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पुष्कर मेला 2025 में देशी-विदेशी रंग, कबड्डी में भारत की जीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया मेला आकर्षण

पुष्कर मेला 2025 में देशी-विदेशी रंग, कबड्डी में भारत की जीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया मेला आकर्षण

मनीषा शर्मा, अजमेर।  राजस्थान के धार्मिक नगर पुष्कर में आयोजित इंटरनेशनल पुष्कर फेयर 2025 ने इस बार एक बार फिर अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक खेलों और धार्मिक आयोजनों से देश-विदेश के पर्यटकों का दिल जीत लिया है। मेला मैदान में जहां एक ओर देशी-विदेशी कबड्डी मुकाबले ने रोमांच बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर घोड़ों के नृत्य, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों और बॉलीवुड नाइट ने मनोरंजन का नया रंग भर दिया।

भारत ने जीता देसी-विदेशी कबड्डी मैच

पुष्कर मेला मैदान में आयोजित कबड्डी मैच का माहौल देखने लायक था। इस अनोखे मुकाबले में एक तरफ भारतीय टीम थी तो दूसरी ओर नौ देशों के विदेशी पर्यटक खिलाड़ियों ने भाग लिया। विदेशी टीम में न्यूयॉर्क, कांगो, यूएसए, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, यूके और स्लोवाकिया के खिलाड़ी शामिल थे। दोनों टीमों में 11-11 खिलाड़ी उतरे और खेल की शुरुआत होते ही मैदान तालियों और उत्साह से गूंज उठा। मुकाबले में भारतीय टीम ने 25-17 के स्कोर से जीत दर्ज की। दिलचस्प बात यह रही कि विदेशी टीम में 50 से 60 वर्ष तक के खिलाड़ी भी शामिल थे, जिन्होंने पूरे जोश से खेल दिखाया। मैच के बाद विदेशी पर्यटकों ने इसे “गुड गेम” बताते हुए भारतीय टीम को बधाई दी। मैदान में मौजूद दर्शकों ने दोनों टीमों का उत्साहवर्धन किया और खेल भावना की मिसाल पेश की।

मेला मैदान में पशुपालकों का जलवा, घोड़ा-घोड़ी का डांस आकर्षण का केंद्र

पुष्कर मेला अपनी पशु प्रतियोगिताओं और पारंपरिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है। आज मेला मैदान में पशुपालक अपने घोड़े और घोड़ियों को लेकर पहुंचे। ढोल की थाप पर घोड़ा-घोड़ी के डांस स्टेप्स ने सभी का ध्यान खींच लिया। पशुपालकों ने घोड़ों से नागिन, चांग, जेसीबी, करतब और पाकिस्तानी स्टेप्स जैसे 13 तरह के डांस करवाए। दर्शकों ने इस नजारे को खूब सराहा। हालांकि, प्रशासन की ओर से कम उम्र के घोड़ों को डांस करने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे पशु कल्याण पर ध्यान देने का संदेश भी गया।

ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताओं की शुरुआत

इंटर पंचायत समिति ग्रामीण स्पोर्ट्स के तहत मेला मैदान में आज से ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताओं की शुरुआत हुई। सबसे पहले वॉलीबॉल मुकाबले का आयोजन हुआ, जिसमें श्रीनगर और भिनाय की टीमों ने भाग लिया। वॉलीबॉल के बाद रस्सा-कस्सी और अन्य पारंपरिक खेलों के मुकाबले भी शुरू हो गए हैं। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और लोक संस्कृति को खेल के माध्यम से जोड़ना है।

लोक और बॉलीवुड कलाकारों ने बिखेरा सुरों का जादू

शाम को मेला मैदान संगीत और रंगों से भर गया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ-साथ प्रसिद्ध बैंड सुरस बैंड और कबीर कैफे बैंड ने अपने लाइव कॉन्सर्ट से युवाओं का दिल जीत लिया। इसके साथ ही प्रसिद्ध लोक व पार्श्व गायक कुटले खान ने अपने गीतों से मेला में सुरों की महक घोल दी। उन्होंने “केसरिया बालम पधारो म्हारे देश” से कार्यक्रम की शुरुआत की और फिर “छाप तिलक सब छीनी…” तथा “सानू एक पल चैन न आवे…” जैसे लोकप्रिय गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मेला मैदान में मौजूद हजारों लोगों ने तालियों और सीटियों से उनका स्वागत किया। यह कार्यक्रम पुष्कर मेले के सांस्कृतिक आयाम को और गहराई प्रदान करता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला 5 नवंबर तक

पुष्कर मेला केवल पशु व्यापार या धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की संस्कृति का प्रतीक है। आयोजकों ने बताया कि 5 नवंबर तक रोजाना विभिन्न सांस्कृतिक और खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। 2 नवंबर को मेला ग्राउंड में पद्मश्री गुलाबो अपनी टीम के साथ कालबेलिया डांस की परफॉर्मेंस देंगी। 3 नवंबर को बॉलीवुड नाइट होगी जिसमें प्रसिद्ध गायक रूप कुमार राठौड़ और उनकी पत्नी सोनाली राठौड़ प्रस्तुति देंगे। इन प्रस्तुतियों से पुष्कर का वातावरण और अधिक जीवंत होने वाला है।

पंचतीर्थ स्नान और धार्मिक महत्व

पुष्कर मेला केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कल से पंचतीर्थ स्नान की शुरुआत होगी, जो 5 नवंबर तक चलेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष देवउठनी एकादशी (देवोत्थान एकादशी) का पर्व 2 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागकर सृष्टि का कार्यभार संभालेंगे। इसी दिन से चातुर्मास की समाप्ति होगी और विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। इस बार एक विशेष त्रिस्पर्शा योग भी बन रहा है, जिसमें एक ही दिन एकादशी, द्वादशी और रात्रि के अंतिम पहर में त्रयोदशी तिथि आती है। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में ब्रह्म सरोवर में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

पुष्कर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़

जैसे-जैसे पंचतीर्थ स्नान का समय नजदीक आ रहा है, तीर्थ नगरी पुष्कर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। बाजारों में चहल-पहल दिखाई दे रही है। जगह-जगह कलाकार अपने करतब दिखा रहे हैं, जबकि बच्चे छोटे-छोटे जादू और नृत्य के प्रदर्शन कर लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। इस वर्ष पुष्कर में देश-विदेश से आए सैलानियों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बताई जा रही है। होटल और धर्मशालाएं भरी हुई हैं, वहीं स्थानीय व्यापारियों के लिए यह मेला आर्थिक दृष्टि से भी लाभदायक साबित हो रहा है।

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