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खाचरियावास का हमला: “सिरप से बच्चों की मौत पर जांच क्यों नहीं हुई?”

खाचरियावास का हमला: “सिरप से बच्चों की मौत पर जांच क्यों नहीं हुई?”

मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी का दौर तेज है। राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पर तीखा हमला बोला है। खाचरियावास ने कहा कि सरकार के मंत्री सिर्फ बयान देने में व्यस्त हैं, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं कर रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सिरप से बच्चों की मौत हुई है, तो स्वास्थ्य विभाग ने अब तक उसकी जांच क्यों नहीं करवाई।

“सरकार अपनी है, काम कौन करेगा?”

खाचरियावास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मौजूदा सरकार के मंत्री सिर्फ यह कहते रहते हैं कि “यह काम होना चाहिए” या “वह काम होना चाहिए”। लेकिन असल सवाल यह है कि काम करेगा कौन? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “मंत्री शायद भूल गए हैं कि सरकार उनकी ही है। जब जिम्मेदारी उनकी है तो कार्रवाई भी उन्हें ही करनी चाहिए।”

उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि “जब मैं मंत्री था, तब कहा गया था कि जयपुर को दो हिस्सों में बांटा जाएगा, लेकिन मैंने ऐसा नहीं होने दिया। क्योंकि मैं जयपुर से मंत्री था और मुझे अपने शहर के लोगों की चिंता थी।”

“पहली बार सरकार में अधिकारी हावी हैं”

पूर्व मंत्री ने कहा कि इस बार की सरकार में एक अलग ही स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री, मंत्रियों पर अधिकारी हावी हो गए हैं। मंत्री खुद फैसले लेने के बजाय केवल बयान दे रहे हैं, जबकि फैसले नौकरशाही ले रही है।”

खाचरियावास ने किरोड़ीलाल मीणा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “वो कहते हैं कि मुख्यमंत्री से बात करूंगा। लेकिन बात कब तक करते रहेंगे? अब काम कब शुरू करेंगे?” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “अगर सड़कें चौड़ी नहीं हैं, हादसे बढ़ रहे हैं, तो मंत्री खुद कुछ क्यों नहीं कर रहे? क्या वे केवल गट्टे खेलने के लिए बैठे हैं?”

बच्चों की मौत पर सवाल – “स्वास्थ्य मंत्री ने जांच क्यों नहीं की?”

खाचरियावास ने सबसे गंभीर सवाल सिरप से बच्चों की मौत को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि कुछ सिरप पीने से बच्चों की मौत हो गई, तो आपके विभाग ने इस पर कोई जांच क्यों नहीं की? आपने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?”

उनका कहना था कि जब बच्चों की जान चली गई, तो विभागीय जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि “अगर सरकार संवेदनशील है, तो उसे जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। केवल बयान देने से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती।”

दो बच्चों के कानून पर भी उठाए सवाल

पूर्व मंत्री ने हाल ही में चल रही दो बच्चों के कानून को हटाने की चर्चाओं पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “अब मंत्री कह रहे हैं कि पंचायत और निकाय चुनावों में दो बच्चों का कानून हटा देंगे। क्या आप आबादी बढ़ाना चाहते हैं?”

खाचरियावास ने कहा कि “कल ही एक मां ने अपने बच्चों को इसलिए मार दिया क्योंकि उसके पास उन्हें खिलाने के लिए कुछ नहीं था। जब लोगों के पास रोटी-पानी का इंतजाम नहीं है, तब आप जनसंख्या बढ़ाने की बात क्यों कर रहे हैं? सरकार के पास न तो रोजगार की योजना है, न ही गरीबों के लिए ठोस नीति।”

“सरकार को बयानबाजी नहीं, कार्रवाई चाहिए”

खाचरियावास ने साफ कहा कि प्रदेश में सरकार के भीतर समन्वय की भारी कमी है। मंत्री अपने विभागों की जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए, केवल भाषण नहीं देने चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान में प्रशासनिक ढांचे में सुधार तभी संभव है, जब मंत्री खुद फील्ड में उतरें और जनता की समस्याओं को सुनें।

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