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जयपुर डिस्कॉम देगा 33 केवी और 11 केवी सब स्टेशन प्राइवेट फर्मों को

जयपुर डिस्कॉम देगा 33 केवी और 11 केवी सब स्टेशन प्राइवेट फर्मों को

मनीषा शर्मा। जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जयपुर डिस्कॉम) ने राजस्थान के 33 केवी और 11 केवी सब स्टेशनों के संचालन और रखरखाव के लिए प्राइवेट फर्मों को शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके लिए डिस्कॉम ने 14 अलग-अलग क्षेत्रों में 1027 फीडर्स के लिए टेंडर जारी किए हैं।

इस परियोजना में हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत बिजली आपूर्ति, मीटरिंग, बिलिंग और कलेक्शन (MBC) जैसी सेवाएं शामिल हैं। यह कदम किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने और सौर पावर प्लांट के माध्यम से अधिकतम ऊर्जा उपयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।

टेंडर की मुख्य विशेषताएं

  1. कार्य का दायरा:
    • 33 केवी और 11 केवी सब स्टेशनों का संचालन और रखरखाव।
    • सौर पावर प्लांट की स्थापना।
    • मीटरिंग, बिलिंग और कलेक्शन (MBC)।
    • सामग्री आपूर्ति, परीक्षण और कमिशनिंग।
  2. टेंडर प्रक्रिया:
    • टेंडर 22 नवंबर 2024 से उपलब्ध होंगे।
    • निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 24 दिसंबर 2024 है।
    • विस्तृत जानकारी जयपुर डिस्कॉम की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
  3. लागत और साझेदारी:
    • यह परियोजना 7800 करोड़ रुपये की है।
    • केंद्र और राज्य सरकार की 60:40 की साझेदारी में पूरी की जाएगी।

निजीकरण पर श्रमिक संघ का विरोध

जयपुर डिस्कॉम के इस निर्णय का श्रमिक संघ (BMS) ने विरोध किया है। महासंघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सांखला ने कहा कि निजीकरण से भविष्य में विभाग को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

मुख्य चिंताएं:

  • पिछले अनुभव: हाल ही में जेबीएस कंपनी के ठेका बीच में छोड़ने के कारण सरकारी कर्मचारियों को काम संभालना पड़ा।
  • नौकरियों पर असर: निजीकरण से सरकारी नौकरियों की संख्या पर असर पड़ेगा।
  • भविष्य की चुनौतियां: प्राइवेट कंपनियों के अनुबंध के बीच में काम छोड़ने से विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

ऊर्जा मंत्री का बयान

कोटा में भारतीय मजदूर संघ के कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि 33 केवी सब स्टेशनों पर सौर पावर प्लांट लगाने से किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

योजना के लाभ:

  • किसानों के लिए बिजली: दिन के समय में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
  • ग्रीन एनर्जी: सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।
  • सरकार की भागीदारी: केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस योजना को पूरा करेंगी।

प्रोजेक्ट के संभावित फायदे

  1. बेहतर संचालन:
    प्राइवेट फर्मों को शामिल करने से सब स्टेशनों का संचालन और रखरखाव अधिक कुशल हो सकता है।
  2. सौर ऊर्जा का उपयोग:
    सौर पावर प्लांट की स्थापना से हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा और बिजली उत्पादन लागत घटेगी।
  3. किसानों को राहत:
    सौर पावर प्लांट के माध्यम से दिन में बिजली आपूर्ति से किसानों को लाभ होगा।
  4. डिजिटलीकरण:
    मीटरिंग, बिलिंग और कलेक्शन (MBC) के डिजिटलीकरण से उपभोक्ताओं को पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी।

श्रमिक संघ की चिंताओं का समाधान

श्रमिक संघ द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार को स्पष्ट नीतियां अपनानी होंगी:

  • अनुबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं।
  • कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए नई योजनाएं बनाईं जाएं।
  • संचालन के लिए उचित प्रशिक्षण और आपातकालीन कार्यबल तैयार रखा जाए।

 

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