राजस्थान के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश में पिछले करीब 12 वर्षों से भाजपा सत्ता में है, और उसने हमेशा हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को उभारकर राजनीतिक लाभ उठाया है। लेकिन, उनके अनुसार, सत्ता में आने के बाद हिंदुओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर वही गंभीरता दिखाई नहीं देती, जिसकी अपेक्षा की जाती है।
“हिंदुओं के साथ हो रही बर्बरता”
खाचरियावास ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में लगातार हिंदू समुदाय पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर हिंदुओं की हत्या, अपमान, मंदिरों को नुकसान और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमले जैसी घटनाएँ सामने आई हैं, फिर भी केंद्र सरकार केवल औपचारिक बयान जारी करके अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेती है।
उनके अनुसार, भाजपा चुनाव के समय “हिंदू खतरे में है” जैसे नारे देकर वोट मांगती है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही हिंदू असुरक्षित महसूस करते हैं।
“ध्यान भटकाने के लिए फिर फैलाया जा रहा जहर”
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बांग्लादेश में हो रही घटनाओं से ध्यान हटाने के लिए भाजपा देश के भीतर फिर से हिंदू-मुस्लिम बहस को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि इससे वास्तविक प्रश्नों—यानी विदेश नीति, पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कूटनीतिक जिम्मेदारियों—पर चर्चा दब जाती है।
खाचरियावास ने सवाल उठाया कि अगर भाजपा देश के भीतर धार्मिक ध्रुवीकरण कर सकती है, तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदुओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठा पाती।
“अब नारे नहीं, सुरक्षा चाहिए”
पूर्व मंत्री ने कहा कि यदि भाजपा में नैतिकता बची है, तो उसे केवल बयानबाज़ी से आगे बढ़कर कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि—
हिंदू समाज अब सिर्फ भावनात्मक भाषण नहीं, बल्कि वास्तविक सुरक्षा चाहता है।
सरकार को यह साबित करना होगा कि वह केवल राजनीति नहीं, बल्कि संरक्षण और संवेदनशीलता की राजनीति करती है।
सरकार से ठोस कूटनीतिक कदमों की मांग
खाचरियावास ने केंद्र सरकार से मांग की कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े मामलों पर उच्च स्तरीय वार्ता की जाए, और जहां संभव हो, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीरता से मुद्दा उठाया जाए। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं को लेकर भारत की भूमिका हमेशा मानवीय और दृढ़ रहनी चाहिए।
राजनीतिक बहस और आगे बढ़ी
उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और तेज हो गया है। एक ओर कांग्रेस इसे मानवीय अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दे के रूप में पेश कर रही है, वहीं भाजपा के नेताओं का कहना है कि विदेश नीति संवेदनशील विषय है और सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस आने वाले समय में और गहरी हो सकती है, क्योंकि इसमें धर्म, विदेश नीति और आंतरिक राजनीति—तीनों शामिल हैं।


