मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का आज पंद्रहवां दिन है और इसका असर दुनिया के ऊर्जा बाजारों से लेकर कई देशों की अर्थव्यवस्था तक दिखाई देने लगा है। इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। खाड़ी देशों से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी LPG लेकर आ रहे भारत के दो जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और अब देश के पश्चिमी तट की ओर बढ़ रहे हैं।
यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर व्यापार होने वाले कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
भारत के दो LPG जहाज सुरक्षित पहुंचे आगे
भारत सरकार के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी कैरियर जहाज शिवालिक और नंदा देवी शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गए। शिपिंग जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि ये दोनों जहाज कुल 92,700 टन एलपीजी लेकर भारत आ रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक दोनों जहाज अब गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से एक जहाज मुंद्रा पोर्ट और दूसरा कांडला पोर्ट पहुंचने वाला है। अनुमान है कि ये जहाज अगले दो से तीन दिनों के भीतर भारतीय तट पर पहुंच जाएंगे। दरअसल ये जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे जो युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में फंस गए थे। समुद्री सुरक्षा जोखिम के कारण कई दिनों तक इन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल पा रही थी।
ईरान ने जहाजों को दी थी अनुमति
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने एक दिन पहले जानकारी दी थी कि ईरान ने कुछ भारतीय जहाजों को इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया था कि कुल कितने जहाजों को अनुमति दी गई है। इस अनुमति के बाद ही भारतीय जहाज आगे बढ़ पाए। भारत के लिए यह खबर महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है।
युद्ध का वैश्विक तेल बाजार पर असर
मध्य पूर्व में जारी इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। हाल ही में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई जबकि अमेरिकी क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा चला तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर और दबाव पड़ सकता है। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेजी
युद्ध का असर अमेरिका के घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला है। ऑटोमोबाइल एसोसिएशन AAA के अनुसार देश में पेट्रोल की औसत कीमत बढ़कर 3.68 डॉलर प्रति गैलन हो गई है। यह कीमत युद्ध शुरू होने के बाद लगभग 23 प्रतिशत अधिक है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार डीजल की औसत कीमत भी बढ़कर लगभग 4.85 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे खाद्य पदार्थों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इसके अलावा हवाई यात्रा की लागत में भी वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।
पाकिस्तान में ईंधन संकट और सैलरी कटौती
युद्ध का असर पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। ईंधन संकट और बढ़ती कीमतों के कारण सरकार को खर्च कम करने के लिए कठोर कदम उठाने पड़े हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सरकारी कंपनियों और स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों की सैलरी में 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दी है।
सरकार ने यह भी फैसला किया है कि सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत तक कमी की जाएगी और अगले दो महीनों में 60 प्रतिशत सरकारी गाड़ियों को सड़कों से हटाया जाएगा। इसके अलावा नए सरकारी वाहनों की खरीद पर भी रोक लगा दी गई है।
बेरूत में इजराइली हवाई हमला
युद्ध के बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। लेबनान की राजधानी बेरूत के पास इजराइली हवाई हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार लोग घायल हो गए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार हमला शहर के पूर्वी इलाके में हुआ। इस घटना ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
इसी दौरान इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है। काट्ज ने कहा कि यह अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है।
खार्ग आइलैंड पर अमेरिकी हमले का दावा
अमेरिकी सेना ने भी इस संघर्ष में महत्वपूर्ण कार्रवाई का दावा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड CENTCOM के अनुसार ईरान के खार्ग आइलैंड पर बड़े पैमाने पर सटीक हमले किए गए हैं। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों में 90 से अधिक सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। दूसरी ओर ईरानी अधिकारियों का कहना है कि खार्ग आइलैंड से तेल निर्यात सामान्य रूप से जारी है।
UAE ने मिसाइल और ड्रोन रोके
इस युद्ध का प्रभाव खाड़ी देशों पर भी पड़ा है। संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान से दागी गई 9 बैलिस्टिक मिसाइल और 33 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद अब तक उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 294 बैलिस्टिक मिसाइल, 15 क्रूज मिसाइल और लगभग 1600 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया है।
कोच्चि पोर्ट पर खड़ा ईरानी युद्धपोत
इस बीच भारत में एक ईरानी नौसैनिक जहाज भी चर्चा में है। ईरान का युद्धपोत IRIS लावन अभी भी कोच्चि पोर्ट पर खड़ा है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि जहाज तकनीकी खराबी के कारण यहां डॉक किया गया था। ईरान ने फरवरी के अंत में आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति मांगी थी और भारत ने इसे मंजूरी दे दी थी। उन्होंने बताया कि जहाज के गैर-जरूरी क्रू सदस्य और भारत में फंसे कुछ ईरानी नागरिकों को चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए वापस भेज दिया गया है।
वैश्विक तनाव के बीच ऊर्जा बाजार पर नजर
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति कितनी संवेदनशील है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। भारत के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि उसके दो एलपीजी जहाज सुरक्षित रूप से आगे बढ़ चुके हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबे समय तक चलता है तो तेल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।


