राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जूनियर इंजीनियर (JE) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 में हुए पेपर लीक मामले का स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने गुरुवार को बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि दिसंबर 2020 में आयोजित परीक्षा ही नहीं, बल्कि 2021 में दोबारा हुई परीक्षा का पेपर भी संगठित नकल गिरोह ने लीक किया था। इस मामले में SOG ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक आरोपी वर्तमान में PWD में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत है, जबकि दूसरा आरोपी पूरे पेपर लीक नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
दिसंबर 2020 की परीक्षा रद्द, लेकिन गिरोह सक्रिय रहा
ADG (SOG) विशाल बंसल ने बताया कि कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 दिसंबर 2020 में आयोजित की गई थी। परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो जाने के कारण इसे रद्द करना पड़ा। इस संबंध में जयपुर के सांगानेर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
पेपर लीक की गंभीरता को देखते हुए SOG को जांच सौंपी गई। जांच के दौरान जब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 2021 में दोबारा आयोजित परीक्षा में भी वही संगठित गिरोह सक्रिय था और उसने फिर से पेपर लीक कर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया।
जनवरी 2026 में दर्ज हुआ नया केस
SOG की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दूसरी परीक्षा में हुई गड़बड़ी को पहले दबा दिया गया था, लेकिन डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जनवरी 2026 में इस मामले में नया केस दर्ज किया गया। इसके बाद SOG ने कार्रवाई तेज करते हुए मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की।
मास्टरमाइंड जगदीश विश्नोई गिरफ्तार
SOG ने इस मामले में जगदीश विश्नोई (निवासी सांचौर, जिला जालोर) को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि जगदीश पूरे पेपर लीक नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर सितंबर 2021 में दोबारा आयोजित JE परीक्षा का पेपर लीक किया।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि परीक्षा से कुछ समय पहले ही पेपर अभ्यर्थियों को उपलब्ध करवा दिया गया था, जिससे कई उम्मीदवारों ने अनुचित साधनों से परीक्षा पास की।
PWD में तैनात सहायक अभियंता भी आरोपी
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में एक सरकारी अधिकारी भी शामिल है। SOG ने गणपतलाल विश्नोई (34), निवासी सांचौर, जालोर को गिरफ्तार किया है।
गणपतलाल ने अनुचित और अवैध साधनों से JE भर्ती परीक्षा पास की थी। वह परीक्षा में मेरिट क्रमांक-12 पर चयनित हुआ था। वर्तमान में वह सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD), बाड़मेर में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत है।
नौकरी के बाद हुआ प्रमोशन, अब कार्रवाई की तैयारी
जांच में सामने आया कि मेरिट में उच्च स्थान प्राप्त करने के कारण गणपतलाल को पदोन्नति भी मिल चुकी थी। अब SOG की रिपोर्ट के आधार पर उसके खिलाफ सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई, पद से हटाने और नियुक्ति रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मामले में भर्ती से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करवा रही है।
भर्ती परीक्षाओं पर फिर उठे सवाल
JE भर्ती परीक्षा-2020 का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि राजस्थान में संगठित नकल माफिया कितनी गहराई तक सिस्टम में घुस चुका है। पेपर लीक सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी नौकरी और पदोन्नति तक पहुंच गया। SOG अब यह भी जांच कर रही है कि कितने और अभ्यर्थियों ने पेपर लीक के जरिए परीक्षा पास की, और क्या इस नेटवर्क में अन्य विभागों के कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल थे।


