मनीषा शर्मा। जयपुर नगर निगम हेरिटेज के कार्यकाल में अब कुछ ही महीने बचे हैं, लेकिन समितियों के गठन में हो रही देरी ने नगर निगम में राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है। इसको लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने नगर निगम हेरिटेज के मेयर और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द समितियों के गठन की मांग की है, ताकि नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सके।
बीजेपी पार्षद विमल अग्रवाल ने आरोप लगाया कि नगर निगम हेरिटेज में समितियों का गठन न होने के कारण आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार की वजह से शहर की जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि समिति के गठन से ही शहर के विकास कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी और जनता की समस्याओं का समाधान हो सकेगा।
कांग्रेस पार्षद दशरथ सिंह शेखावत ने कहा कि नगर निगम जनता के लिए “नरक निगम” बन चुका है। सफाई से लेकर रोजमर्रा के काम तक, हर जगह जनता को निगम में परेशानी हो रही है। उन्होंने मेयर और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि समितियों के गठन के बिना अधिकारी मनमानी कर रहे हैं, और जनता की गाढ़ी कमाई लूटी जा रही है।
स्वायत्त शासन विभाग (DLB) के अनुसार, हेरिटेज में 100 वार्ड होने पर अधिकतम 23 समितियों का गठन किया जा सकता है। इन समितियों में पार्षदों के साथ-साथ आम जनता को भी सदस्य बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समितियों का गठन न होने से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, और इसे जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए।
नगर निगम हेरिटेज की साधारण सभा की बैठकें भी दुर्लभ हो गई हैं, जिससे पार्षदों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। दोनों दलों के पार्षदों ने मेयर मुनेश गुर्जर के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ विरोध तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और कब समितियों का गठन होता है।


