‘हारे के सहारे’ बाबा श्याम के विश्वप्रसिद्ध वार्षिक लक्खी मेले 2026 का आगाज 21 फरवरी से होने जा रहा है। फाल्गुन मास में लगने वाला यह मेला आस्था, श्रद्धा और भक्ति का ऐसा महाकुंभ है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु खाटूश्यामजी पहुंचते हैं। हालांकि, मेले की शुरुआत से पहले ही सीकर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कमर कस ली है और कस्बे में व्यापक ‘सफाई अभियान’ शुरू कर दिया गया है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और संभावित सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए खाटूश्यामजी थाना पुलिस और जिला विशेष टीम (DST) ने संयुक्त रूप से बुधवार रात कस्बे में सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस कार्रवाई को पुलिस अधिकारी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तरह बता रहे हैं, ताकि मेले के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था या आपराधिक गतिविधि पर पहले ही अंकुश लगाया जा सके।
होटल, ढाबे और धर्मशालाएं खंगालीं, 11 संदिग्ध हिरासत में
पुलिस ने खाटूश्यामजी कस्बे के होटलों, ढाबों और धर्मशालाओं में देर रात तक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान बिना पहचान के ठहरे लोगों और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी गई। चेकिंग के दौरान पुलिस ने 11 संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
इसके अलावा कस्बे और आसपास के इलाकों से 7 लावारिस मोटरसाइकिलें भी जब्त की गई हैं। पुलिस का मानना है कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में लावारिस वाहन सुरक्षा के लिहाज से खतरा बन सकते हैं, इसलिए इन्हें पहले ही हटाया जा रहा है।
“पहचान पत्र के बिना परिंदा भी नहीं उड़ पाएगा”
खाटूश्यामजी थानाधिकारी पवन चौबे ने साफ शब्दों में कहा है कि मेले के दौरान सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उनका कहना है कि बिना पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को होटल, धर्मशाला या अन्य ठहरने के स्थानों पर रुकने नहीं दिया जाएगा।
पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे खाटूश्यामजी आने से पहले अपना आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र जरूर साथ रखें। अन्यथा उन्हें होटल में ठहरने के बजाय थाने के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। यह सख्ती मेले के दौरान भी जारी रहेगी।
पांच साल बाद बदला रिवाज, पहली बार आठ दिन का मेला
खाटूश्यामजी लक्खी मेले में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पिछले पांच वर्षों में पहली बार मेले की अवधि को 11 दिन से घटाकर 8 दिन कर दिया गया है। यह मेला अब 21 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित होगा।
यह महत्वपूर्ण निर्णय जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर गहन चर्चा की गई। प्रशासन का मानना है कि कम अवधि में मेला आयोजित करने से सुरक्षा प्रबंधन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए 5 बड़े बदलाव
प्रशासन ने इस बार मेले के लिए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर पांच बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। इन बदलावों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को घंटों लंबी कतारों से राहत देना और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाना है।
इनमें प्रमुख रूप से दर्शन पंक्तियों का पुनर्गठन, सीसीटीवी कैमरों की संख्या में वृद्धि, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, अस्थायी कंट्रोल रूम की स्थापना और आपात स्थिति के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का गठन शामिल है। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था को भी नए सिरे से डिजाइन किया जा रहा है, ताकि रींगस और सीकर की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
क्यों उमड़ता है खाटूश्यामजी में आस्था का सैलाब
खाटूश्यामजी लक्खी मेले की धार्मिक मान्यता अत्यंत प्राचीन और गहरी है। मान्यता है कि फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन ही महाभारत काल के वीर बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान किया था। श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे ‘श्याम’ नाम से पूजे जाएंगे और जो भी सच्चे मन से उनकी शरण आएगा, उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। इसी आस्था के चलते हर साल लाखों श्रद्धालु रींगस से खाटूश्यामजी तक लगभग 17 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। श्रद्धालु अपने साथ ‘निशान’ लेकर चलते हैं और बाबा के दरबार में चढ़ाते हैं। यह यात्रा भक्ति, अनुशासन और सामूहिक श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण मानी जाती है।
दिव्य श्रृंगार और श्याम कुंड का विशेष महत्व
मेले के दौरान बाबा श्याम का दिव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। फूलों, आभूषणों और वस्त्रों से सजे बाबा के दर्शन के लिए भक्त घंटों कतार में खड़े रहते हैं। इसके साथ ही श्याम कुंड में स्नान को भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मेले के दौरान बाबा श्याम के दर्शन और श्याम कुंड में डुबकी लगाने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
प्रशासन और पुलिस अलर्ट, श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
खाटूश्यामजी लक्खी मेला 2026 को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, पहचान पत्र साथ रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाकर ही इस विशाल धार्मिक आयोजन को सफल बनाया जा सकता है। ऐसे में श्रद्धालुओं का सहयोग ही मेले की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होगा।


