की जनसुनवाई उनके कक्षों में होती है, लेकिन इस बार डॉ. मीणा ने खुली जगह में ‘मंत्री दरबार’ लगाकर जनता की शिकायतें सुनीं। राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे लोग अपनी समस्याएं लेकर मंत्री के पास पहुँचे, जिनमें खाद की उपलब्धता, यूरिया की कमी, नकली खाद के मामले और प्रशासनिक उदासीनता जैसी मुद्दे प्रमुख रहे।
खाद और यूरिया की उपलब्धता पर दिया भरोसा
जनसुनवाई के दौरान मीडिया ने जब खाद और बीज की कमी को लेकर सवाल किए, तो कृषि मंत्री मीणा ने स्पष्ट कहा कि राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जितनी खाद और यूरिया की मांग राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भेजी थी, उतनी ही उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है।
यूरिया वितरण के दौरान लाइनें लगने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यूरिया के ट्रक पहुँचने से पहले किसानों को टोकन बांट दिए जाते हैं। इससे सभी लोग एक साथ दुकान पर जुट जाते हैं और लंबी कतारें बन जाती हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार लगातार केंद्र से संपर्क बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की वास्तविक कमी नहीं होने दी जाएगी।
इसके साथ ही उन्होंने नकली खाद के मामलों पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि पहले राज्य में लाखों मीट्रिक टन नकली खाद तैयार होती थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने ऐसी फैक्ट्रियों पर कड़ी कार्रवाई कर रोक लगाई है। नकली खाद पर अंकुश लगने से भी बाजार में कुछ अस्थायी कमी दिखाई देती है, लेकिन यह किसानों के हित में आवश्यक कदम है।
चूरू डॉक्टर लापरवाही केस में त्वरित दखल
जनसुनवाई के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया, जिसमें चूरू में 2020 में डॉक्टर की लापरवाही से एक प्रसूता की मौत हो गई थी। इस केस को लेकर उस समय पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया ने आंदोलन किया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि आंदोलन के बाद कुछ आरोपियों को राहत मिल गई थी, जबकि पीड़ित परिवार अब भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।
मामले की गंभीरता समझते हुए डॉ. मीणा ने तुरंत डीजी से बात कर पीड़ित परिवार की पूरी जानकारी जुटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में आंदोलन का उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए। यदि आंदोलन किया गया था, तो सभी निर्दोष लोगों के नाम मुकदमे से हटवाना चाहिए था, न कि केवल कुछ चुनिंदा लोगों को राहत दिलाना।
किसानों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता
जनसुनवाई के दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों के हितों को लेकर बेहद संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि एक बार खाद की कमी के दौरान 100 किसानों का प्रतिनिधिमंडल डेनमार्क भेजा गया था ताकि वैकल्पिक समाधान खोजे जा सकें।
हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि अत्यधिक फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड का उपयोग गंभीर समस्या बनता जा रहा है। यह केवल खेत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के भोजन को प्रभावित कर रहा है। मीणा ने किसानों को कम से कम रासायनिक उपयोग करने और सतर्क रहने की सलाह दी।
लॉन में जनसुनवाई का उद्देश्य
लॉन में बैठकर जनता की सुनवाई करने पर डॉ. मीणा ने कहा कि दूर-दराज से आने वाले लोगों को सहज माहौल में सुना जा सके, इसलिए उन्होंने मंत्री कक्ष के बजाय खुले लॉन को चुना। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को आम जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने यह खुला ‘जनदरबार’ लगाया।


