latest-newsराजस्थानसीकर

जयपुर है बड़ा वृंदावन: कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय

जयपुर है बड़ा वृंदावन: कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय

मनीषा शर्मा। जयपुर को अक्सर “छोटी काशी” कहा जाता है, लेकिन जन्माष्टमी के पावन अवसर पर वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने इसे “बड़ा वृंदावन” बताकर नई धार्मिक चेतना जगा दी। सीकर जिले के रेवासा धाम में कथा सुना रहे उपाध्याय, शनिवार को जन्माष्टमी पर जयपुर स्थित आराध्य श्री गोविंद देवजी मंदिर पहुंचे। इस विशेष अवसर पर उनके साथ श्री मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज और वृंदावन के कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी भी मौजूद रहे। तीनों संतों ने ठाकुर जी का अभिषेक दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना।

दर्शन के बाद रेवासा धाम लौटकर इंद्रेश उपाध्याय ने कथा के दौरान गोविंद देवजी, गोपीनाथ जी और मदन मोहन जी के प्राकट्य की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार यह तीनों स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य छवि को साकार करते हैं और क्यों जयपुर वास्तव में एक “बड़ा वृंदावन” है।

गोविंद देवजी का प्राकट्य और माताओं का घूंघट

कथा सुनाते हुए इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि जब गोविंद देवजी का स्वरूप प्रकट हुआ, तो उस समय उपस्थित माताओं ने घूंघट कर लिया। इस दृश्य को देखकर वज्रनाभ, जो भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र थे, ने अपनी दादी से प्रश्न किया कि माताओं ने ऐसा क्यों किया। तब उनकी दादी ने उत्तर दिया – “इनका मुखमंडल, नाक और होंठ बिल्कुल श्रीकृष्ण जैसे हैं।” यह प्रसंग सुनाते हुए उपाध्याय ने कहा कि जयपुर में विराजमान गोविंद देवजी के स्वरूप में स्वयं श्रीकृष्ण के दर्शन होते हैं। यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु यहां आकर ठाकुर जी की एक झलक पाने के लिए आतुर रहते हैं।

जयपुर में विराजमान हैं ब्रज के ठाकुर

इंद्रेश उपाध्याय ने आगे बताया कि जयपुर में केवल गोविंद देवजी ही नहीं, बल्कि गोपीनाथ जी और पहले मदन मोहन जी भी विराजमान थे। बाद में मदन मोहन जी करौली चले गए, लेकिन उनकी आराधना का केंद्र आज भी राजस्थान ही है। उन्होंने कहा कि जयपुर में गौड़ीय वैष्णव परंपरा के अन्य देवालय भी स्थापित हैं, जैसे श्री दामोदर जी और श्री विनोदी लाल जी। इस नाते से आज जयपुर में श्री राधा विनोदी लाल, श्री राधा दामोदर लाल, श्री राधा गोपीनाथ, श्री राधा मदन मोहन लाल और श्री राधा गोविंद देव के स्वरूप प्रतिष्ठित हैं। उपाध्याय के शब्दों में – “यह सभी हमारे ब्रज के ही ठाकुर हैं, जो जयपुर को आध्यात्मिक रूप से बड़ा वृंदावन बनाते हैं।”

जयपुर को बड़ा वृंदावन क्यों कहा?

धार्मिक दृष्टि से जयपुर को अक्सर काशी और अयोध्या के समकक्ष माना जाता है, लेकिन इंद्रेश उपाध्याय ने इसे “बड़ा वृंदावन” कहकर विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा – “जब हम जगन्नाथ पुरी या द्वारका पुरी जाते हैं तो मन में यह भाव आता है कि इतने दूर से लोग ठाकुर जी के दर्शन करने आते हैं, कहीं इन्हें कठिनाई तो नहीं होती होगी। लेकिन जयपुर में गोविंद देवजी को देखकर संतोष मिलता है कि यहां के लोग अपने ठाकुर जी से अत्यंत प्रेम करते हैं।” उनका कहना था कि गोविंद देवजी का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह भक्तों और भगवान के बीच अटूट संबंध का जीवंत प्रतीक है।

धार्मिक मान्यता – तीन स्वरूपों के दर्शन से मोक्ष

धर्मग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने अपनी दादी से भगवान के स्वरूप के बारे में जानना चाहा था। तब जिस काले पत्थर पर भगवान श्रीकृष्ण स्नान करते थे, उसी से तीन दिव्य मूर्तियों का निर्माण हुआ।

  • पहली मूर्ति में भगवान के मुखारविंद की छवि उभरकर आई, जो आज जयपुर के गोविंद देवजी मंदिर में विराजमान है।

  • दूसरी मूर्ति में भगवान का वक्षस्थल प्रकट हुआ, जो जयपुर में ही गोपीनाथ जी मंदिर में प्रतिष्ठित है।

  • तीसरी मूर्ति में भगवान के चरणारविंद की झलक आई, जो आज करौली के मदन मोहन जी मंदिर में विराजमान है।

यह विश्वास है कि जब कोई भक्त इन तीनों स्वरूपों के दर्शन करता है तो उसे भगवान श्रीकृष्ण के संपूर्ण स्वरूप के दर्शन का पुण्य लाभ मिलता है।

जन्माष्टमी पर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं जयपुर और करौली

हर वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर जयपुर और करौली दोनों स्थानों पर लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भक्तों का मानना है कि एक ही दिन में गोविंद देवजी, गोपीनाथ जी और मदन मोहन जी के दर्शन करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इंद्रेश उपाध्याय ने कहा – “जन्माष्टमी के दिन मुझे स्वयं गोविंद देवजी के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह अनुभव अविस्मरणीय है। ठाकुर जी का अभिषेक देखकर आत्मा को अद्भुत शांति और संतोष मिलता है।”

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading