मनीषा शर्मा, अजमेर। हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 813वें उर्स की शुरुआत का प्रतीक मानी जाने वाली झंडे की रस्म शनिवार शाम को दरगाह के बुलंद दरवाजे पर संपन्न हुई। इस अवसर पर हजारों जायरीन उपस्थित रहे और परंपरागत तरीके से झंडे को बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया गया। झंडा चढ़ाने के दौरान तोप के 25 गोलों की सलामी दी गई, जो इस खास मौके का मुख्य आकर्षण रहा।
झंडा चढ़ाने की परंपरा
झंडा चढ़ाने की रस्म असर की नमाज के बाद शुरू हुई। गरीब नवाज गेस्ट हाउस से झंडे का जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों जायरीन ने हिस्सा लिया। जुलूस के सबसे आगे कलंदर और मलंग अपने हैरतअंगेज करतब दिखाते हुए चल रहे थे। उनके पीछे सूफियाना कलाम की धुन के साथ पुलिस के बैंडवादक माहौल को और पवित्र बना रहे थे। झंडा गौरी परिवार के सदस्य लेकर चल रहे थे। इसके साथ शाही कव्वाल सूफियाना कलाम पेश कर रहे थे। जैसे ही जुलूस दरगाह परिसर के पास पहुंचा, बड़े पीर साहब की पहाड़ी से लगातार तोप के गोल दागे गए। इन गोलों की सलामी के बाद झंडे को बुलंद दरवाजे पर चढ़ाया गया। परंपरा के अनुसार, पहले कदीमी झंडा चढ़ाया गया और फिर नया झंडा। यह झंडा उर्स के पूरे समय बुलंद दरवाजे पर लगा रहेगा।
जन्नती दरवाजे की जियारत
दरगाह प्रशासन ने घोषणा की है कि 1 जनवरी को जन्नती दरवाजा जायरीन के लिए खोला जाएगा। यह दरवाजा सिर्फ उर्स के दौरान खोला जाता है और इसे देखने व जियारत करने के लिए हजारों जायरीन आते हैं। रजब महीने का चांद दिखाई देने के आधार पर 1 या 2 जनवरी से उर्स की विधिवत शुरुआत होगी।
सुरक्षा और प्रबंधन
इस भव्य आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए थे। दरगाह बाजार में निजाम गेट से थोड़ी दूर बैरिकेड लगाए गए ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। दरगाह परिसर में अतिरिक्त भीड़ ना जुटे, इसके लिए फूल गली और लंगरखाना गली से निजाम गेट तक की दुकानें बंद कराई गईं। इसके साथ ही अतिक्रमण को भी हटाया गया।
जायरीन के उत्साह का केंद्र
जुलूस के दौरान जायरीन का उत्साह देखने लायक था। पूरे जुलूस में सूफियाना माहौल बना हुआ था। जहां एक ओर मलंगों और कलंदरों ने अपने करतब से लोगों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं दूसरी ओर शाही कव्वालों के कलाम ने इस मौके को और अधिक पवित्र बना दिया।


