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जालोर-झालावाड़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे कागजों में सिमटा, दो साल में नहीं बढ़ी रफ्तार

जालोर-झालावाड़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे कागजों में सिमटा, दो साल में नहीं बढ़ी रफ्तार

जालोर। फरवरी 2024 में प्रदेश की भाजपा सरकार के पहले राज्य बजट में घोषित जालोर-झालावाड़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे अब तक धरातल पर उतरता नजर नहीं आ रहा है। बजट घोषणा के लगभग दो साल बाद भी यह महत्वाकांक्षी परियोजना कागजी प्रक्रियाओं में ही उलझी हुई है।

प्रारंभिक स्तर पर वर्ष 2024 में सर्वे कार्य शुरू किया गया था, लेकिन उसके बाद परियोजना की रफ्तार लगभग ठहर सी गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार, फिलहाल इस प्रोजेक्ट सहित प्रदेश के अन्य ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे भी समीक्षा के दौर से गुजर रहे हैं।

मुख्यालय बदला, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा

शुरुआत में यह प्रोजेक्ट लोक निर्माण विभाग (एनएच) के अंतर्गत था और इसका मुख्यालय उदयपुर में स्थापित किया गया था। हालांकि, पिछले वर्ष किसी तरह की ठोस प्रगति नहीं होने पर—

  • प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी
    राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (RSRDC) बांसवाड़ा को सौंपी गई

  • इसके बाद अब प्रोजेक्ट का मुख्यालय जयपुर स्थानांतरित कर दिया गया

लगातार मुख्यालय बदलने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम आगे नहीं बढ़ सका है।

10 हजार करोड़ से अधिक की लागत, इसलिए हो रही समीक्षा

विभागीय जानकारी के अनुसार, जालोर-झालावाड़ एक्सप्रेस-वे सहित प्रदेश में घोषित सभी 8 ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे फिलहाल रिव्यू के लिए रोके गए हैं। इन सभी परियोजनाओं पर—

  • कुल प्रस्तावित खर्च: 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक

सूत्रों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि को देखते हुए सरकार इन परियोजनाओं की—

  • उपयोगिता

  • लागत दर (Cost Rate)

  • संभावित आय (Revenue Model)

का विस्तृत आकलन कर रही है।

जालोर-झालावाड़ एक्सप्रेस-वे की प्रमुख विशेषताएं

  • प्रस्तावित लंबाई: 402 किलोमीटर

  • अनुमानित लागत: 10,300 करोड़ रुपये

  • कनेक्टिविटी:

    • झालावाड़ में मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे से जुड़ाव

    • जालोर क्षेत्र में भारत माला एक्सप्रेस-वे से कनेक्शन

यह एक्सप्रेस-वे जालोर शहर से करीब 60 किलोमीटर दूर भारतमाला एक्सप्रेस-वे से होकर गुजरने वाला प्रस्तावित है।

जालोर के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

यदि जालोर-झालावाड़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे धरातल पर उतरता है, तो—

  • जालोर को एक महत्वपूर्ण कॉमर्शियल कॉरिडोर मिलेगा

  • एग्रो प्रोडक्ट्स की बड़ी मंडियों तक तेज और सुगम पहुंच

  • जालोर के ग्रेनाइट उद्योग को बड़ा फायदा

  • परिवहन लागत में कमी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी

मानी जा रही है।

प्रदेश में इन 8 एक्सप्रेस-वे की हुई थी घोषणा

राज्य बजट में जिन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे की घोषणा की गई थी, वे इस प्रकार हैं—

  1. जालोर-झालावाड़ (402 किमी)

  2. कोटपूतली-किशनगढ़ (181 किमी)

  3. जयपुर-भीलवाड़ा (193 किमी)

  4. बीकानेर-कोटपूतली (295 किमी)

  5. ब्यावर-भरतपुर (342 किमी)

  6. अजमेर-बांसवाड़ा (358 किमी)

  7. जयपुर-फलोदी (345 किमी)

  8. श्रीगंगानगर-कोटपूतली (290 किमी)

अधिकारियों ने क्या कहा?

उदयसिंह, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी (एनएच) “ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे अब आरएसआरडीसी को हैंडओवर हो चुके हैं। पूरे प्रोजेक्ट की स्थिति और आकलन उन्हीं के माध्यम से किया जा रहा है।” अमित गर्ग, परियोजना निदेशक, आरएसआरडीसी, बांसवाड़ा “जालोर-झालावाड़ एक्सप्रेस-वे का कार्य वर्तमान में जयपुर मुख्यालय की निगरानी में है। फिलहाल स्थानीय स्तर पर इस प्रोजेक्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।”

इंतजार में जालोर, निगाहें सरकार के फैसले पर

कुल मिलाकर, जालोर-झालावाड़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे फिलहाल समीक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझा हुआ है। जालोर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कब और किस रूप में आगे बढ़ाती है।

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