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राजस्थान में पेंशनधारकों की जांच शुरू: सालाना ₹24,000 से अधिक बिजली बिल वालों की पेंशन पर रोक

राजस्थान में पेंशनधारकों की जांच शुरू: सालाना ₹24,000 से अधिक बिजली बिल वालों की पेंशन पर रोक

शोभना शर्मा।  राजस्थान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने राज्य के लाखों पेंशनधारकों की पात्रता की फिर से जांच शुरू कर दी है। इस बार जांच का आधार बना है बिजली का बिल। विभाग ने उन पेंशनधारकों की पेंशन अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है, जिनका सालाना बिजली बिल ₹24,000 से अधिक पाया गया है। विभाग का कहना है कि पेंशन का उद्देश्य जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता करना है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से सक्षम है, तो उसके लिए सरकारी पेंशन जारी रखना नीति के अनुरूप नहीं है।

तीन लाख से अधिक पेंशनर्स पर गिरी गाज

सरकार को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई पेंशनधारक आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। इन शिकायतों की पुष्टि के लिए सामाजिक न्याय विभाग ने प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों से आंकड़े जुटाए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीन लाख से अधिक पेंशनधारकों ने सालाना ₹24,000 से लेकर ₹48,000 तक के बिजली बिल का भुगतान किया है। ऐसे सभी मामलों में जांच का आदेश जारी किया गया है। यह जांच यह निर्धारित करेगी कि पेंशनधारक वास्तव में आर्थिक रूप से पात्र हैं या नहीं।

सिरोही जिले में 1.43 लाख पेंशनर्स का सत्यापन शुरू

राज्यव्यापी अभियान के तहत सिरोही जिले में सत्यापन की प्रक्रिया 1 नवंबर से शुरू कर दी गई है। जिले में कुल 1,43,032 पेंशनधारक हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र के 1,26,605 और शहरी क्षेत्र के 16,427 पेंशनर्स शामिल हैं। प्रशासन ने सभी ब्लॉकों में सत्यापन टीमों का गठन कर दिया है। ये टीमें प्रत्येक पेंशनधारक के दस्तावेजों की जांच करेंगी, जिसमें बिजली बिल, आय प्रमाण पत्र, और अन्य पहचान दस्तावेज शामिल होंगे।

सत्यापन के दौरान दो संभावित परिणाम

जांच के बाद विभाग ने स्पष्ट किया है कि पेंशनधारकों के लिए दो स्थितियाँ बनेंगी —

  1. आय अधिक पाए जाने पर पेंशन स्थायी रूप से निरस्त की जाएगी।
    जिन पेंशनधारकों का बिजली बिल और आय मानक से अधिक पाई जाएगी, उनकी पेंशन हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी।

  2. सही पाए जाने वालों की पेंशन दोबारा शुरू की जाएगी।
    जिनके दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी नहीं मिलेगी, उनकी पेंशन पुनः चालू कर दी जाएगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य उन पेंशनधारकों तक वास्तविक लाभ पहुँचाना है जो सचमुच जरूरतमंद हैं।

पहले भी सरकार ने की थी कठोर कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब राज्य सरकार ने योजनाओं में पात्रता को लेकर सख्ती दिखाई हो। इससे पहले भी पात्र नहीं होने के बावजूद राशन लेने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई थी। ऐसे लोगों के राशन कार्ड रद्द किए गए और कई मामलों में जुर्माना भी लगाया गया था। इसी नीति के तहत अब पेंशन योजनाओं की पात्रता की समीक्षा की जा रही है ताकि सरकारी सहायता वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे।

कौन-सी योजनाओं में दी जाती है पेंशन

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के तहत राजस्थान में तीन प्रमुख योजनाओं के माध्यम से पात्र लोगों को मासिक पेंशन दी जाती है —

  1. मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना – बुजुर्ग नागरिकों के लिए।

  2. मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना – विधवा, परित्यक्ता या तलाकशुदा महिलाओं के लिए।

  3. मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना – दिव्यांग व्यक्तियों के लिए।

इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक सहारा देना है, लेकिन हाल के वर्षों में गलत पात्रता के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है।

सरकार का तर्क: गलत लाभार्थियों पर लगाम जरूरी

विभागीय सूत्रों के अनुसार, बिजली बिल का आधार इसलिए चुना गया क्योंकि यह किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का सबसे वास्तविक संकेतक माना जाता है। जिन घरों में नियमित रूप से ₹2,000 या उससे अधिक का मासिक बिजली बिल आता है, वे सामान्यतः आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी में नहीं आते। राज्य सरकार का मानना है कि अगर ऐसे परिवार पेंशन योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, तो यह वास्तविक गरीबों के अधिकारों का हनन है। इसलिए यह सत्यापन प्रक्रिया राज्यव्यापी स्तर पर लागू की जा रही है।

विभागीय निर्देश और आगे की प्रक्रिया

विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सत्यापन रिपोर्ट 30 नवंबर तक प्रस्तुत करें। रिपोर्ट के आधार पर पात्र और अपात्र पेंशनधारकों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। जांच पूरी होने तक संबंधित पेंशनधारकों की पेंशन अस्थायी रूप से रोकी जाएगी। सत्यापन के बाद पात्र पाए गए लोगों को बकाया राशि के साथ पेंशन पुनः जारी कर दी जाएगी।

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