शोभना शर्मा। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता बेहद अहम साबित हो सकता है। घरेलू स्तर पर जहां जीएसटी परिषद की बैठक और ऑटो सेक्टर के सेल्स आंकड़े निवेशकों की नजर में रहेंगे, वहीं वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ अपडेट और फेडरल रिजर्व की गतिविधियां बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी। बीते हफ्ते में बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी, ऐसे में निवेशकों को इस हफ्ते कई नए संकेतों से दिशा मिल सकती है।
जीएसटी परिषद की बैठक पर निवेशकों की नजर
3-4 सितंबर को प्रस्तावित जीएसटी परिषद की बैठक से बाजार की बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। इस बैठक में टैक्स दरों में कमी और कुछ नए प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। यदि परिषद किसी तरह की राहत देती है, तो यह कॉर्पोरेट सेक्टर और उपभोक्ताओं दोनों के लिए सकारात्मक संकेत होगा। जीएसटी दरों में कटौती को बाजार हमेशा पॉजिटिव मानता है, क्योंकि इससे कंपनियों की लागत घटती है और मांग में तेजी आती है। ऐसे में निवेशकों की निगाहें इस बैठक पर टिकी रहेंगी।
ऑटो सेल्स डेटा से मिलेगी अर्थव्यवस्था की झलक
सोमवार से ऑटोमोबाइल कंपनियों के सेल्स आंकड़े आने लगेंगे। गाड़ियों की बिक्री को अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। यदि ऑटो सेल्स उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो यह बाजार के लिए राहत की खबर होगी। ऑटो सेक्टर की मजबूती न केवल उद्योग जगत बल्कि उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति और मांग में सुधार का भी संकेत देती है। वहीं अगर आंकड़े कमजोर रहे तो यह निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
जीडीपी ग्रोथ और बाजार की प्रतिक्रिया
भारत की पहली तिमाही की जीडीपी ग्रोथ दर 7.8% दर्ज की गई है। यह आंकड़ा उम्मीद से बेहतर है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है। सोमवार को बाजार इस जीडीपी डेटा पर प्रतिक्रिया दे सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत जीडीपी ग्रोथ से भारत की स्थिति वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच और मजबूत होती है।
अमेरिकी फैक्टर: फेडरल रिजर्व और टैरिफ अपडेट
वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों और नीतिगत संकेतों पर रहेगी। यदि फेड रेट कट से जुड़े किसी भी कदम या बयान की ओर इशारा करता है, तो इसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ेगा।
इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भी बाजार के मूड को बदल सकता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा है कि भारत की जीडीपी ग्रोथ मजबूत रही है, जिससे यह ग्लोबल अनिश्चितताओं का सामना करने में सक्षम है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि टैरिफ का समाधान नहीं निकलता और 25% टैरिफ जारी रहते हैं, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
बीते हफ्ते बाजार का हाल
पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार ने निराशाजनक प्रदर्शन किया। निफ्टी 443 अंक गिरकर 24,426 पर और सेंसेक्स 1,497 अंक टूटकर 79,809 पर बंद हुआ।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 3-4% तक की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टोरल इंडेक्स में बैंकिंग, फाइनेंशियल, रियल्टी, एनर्जी और मेटल शेयरों पर दबाव हावी रहा।
रियल्टी इंडेक्स सबसे ज्यादा टूटकर 4% गिर गया।
हालांकि, पीएसयू इंडेक्स ने 0.73% की बढ़त दर्ज की, जिसने गिरावट के बीच कुछ राहत दी।
इन आंकड़ों से साफ है कि बीते हफ्ते बाजार पर दबाव ज्यादा रहा और निवेशकों की भावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
आने वाले हफ्ते में घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर कई ऐसे कारक हैं जो शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे।
यदि जीएसटी परिषद से राहत मिलती है और ऑटो सेल्स मजबूत रहते हैं, तो बाजार को सहारा मिल सकता है।
मजबूत जीडीपी ग्रोथ पहले ही सकारात्मक माहौल बना चुकी है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ और फेडरल रिजर्व के बयान जोखिम का कारण बने रहेंगे।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सतर्क होकर निवेश करें और केवल शॉर्ट टर्म संकेतों पर निर्णय लेने से बचें।