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जयपुर एयरपोर्ट पर 17–23 मार्च तक रनवे मेंटेनेंस, दोपहर में उड़ानों का री-शेड्यूल

जयपुर एयरपोर्ट पर 17–23 मार्च तक रनवे मेंटेनेंस, दोपहर में उड़ानों का री-शेड्यूल

जयपुर इंटरनेशलन एयरपोर्ट पर 17 मार्च से 23 मार्च तक रनवे और एयरसाइड मेंटेनेंस कार्य किए जाएंगे। एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार मानसून से पहले सुरक्षा मानकों को और बेहतर बनाने तथा संचालन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से यह तकनीकी कार्य निर्धारित किए गए हैं। इस अवधि के दौरान सात दिनों तक प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक चार घंटे का नोटम लागू रहेगा। नोटम यानी नोटिस टू एयरमेन एक आधिकारिक सूचना होती है, जिसके तहत तय समय में हवाई संचालन से जुड़े विशेष निर्देश जारी किए जाते हैं। ऐसे में इस समयावधि के दौरान उड़ानों के संचालन पर असर पड़ सकता है और यात्रियों को अपने यात्रा कार्यक्रम में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।

उड़ानों का री-शेड्यूल, यात्रियों की सुविधा पर जोर

एयरपोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मेंटेनेंस अवधि को ध्यान में रखते हुए अधिकांश उड़ानों को पहले ही री-शेड्यूल कर दिया गया है। एयरलाइंस के साथ लंबे समय से समन्वय किया जा रहा था, ताकि संचालन बाधित न हो और यात्रियों को न्यूनतम असुविधा का सामना करना पड़े। दोपहर 1 से 5 बजे के बीच सीमित गतिविधि रहेगी, इसलिए इस समय स्लॉट की फ्लाइट्स को या तो सुबह या शाम के समय में स्थानांतरित किया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी संबंधित एयरलाइन से उड़ान समय की पुष्टि कर लें और एयरपोर्ट पर समय से पहले पहुंचें।

रनवे की संरचनात्मक मजबूती पर होगा काम

मेंटेनेंस के तहत रनवे की सतह और उसकी संरचनात्मक मजबूती की तकनीकी जांच की जाएगी। विशेषज्ञ टीम रनवे पर नियमित घिसावट, दरारों या अन्य संभावित कमजोरियों का आकलन कर आवश्यक मरम्मत कार्य करेगी। मानसून के मौसम में जलभराव और सतह की क्षति जैसी समस्याओं से बचाव के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रनवे की गुणवत्ता और मजबूती किसी भी एयरपोर्ट के सुरक्षित संचालन के लिए बेहद अहम होती है। नियमित निरीक्षण और समयबद्ध मरम्मत से विमान के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित किया जाता है।

एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम का अपग्रेड

मेंटेनेंस कार्यक्रम के दौरान एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग सिस्टम को भी अपग्रेड किया जाएगा। मौजूदा हैलोजन लाइट्स को हटाकर एलईडी आधारित आधुनिक लाइटिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इससे ऊर्जा दक्षता में सुधार होगा और कम बिजली खपत के साथ बेहतर रोशनी उपलब्ध होगी। एलईडी लाइटिंग सिस्टम से रनवे और टैक्सीवे पर विजिबिलिटी बेहतर होगी, जिससे रात या कम दृश्यता की स्थिति में भी विमान संचालन अधिक सुरक्षित रहेगा। यह अपग्रेड अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रदेश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट

जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट राज्य का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान यहां 60 लाख से अधिक यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई। प्रतिदिन औसतन 120 एयर ट्रैफिक मूवमेंट का संचालन होता है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानें शामिल हैं।

करीब 776 एकड़ क्षेत्र में फैला यह एयरपोर्ट आधुनिक तकनीक और डिजिटल फर्स्ट अप्रोच के साथ सेवाएं प्रदान कर रहा है। यात्री सुविधाओं, सुरक्षा प्रबंधन और संचालन दक्षता के मामले में इसे लगातार उन्नत किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता और पर्यावरणीय उपलब्धि

जयपुर एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिल चुकी है। इसे Airports Council International से लेवल-3 मान्यता प्राप्त है, जो एयरपोर्ट के पर्यावरण प्रबंधन और कार्बन उत्सर्जन नियंत्रण के प्रयासों को दर्शाती है। इसके अलावा Confederation of Indian Industry के सीआईआई-आईटीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ अवॉर्ड भी प्रदान किया जा चुका है। यह उपलब्धि एयरपोर्ट के पर्यावरण अनुकूल संचालन और कचरा प्रबंधन प्रणाली की सफलता को रेखांकित करती है।

यात्रियों के लिए सलाह

मेंटेनेंस अवधि के दौरान यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी उड़ान की स्थिति की नियमित जांच करें। एयरलाइंस द्वारा भेजे गए संदेशों और आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध अपडेट को ध्यान में रखें। रनवे और एयरसाइड मेंटेनेंस जैसे कार्य दीर्घकालिक सुरक्षा और दक्षता के लिए आवश्यक होते हैं। अल्पकालिक असुविधा के बावजूद ये सुधार भविष्य में अधिक सुरक्षित और सुचारू हवाई संचालन सुनिश्चित करने में सहायक होंगे। जयपुर एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा कर सामान्य संचालन पूरी क्षमता से बहाल कर दिया जाएगा।

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