भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील का अंतरिम ढांचा सामने आ चुका है। इस समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि उच्च टैरिफ दरें अब तक भारतीय सामान की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही थीं। भारत और अमेरिका के बीच यह नया फ्रेमवर्क आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है और कई प्रमुख उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सकता है।
ऑटो सेक्टर को मिली बड़ी राहत
ट्रेड डील का सबसे सकारात्मक असर भारतीय ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा। समझौते के तहत—
भारत और अमेरिका ने हाई-एंड बाइक्स पर ड्यूटी में उल्लेखनीय कमी की है।
हार्ले डेविडसन की 800–1600 CC कैटेगरी की बाइक्स पर अब जीरो टैरिफ लगाया जाएगा।
3000 CC से अधिक क्षमता वाली कारों पर टैरिफ को 30 प्रतिशत तक लाने की प्रक्रिया शुरू होगी, हालांकि फिलहाल 50 प्रतिशत टैक्स जारी रहेगा। इस बदलाव से न केवल प्रीमियम वाहन बाजार को गति मिलेगी, बल्कि भारत में ऑटोमोबाइल कंपनियों के निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
ऑटो पार्ट्स उद्योग को टैरिफ रेट कोटा
भारत को धारा 232 के तहत एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर भी छूट प्रदान की गई है। इसके अलावा—
ऑटो पार्ट्स के लिए टैरिफ रेट कोटा (TRQ) लागू किया जाएगा।
TRQ के तहत एक निश्चित मात्रा तक कम टैरिफ पर आयात-निर्यात की अनुमति होगी।
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) ने इसे एक सकारात्मक कदम बताया है। ACMA के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने कहा कि यह कदम सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा। सेक्शन 232 टैरिफ हटने और टैरिफ तर्कसंगत होने से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति मिलेगी।
भारत–अमेरिका ऑटो कंपोनेंट व्यापार: आंकड़े बताते हैं तेजी
नीचे दिए गए आंकड़े ऑटो कंपोनेंट व्यापार में तेजी को दर्शाते हैं (मिलियन USD में):
| व्यापार का विवरण | FY20-21 | FY21-22 | FY22-23 | FY23-24 | FY24-25 | H1 FY25-26 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| भारत का अमेरिका को निर्यात | 3561 | 5280 | 5648 | 5823 | 6225 | 3124 |
| अमेरिका का भारत को निर्यात | 904 | 1218 | 1482 | 1483 | 1505 | 844 |
इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग निरंतर बढ़ रहा है और यह समझौता आगे इसकी ग्रोथ को और तेज कर सकता है।
टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर और इंजीनियरिंग गुड्स को भी लाभ
ट्रेड डील का प्रभाव केवल ऑटो सेक्टर तक सीमित नहीं है। इससे कई अन्य भारतीय उद्योगों को भी फायदा मिलेगा, जिनमें प्रमुख हैं—
टेक्सटाइल उद्योग
अपैरल (वस्त्र परिधान)
लेदर गुड्स
केमिकल सेक्टर
इंजीनियरिंग उत्पाद
इन सेक्टरों का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। टैरिफ में कमी से इन उद्योगों की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और बढ़ेगी।
भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति होगी मजबूत
भारत पर अमेरिकी शुल्क में कमी के बाद—
भारतीय उत्पादों की लागत आसियान देशों की अपेक्षा अधिक प्रतिस्पर्धी होगी।
चीन के मुकाबले भारत को बड़ा रणनीतिक लाभ मिलेगा।
भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क कई एशियाई देशों से कम होंगे। डीबीएस ग्रुप रिसर्च की सीनियर अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार यह बदलाव भारतीय निर्यात, वास्तविक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए अत्यंत सकारात्मक है। टैरिफ कटौती के बाद भारत अब चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ संरचना वाला देश बन गया है।
भारतीय निर्यात के लिए अवसरों का विस्तार
ट्रेड फ्रेमवर्क न केवल तात्कालिक लाभ देता है, बल्कि यह भारतीय निर्यात के लिए दीर्घकालिक अवसर भी खोलता है—
बड़ी रेंज के भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ हटाने का रास्ता खुलेगा।
भारत में उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण को वैश्विक बाजार में और मजबूती मिलेगी।
भारत-अमेरिका सप्लाई चेन इंटीग्रेशन और गहरा होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का अंतरिम ढांचा भारतीय निर्यात, ऑटो सेक्टर, टेक्सटाइल उद्योग और इंजीनियरिंग गुड्स के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। टैरिफ में भारी कटौती, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन मजबूती जैसे कदम भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। यह समझौता न केवल भारतीय उद्योगों को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि भारत की आर्थिक स्थिति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगा।


