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जोधपुर में मकान बनाना हुआ मुश्किल, एयरफोर्स NOC के बिना नहीं मिलेगी मंजूरी

जोधपुर में मकान बनाना हुआ मुश्किल, एयरफोर्स NOC के बिना नहीं मिलेगी मंजूरी

जोधपुर में घर या बहुमंजिला इमारत बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए अब हालात पहले जैसे आसान नहीं रहे हैं। नए नियमों के तहत भवन निर्माण की प्रक्रिया इतनी जटिल हो गई है कि लोगों को एक साल पहले से ही इसकी तैयारी करनी पड़ रही है। खास बात यह है कि अब सिर्फ स्थानीय स्तर पर अनुमति लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुजरात के गांधीनगर स्थित वेस्टर्न एयर कमाण्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था ने आम नागरिकों के साथ-साथ बिल्डर्स और डेवलपर्स की परेशानियां भी बढ़ा दी हैं।

दरअसल, जोधपुर में एयरफोर्स स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा और हवाई संचालन को ध्यान में रखते हुए कलर कोडेड जोनिंग मैप यानी CCZM लागू किया गया है। यह नियम पहले केवल जेडीए क्षेत्र में लागू था, लेकिन करीब एक साल पहले इसे नगर निगम क्षेत्र में भी सख्ती से लागू कर दिया गया। इसके बाद से भवन निर्माण की अनुमति की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब किसी भी प्रकार की बहुमंजिला या व्यावसायिक इमारत के निर्माण के लिए वेस्टर्न एयर कमाण्ड से NOC लाना जरूरी हो गया है।

इस नियम के कारण नगर निगम में पिछले एक साल से करीब 400 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। आवेदकों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बावजूद उनकी फाइलें गांधीनगर भेजी जाती हैं, जहां से NOC आने में सात से आठ महीने का समय लग रहा है। इस देरी के चलते न केवल निर्माण कार्य ठप पड़ा है, बल्कि लागत में भी भारी वृद्धि हो रही है। निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने और समय की देरी से आमजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

CCZM के तहत जोधपुर शहर को पांच अलग-अलग जोनों में बांटा गया है, जिनमें रेड, स्काई ब्ल्यू, पिंक, येलो और ग्रीन जोन शामिल हैं। इन सभी जोनों के लिए अलग-अलग नियम निर्धारित किए गए हैं। रेड जोन में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक है और यहां NOC लेना अनिवार्य है। स्काई ब्ल्यू जोन में केवल सीमित ऊंचाई तक निर्माण की अनुमति दी गई है, जबकि पिंक जोन में आठ मंजिल तक भवन निर्माण की छूट है, लेकिन उससे अधिक ऊंचाई के लिए NOC जरूरी है। येलो और ग्रीन जोन में कुछ राहत दी गई है, फिर भी निर्धारित ऊंचाई से अधिक निर्माण के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।

इन जोनों में शहर के कई प्रमुख और तेजी से विकसित हो रहे इलाके शामिल हैं, जैसे झालामंड, कुड़ी भगतासनी, शास्त्री नगर, रतनाडा, एम्स क्षेत्र, सिटी रेलवे स्टेशन और मेहरानगढ़ के आसपास का क्षेत्र। इन इलाकों में पहले निर्माण कार्य आसानी से हो जाता था, लेकिन अब नए नियमों के कारण लोगों को कई स्तरों पर अनुमति लेनी पड़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा के लिहाज से यह नियम जरूरी हो सकते हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन में सुधार की आवश्यकता है। सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य टाउन प्लानर पीआर बेनीवाल के अनुसार, इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्वायत्त शासन विभाग के बीच समन्वय जरूरी है। उनका सुझाव है कि जोधपुर के मास्टर प्लान 2031 के तहत जोनवार ऊंचाई पहले से निर्धारित कर दी जाए, ताकि हर बार NOC लेने की आवश्यकता न पड़े।

वर्तमान स्थिति यह है कि लोग मकान बनाने के लिए आवेदन करने से पहले ही परेशान हो रहे हैं। कई लोग तो निर्माण की योजना को टालने या रद्द करने पर मजबूर हो रहे हैं। वहीं, बिल्डर्स का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण प्रोजेक्ट की टाइमलाइन प्रभावित हो रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।

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