शोभना शर्मा। भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर क्रिसिल (CRISIL) की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ग्रोथ रेट 6.5% रहने का अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस साल मानसून सामान्य रह सकता है, जिससे कृषि उत्पादन को फायदा होगा और खाद्य महंगाई में नरमी देखने को मिलेगी।
निजी खपत और निवेश बढ़ने की उम्मीद
क्रिसिल की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि FY26 में निजी खपत (Private Consumption) में सुधार देखने को मिलेगा। इसका मुख्य कारण यह है कि खाद्य महंगाई में कमी आने से उपभोक्ताओं के पास अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च करने के लिए ज्यादा बचत होगी। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि निवेश में बढ़ोतरी पूरी तरह से निजी पूंजीगत व्यय (Private Capital Expenditure) पर निर्भर करेगी। अगर कंपनियां और उद्योग बड़े स्तर पर निवेश बढ़ाते हैं, तो इससे रोजगार और मांग दोनों में इजाफा होगा, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
RBI कर सकता है 50-75 बेसिस प्वाइंट की कटौती
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी FY26 में मौद्रिक नीति में ढील दे सकता है। इसका मतलब यह है कि RBI रेपो रेट (Repo Rate) में 50-75 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो लोन सस्ते हो जाएंगे, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और लोग ज्यादा खर्च करने के लिए प्रेरित होंगे। इससे ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर को फायदा हो सकता है।
केंद्रीय बजट 2025-26 से भी मिलेगी खपत को रफ्तार
क्रिसिल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आगामी केंद्रीय बजट 2025-26 में आयकर (Income Tax) में छूट मिलने की संभावना है, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों के पास अधिक डिस्पोजेबल इनकम (खर्च करने योग्य आय) होगी। इससे बाजार में मांग को बढ़ावा मिलेगा और छोटे व्यवसायों को भी फायदा होगा। इसके अलावा, सरकार अगर बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च बढ़ाती है, तो इससे लॉजिस्टिक्स और निर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
FY25 में भी GDP ग्रोथ 6.5% रहने का अनुमान
क्रिसिल ने अपने रिपोर्ट में यह भी बताया कि FY25 (वित्त वर्ष 2024-25) में भी भारत की GDP ग्रोथ रेट 6.5% पर बनी रहेगी। हालांकि, यह FY23 के 9.2% की दर से कम है, लेकिन फिर भी भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ रेट 7.6% तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि तीसरी तिमाही में यह 6.2% थी, जो दूसरी तिमाही के 5.6% से अधिक है। इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे सुधार की ओर बढ़ रही है।
खाद्य महंगाई में कमी से उपभोक्ताओं को राहत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अच्छे मानसून और कृषि उत्पादन में सुधार की वजह से खाद्य महंगाई में नरमी आने की उम्मीद है। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और घरेलू बजट पर बोझ कम होगा। खाद्य महंगाई में कमी से निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ेगी, जिससे खुदरा बाजार (Retail Market) में तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखेगा
क्रिसिल की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत आने वाले वर्षों में भी सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा। महामारी से पहले के दशक (2011-2020) में भारत की औसत GDP ग्रोथ 6.6% रही थी, और अब FY26 में यह 6.5% के आसपास रहने की संभावना है, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत बनी रहेगी।


