राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को संविदा पदों पर कार्यरत हजारों कार्मिकों के भविष्य का मुद्दा महत्वपूर्ण रूप से उठा। स्वायत्त शासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबरमल खर्रा ने विधायक डॉ. शिखा मील बराला द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार संविदाकर्मियों के हितों को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाली सरकारी भर्तियों में संविदा कार्मिकों को प्राथमिकता देने के लिए राज्य सरकार ठोस निर्णय लेने जा रही है। इस बयान के बाद प्रदेश भर में नगर निगमों, परिषदों और प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से वर्षों से सेवा दे रहे युवाओं में उम्मीद बढ़ गई है।
नई भर्तियों में संविदाकर्मियों को प्राथमिकता देने की तैयारी
मंत्री झाबरमल खर्रा ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में निकाली जाने वाली सीधी भर्तियों में पहले से कार्यरत संविदाकर्मियों के अनुभव को प्राथमिकता मिले। उनका कहना था कि संविदा कर्मचारियों ने वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में काम किया है और उनका अनुभव सरकारी व्यवस्था के लिए बेहद मूल्यवान है। इसलिए नई भर्ती प्रक्रियाओं में बोनस अंक या नियमों में आवश्यक शिथिलता पर विचार किया जा रहा है, ताकि इन कर्मियों का समायोजन नियमित पदों पर किया जा सके। यह घोषणा उन हजारों संविदा कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आई है जो लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे थे। कई निगम और निकाय 2017 से प्लेसमेंट एजेंसियों पर निर्भर रहे हैं, जिससे स्थायी रोजगार की संभावनाएं सीमित हो गई थीं। सरकार की प्राथमिकता नीति से अब उनके स्थायी होने का रास्ता खुल सकता है।
पीएफ और ईएसआई भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव
सदन में मंत्री खर्रा ने उन समस्याओं पर भी प्रकाश डाला जो संविदाकर्मियों के शोषण का कारण बन रही थीं। उन्होंने बताया कि कई प्लेसमेंट एजेंसियां कर्मचारियों का पीएफ और ईएसआई जमा नहीं करतीं, जिससे संविदा कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार प्रभावित होता है।
सरकार ने इस स्थिति को समाप्त करने के लिए भुगतान प्रणाली में कड़ा बदलाव लागू किया है। नई व्यवस्था के तहत प्लेसमेंट एजेंसियों को हर महीने संविदाकर्मियों का पीएफ और ईएसआई अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। इसके बिना दूसरे महीने का बिल पास नहीं किया जाएगा। एजेंसियों को पहली माह की जमा राशि का चालान दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि एजेंसी चालान नहीं देती है, तो उसका भुगतान तुरंत रोक दिया जाएगा। इस निर्णय को सरकार की ओर से संविदाकर्मियों के हितों की रक्षा के लिए की गई एक “सर्जिकल स्ट्राइक” बताया जा रहा है।
सफाई कर्मचारी भर्ती अक्टूबर 2026 से शुरू होगी
सदन में मंत्री खर्रा ने बेरोजगार युवाओं के लिए एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 का भर्ती कैलेंडर पहले ही जारी कर दिया गया है, जिसके तहत अक्टूबर 2026 में प्रदेश में बड़े स्तर पर सफाई कर्मचारी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह कैलेंडर युवाओं को समयबद्ध तैयारी करने का अवसर देता है और लंबे समय से चली आ रही रिक्तियों को भरने का रास्ता भी खोलता है। यह भी बताया गया कि कई निकायों में वर्ष 2017 से नियमित पद रिक्त पड़े हैं और अस्थायी व्यवस्था के रूप में प्लेसमेंट एजेंसियों से कार्मिक लिए जा रहे हैं। अब इन रिक्तियों को नियमित भर्तियों से भरने की तैयारी की जा रही है।
भ्रष्टाचार मामलों में सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
स्वायत्त शासन विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की सख्ती पर भी मंत्री ने सदन में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नगर परिषद चौमूं में भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच के बाद दो स्थायी कार्मिकों को तुरंत उनके मूल विभाग पशुपालन में वापस भेजा गया और कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए। इसके साथ ही एक संविदाकर्मी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। मंत्री ने कहा कि यह स्पष्ट संदेश है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।
निकायों में रिक्त पदों को भरने की दिशा में बड़ा कदम
मंत्री खर्रा ने स्वीकार किया कि प्रदेश के अधिकांश नगर निकाय लंबे समय से नियमित स्टाफ की कमी का सामना कर रहे हैं। कई नगर परिषदों और नगर निगमों में पिछले आठ से नौ वर्षों से प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से ही कार्य संचालित किए जा रहे हैं। सरकार अब इन रिक्त पदों को नियमित नियुक्तियों से भरने पर जोर दे रही है।


