शोभना शर्मा। राजस्थान कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी हो चुकी है, लेकिन अभी भी पांच जिलों में अध्यक्षों के नाम घोषित होना बाकी है। सबसे अधिक चर्चा जिस जिले को लेकर है, वह है जयपुर शहर कांग्रेस। मौजूदा जिलाध्यक्ष आर आर तिवाड़ी को भरोसा है कि पार्टी उनको रिपीट करेगी और एक बार फिर नेतृत्व का मौका देगी। नगर निगम चुनाव निकट होने के कारण शहर कांग्रेस की कमान किसके हाथ में रहेगी, यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
आर आर तिवाड़ी की नगर निगम चुनाव तक नेतृत्व बनाए रखने की इच्छा
तिवाड़ी का कहना है कि उन्होंने ढाई साल तक लगातार संगठन के लिए संघर्ष किया है और नगर निगम जयपुर में कांग्रेस का बोर्ड व महापौर बनाने का सपना अभी अधूरा है। उन्होंने बताया कि वे नगर निगम चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर कर चुके हैं और 10 दिसंबर को अगली सुनवाई प्रस्तावित है। तिवाड़ी के अनुसार अभी माहौल भाजपा के खिलाफ है, राज्य सरकार काम नहीं कर रही है और जनता में नाराजगी दिखाई दे रही है। ऐसे माहौल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ऊर्जा और जीत का विश्वास है और वह चाहते हैं कि चुनाव के समय संगठन की कमान उनके हाथ में ही रहे।
नए जिलाध्यक्ष के नाम पर कड़ी प्रतिस्पर्धा
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस में जिला अध्यक्ष बदलने की संभावनाओं पर चर्चा तेज है। पुष्पेंद्र भारद्वाज, सुनील शर्मा और अमीन कागज़ी सहित कई नामों की चर्चा चल रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तिवाड़ी ने कहा कि राहुल गांधी के दिशा-निर्देश पर वरिष्ठ नेताओं को ऑब्जर्वर बनाकर कार्यकर्ताओं से उनकी राय पूछी गई है। आंध्र प्रदेश के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राजू ने जयपुर में विभिन्न ब्लॉक अध्यक्षों, मंडल अध्यक्षों, बीएलए और बुद्धिजीवियों से बातचीत की। तिवाड़ी का दावा है कि कार्यकर्ताओं की पसंद उनके पक्ष में है औरत उन्हें भरोसा है कि परिणाम भी ऐसा ही आएगा।
साधारण कार्यकर्ता से जयपुर शहर अध्यक्ष बनने तक का सफर
तिवाड़ी ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि वह पहली बार जुलाई 2023 में मोटरसाइकिल पर घूमकर कार्यकर्ताओं से जुड़ते हुए शहर अध्यक्ष बने थे और आज भी मोटरसाइकिल चलाकर ही संगठन का काम करते हैं। उनका कहना है कि वे जमीन से जुड़े कार्यकर्ता हैं और वर्तमान में भी कार्यकर्ताओं का पूरा समर्थन उनके साथ है। उन्होंने कहा कि संगठन में पद की इच्छा सभी को होती है और अन्य लोग भी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं का विश्वास ही असली प्रमाण है।
हवामहल सीट पर भी जुड़ा हुआ विवाद
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच यह भी चर्चा है कि जिलाध्यक्ष पद को लेकर अधिक प्रतिस्पर्धा हवामहल सीट के कारण है। दावा यह है कि कुछ नेता जिलाध्यक्ष की कुर्सी के ज़रिए हवामहल विधानसभा टिकट को सुरक्षित बनाना चाहते हैं। इस पर तिवाड़ी ने कहा कि कई कार्यकर्ताओं ने उनसे भी ऐसी बातें कही हैं, लेकिन वह केवल संगठन के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के 48 वर्ष कांग्रेस को दिए हैं और 1978 में इंदिरा गांधी के समर्थन में जयपुर की सेंट्रल जेल में 10 दिन बिताए थे। तिवाड़ी के अनुसार वह कभी सोच भी नहीं सकते थे कि वे राजधानी जैसे शहर के जिलाध्यक्ष बनेंगे, जबकि उनका कोई बड़ा राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था। उनके पिता साधारण सरकारी कर्मचारी थे और उन्होंने मेहनत और भाग्य के भरोसे काम किया। उनका कहना है कि 2023 में उन्हें हवामहल सीट से टिकट मिलना उनके लिए आश्चर्य से भी बढ़कर था। पहली घोषणा में जीत दिखाई दे रही थी, लेकिन बाद में उन्हें हरवा दिया गया। वह दावा करते हैं कि किसके कारण हराया गया यह सबको पता है। इसके बावजूद उन्होंने निराशा को मन में नहीं आने दिया। लोकसभा चुनाव में उन्होंने प्रताप सिंह खाचरियावास को हवामहल से 3000 वोट से बढ़त दिलवाई, जबकि वे विधानसभा चुनाव में सिर्फ 500 वोट से हारे थे।
“बकरा अमर भी हो सकता है” — बयान हुआ चर्चा में
सोशल मीडिया और कार्यकर्ताओं के बीच चल रही चर्चा — “बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी?” — पर तिवाड़ी ने जवाब देते हुए कहा कि बकरा अमर भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह अभी भी जीवंत हैं, संघर्षरत हैं और कांग्रेस के लिए मरते दम तक काम करेंगे। उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं का प्यार और विश्वास ही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है और उन्हें पूरा भरोसा है कि जिलाध्यक्ष वही बने रहेंगे।


