शोभना शर्मा। बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग का केंद्र बन गया है। यहां सोमवार से भारत और रूस की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘इंद्र-2025’ (Indra-2025) की शुरुआत हुई। यह अभ्यास 15 अक्टूबर तक चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आतंकवाद-रोधी अभियानों, आधुनिक युद्ध तकनीकों और सामरिक समन्वय (Strategic Coordination) को मजबूत करना है।
250 रूसी सैनिक भारत पहुंचे, दोनों सेनाओं की संयुक्त भागीदारी
इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में रूस के करीब 250 सैनिक भारत के सैनिकों के साथ भाग ले रहे हैं। दोनों देशों की सेनाएं इस दौरान संयुक्त रणनीतिक अभियानों, लाइव फायर ड्रिल, क्लोज क्वार्टर कॉम्बैट (नजदीकी युद्ध) और कठिन परिस्थितियों में सैन्य संचालन जैसी गतिविधियों का अभ्यास कर रही हैं। रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित इस हाई-इंटेंसिटी ड्रिल में सैनिकों को आधुनिक हथियारों और युद्ध तकनीकों के प्रयोग के साथ सामरिक तालमेल (Coordination) को परखने का मौका मिलेगा।
गांडीव डिवीजन के कमांडर ने किया उद्घाटन
अभ्यास का औपचारिक शुभारंभ महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ। भारत की ओर से गांडीव डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल संजय चंद्रा कंडपाल और रूस की ओर से मेजर जनरल आंद्रे कोजलोव ने संयुक्त रूप से अभ्यास का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने पारंपरिक सैन्य सम्मान के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया और सहयोग की भावना को प्रदर्शित किया। इस अवसर पर भारतीय सेना के बैंड द्वारा राष्ट्रगान की धुनें भी प्रस्तुत की गईं।
रूसी सैनिकों को दी जा रही है स्पेशल ट्रेनिंग
रूस के सैनिक 1 अक्टूबर को भारत पहुंचे थे। आगमन के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रारंभिक सामंजस्य बैठकों और ब्रीफिंग्स का दौर चला। इसके बाद अभ्यास के विभिन्न चरणों की योजना बनाई गई। अभ्यास के दौरान सैनिकों को आतंकवाद-रोधी अभियानों के तहत कई सिम्युलेटेड (काल्पनिक) मिशन स्थितियों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:
बंधक मुक्ति (Hostage Rescue) अभियान
आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला (Precision Strike)
किलेबंद स्थानों पर घुसपैठ और नियंत्रण
वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में ऑपरेशन प्रबंधन
सभी गतिविधियां सख्त सैन्य अनुशासन और युद्ध नियमों के तहत की जा रही हैं। सैनिकों को टीम कोऑर्डिनेशन, टैक्टिकल मूवमेंट और संयुक्त कमांड संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रेगिस्तानी इलाके में युद्ध कौशल की परीक्षा
बीकानेर का महाजन फील्ड फायरिंग रेंज भारत के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण सैन्य अभ्यास स्थलों में से एक माना जाता है। यहां की भौगोलिक स्थिति — ऊबड़-खाबड़ रेत, तेज धूप और सीमित संसाधन — वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों का अनुभव कराती है। इस तरह के अभ्यास से सैनिकों को अत्यधिक गर्मी और सूखे वातावरण में ऑपरेशन करने की क्षमता विकसित होती है। साथ ही, आतंकवाद-रोधी अभियानों में तेज़ प्रतिक्रिया (Quick Response) और सटीक समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
भारत-रूस रक्षा संबंधों में ‘इंद्र’ श्रृंखला का महत्व
‘इंद्र’ श्रृंखला का सैन्य अभ्यास भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग का प्रतीक है। वर्ष 2003 में इसकी शुरुआत के बाद से दोनों देशों के बीच यह संयुक्त अभ्यास हर वर्ष आयोजित होता रहा है। इस अभ्यास का उद्देश्य न केवल सैन्य कौशल बढ़ाना है, बल्कि दोनों सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, समझ और तालमेल को मजबूत करना भी है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि “इंद्र-2025” जैसी कवायदें भारत और रूस के रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देती हैं और दोनों देशों की सेनाओं के बीच परिचालनिक अनुभव (Operational Experience) साझा करने का अवसर प्रदान करती हैं।
भारत की सामरिक तैयारी को मिलेगा बल
विश्लेषकों का मानना है कि यह अभ्यास भारत की सामरिक तैयारी और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति के लिए भी अहम है। आतंकवाद, सीमापार खतरों और आधुनिक युद्ध तकनीकों के दौर में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय अभ्यास भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता को मजबूत करते हैं। रूसी सेना की विशेषता है कि वह कठिन इलाकों और चरम परिस्थितियों में ऑपरेशन करने में दक्ष है, वहीं भारतीय सेना का अनुभव रेगिस्तानी, पर्वतीय और उष्ण क्षेत्रों में समृद्ध है। इन दोनों सेनाओं के अनुभवों का सम्मिलन भविष्य की संयुक्त अभियानों की सफलता में सहायक होगा।


