जनवरी 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 34.6 अरब डॉलर पर पहुँच गया है, जो पिछले तीन महीनों में सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सोने और चांदी के आयात में रिकॉर्ड वृद्धि के कारण हुई, जिसने कुल आयात बिल को भारी रूप से बढ़ा दिया। वहीं, अमेरिका को होने वाले निर्यात में गिरावट के चलते निर्यात वृद्धि लगभग स्थिर दिखाई दी। यह स्थिति भारत के बाहरी व्यापार संतुलन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
जनवरी में आयात में भारी बढ़ोतरी
जनवरी में भारत का कुल आयात 19.1% बढ़कर 71.2 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जो पिछले अप्रैल के बाद सबसे अधिक वृद्धि है और किसी भी महीने में दूसरा सबसे बड़ा आयात स्तर है। सोने का आयात 4.5 गुना बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जो भारतीय बाजार में मांग और वैश्विक उतार-चढ़ाव के असर को दर्शाता है। चांदी का आयात भी 2.3 गुना बढ़कर 2 अरब डॉलर हो गया। कीमती धातुओं के आयात में यह बड़ी उछाल घरेलू उद्योगों—विशेषकर आभूषण क्षेत्र—की कच्चे माल की मांग को भी इंगित करता है।
दूसरी ओर, जनवरी के दौरान रत्न एवं आभूषण और वस्त्र क्षेत्र में निर्यात घटा, जिसने निर्यात को प्रभावित किया। यद्यपि इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर ने थोड़ा सुधार दिखाया, लेकिन कुल निर्यात केवल 0.8% की मामूली वृद्धि के साथ 36.6 अरब डॉलर तक पहुँच सका।
सरकार का भरोसा: निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि की उम्मीद
सरकार को इस व्यापार आंकड़े के बावजूद उम्मीद है कि चालू वर्ष में भारत रिकॉर्ड निर्यात स्तर हासिल करेगा। इस भरोसे का मुख्य आधार अमेरिका की बढ़ती मांग है, जिसने कई क्षेत्रों में निर्यात के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। फरवरी की शुरुआत में अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाए जाने के बाद रत्न और आभूषण तथा कपड़ा जैसे क्षेत्रों में नई मांग उभर रही है। इससे उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले महीनों में इन क्षेत्रों में निर्यात की गति तेज होगी।
भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल (Rajesh Agrawal) ने कहा कि भारत का कुल निर्यात—चाहे वह सामान हो या सेवाएं—उर्ध्वमुखी रुझान दिखा रहा है। उन्होंने व्यक्त किया कि यदि मौजूदा रफ्तार कायम रही, तो भारत इस वर्ष लगभग 860 अरब डॉलर के कुल निर्यात के स्तर को छू सकता है। साथ ही सेवाओं का निर्यात पहली बार 410 अरब डॉलर से अधिक होने की संभावना है।
अमेरिका के साथ जनवरी का व्यापार प्रदर्शन
जनवरी 2026 में अमेरिका को भारत का निर्यात 22% घटकर 6.6 अरब डॉलर रह गया, जो निर्यात गिरावट का मुख्य कारण भी रहा। दूसरी ओर, अमेरिका से भारत में आयात 23.7% बढ़कर 4.5 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इस परिवर्तन से अमेरिका के साथ भारत का व्यापार घाटा घटकर 2.1 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर था। यह सुधार इसलिए हुआ क्योंकि निर्यात घटने के साथ-साथ आयात बढ़ने के बावजूद घाटे में तुलनात्मक कमी दर्ज की गई।
आगे की राह: व्यापार समझौतों से बढ़ेगी रफ्तार
वाणिज्य सचिव अग्रवाल के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025–26 भारत के लिए व्यापार के लिहाज से काफी सक्रिय रहा है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कई सकारात्मक संकेतों ने भारत को व्यापार वृद्धि बनाए रखने में मदद की है। उन्होंने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष में कुछ प्रमुख मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) लागू होने जा रहे हैं, जो निर्यात और आयात दोनों को नई दिशा दे सकते हैं। विशेषकर यूरोप, खाड़ी देशों और एशियाई बाजारों से जुड़े समझौते भारत की व्यापार स्थिति को और मजबूत करेंगे। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय मांग स्थिर रहती है और वैश्विक ब्याज दरों में कमी होती है, तो आने वाले वर्ष में भारत के निर्यात को अतिरिक्त गति मिल सकती है।
जनवरी में व्यापार घाटा बढ़ना चिंताजनक जरूर है, लेकिन सरकार का कहना है कि दीर्घकालिक रुझान सकारात्मक बने हुए हैं। सोना और चांदी के आयात की असामान्य वृद्धि ने आयात बिल बढ़ाया, जबकि अमेरिका को निर्यात में गिरावट ने निर्यात संतुलन को प्रभावित किया। इसके बावजूद सरकार को विश्वास है कि मौजूदा वर्ष में भारत रिकॉर्ड स्तर का निर्यात हासिल करेगा। आगामी मुक्त व्यापार समझौते, बढ़ती अमेरिकी मांग और सेवाओं के निर्यात में तेजी आने वाले महीनों में भारत के व्यापार परिदृश्य को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।


