नई दिल्ली: गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस हिरासत में हत्या शनिवार को हुई उसे लेकर विपक्षी दलों ने योगी सरकार और वहां के कानून व्यवस्था की आलोचना की है. साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के “एनकाउंटर राज [नियम]” में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की, राज्य में “भय का माहौल बनाने के लिए जानबूझकर किए जा रहे प्रयासों” का आरोप लगाया है.
प्रयागराज में पुलिस हिरासत में मेडिकल जांच के लिए ले जा रहे तीन लोगों ने कथित तौर पर पत्रकार बनकर इन दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. उनकी मौत एक दिन बाद हुई जब अहमद के एक बेटे असद और उसके कथित सहयोगी गुलाम को यूपी पुलिस के एक विशेष टास्क फोर्स के अधिकारियों ने गोली मार दी थी.
अतीक, उसका भाई अशरफ, अतीक की पत्नी शाइस्ता, अतीक के तीन बेटे, गुलाम (एक शूटर के रूप में पहचाना गया) और गुड्डू मुस्लिम (एक बमवर्षक के रूप में पहचाना गया), दोनों अतीक के गिरोह का हिस्सा थे, भारतीय जनता पार्टी के नेता उमेश पाल की हत्या के आरोपियों में शामिल थे, जिनकी फरवरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
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