अजमेर शहर में आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने एक प्रमुख रेस्तरां पर बड़ी कार्रवाई करते हुए टैक्स चोरी के मामले का खुलासा किया है। शहर के चर्चित मेंगो मसाला रेस्तरां पर सोमवार को दूसरे दिन भी सर्वे की कार्रवाई जारी रही। अब तक की जांच में करीब 15 करोड़ रुपए के टर्नओवर को छिपाने का मामला सामने आया है।
यह कार्रवाई अजमेर के इंडिया मोटर सर्किल चौराहे के पास स्थित मेंगो मसाला रेस्तरां पर की गई। आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि शहर के कई अन्य रेस्तरां, कैफे और चाय-कॉफी हाउस भी इसी तरह के सॉफ्टवेयर के जरिए अपनी वास्तविक आय छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।
पेटपूजा ऐप के जरिए आय छिपाने का आरोप
आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग के डिप्टी डायरेक्टर ललितेश मीणा ने बताया कि जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित रेस्तरां क्लाउड आधारित ‘पेटपूजा’ ऐप का इस्तेमाल कर अपनी वास्तविक आय को छिपा रहा था। इस ऐप के माध्यम से बिक्री और आय के आंकड़ों में हेरफेर कर टैक्स से बचने की कोशिश की जा रही थी।
मीणा के अनुसार विभाग को इस सॉफ्टवेयर के उपयोग से जुड़ा डेटा पहले से प्राप्त था, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। जांच के दौरान रेस्तरां के वित्तीय रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर डेटा का मिलान किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक बिक्री कितनी हुई और आयकर रिटर्न में कितना दिखाया गया।
कई शहरों में हो चुकी है कार्रवाई
आयकर विभाग के अनुसार इस तरह के मामलों की जांच केवल अजमेर तक सीमित नहीं है। इससे पहले उदयपुर के दो प्रमुख रेस्तरां, कोटा के एक रेस्तरां, श्रीगंगानगर के एक प्रतिष्ठान और जयपुर के एक बड़े रेस्तरां पर भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जा चुकी है। इन मामलों में भी सॉफ्टवेयर आधारित बिलिंग सिस्टम के जरिए वास्तविक बिक्री छिपाने और टैक्स चोरी करने की आशंका सामने आई थी। विभाग का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अब डिजिटल डेटा और तकनीकी विश्लेषण का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
ऐप में दो तरह के रिकॉर्ड रखने की सुविधा
सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ शैफाली सिंह के अनुसार पेटपूजा ऐप में दो तरह की बिक्री का रिकॉर्ड रखने की सुविधा उपलब्ध होती है। इसमें एक औपचारिक बिक्री रिकॉर्ड होता है जो अकाउंट्स और टैक्स रिटर्न में शामिल किया जाता है, जबकि दूसरा अनौपचारिक या छिपा हुआ रिकॉर्ड भी रखा जा सकता है।
अक्सर रेस्तरां संचालक उन बिलों को औपचारिक रिकॉर्ड से अलग रखते हैं जिनका भुगतान नकद में किया जाता है। इस तरह की बिक्री का डेटा मुख्य बहीखातों में शामिल नहीं किया जाता और इसे अलग से सुरक्षित रखा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस छिपे हुए रिकॉर्ड तक पहुंच केवल एक विशेष पासवर्ड के जरिए संभव होती है। यह पासवर्ड आमतौर पर उस व्यक्ति को दिया जाता है जो सॉफ्टवेयर का लाइसेंस खरीदता है। इस व्यवस्था के कारण कई बार वास्तविक बिक्री और आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच बड़ा अंतर सामने आता है।
केवल लैपटॉप और इंटरनेट से संभव
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था को संचालित करने के लिए किसी विशेष हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं होती। केवल एक लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन के माध्यम से इस तरह का डेटा प्रबंधन किया जा सकता है। इस कारण छोटे ढाबों से लेकर बड़े रेस्तरां और होटल तक इस तरह के सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं। हालांकि अधिकांश व्यवसाय इसे वैध तरीके से उपयोग करते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इसका दुरुपयोग कर टैक्स चोरी की कोशिश की जाती है।
क्या है पेटपूजा ऐप
पेटपूजा एक क्लाउड आधारित रेस्तरां मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर है, जिसे पीओएस सिस्टम के रूप में उपयोग किया जाता है। देश भर में हजारों रेस्तरां और होटल इस सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं। इसके माध्यम से बिलिंग, इन्वेंट्री मैनेजमेंट, ऑनलाइन ऑर्डर प्रोसेसिंग, ग्राहक डेटा प्रबंधन और वित्तीय रिपोर्ट तैयार करने जैसे कई कार्य किए जाते हैं। इसके अलावा यह सॉफ्टवेयर कर्मचारियों के वेतन प्रबंधन और बिक्री विश्लेषण जैसे कामों में भी मदद करता है। हालांकि हाल के समय में सामने आए मामलों के बाद यह चर्चा का विषय बन गया है कि कुछ व्यवसायी इसका उपयोग कर बिक्री के आंकड़ों में हेरफेर कर रहे हैं।
अन्य कारोबारियों को भी नोटिस की तैयारी
आयकर विभाग का कहना है कि पेटपूजा ऐप का उपयोग करने वाले कई व्यवसायियों का डेटा विभाग के पास उपलब्ध है। अब इस डेटा का आयकर रिटर्न में दर्ज आंकड़ों के साथ क्रॉस चेक किया जाएगा। यदि जांच में बिक्री और आय के आंकड़ों में अंतर पाया जाता है तो संबंधित कारोबारियों को नोटिस भेजे जाएंगे। विभाग के अधिकारियों के अनुसार केवल बड़े रेस्तरां ही नहीं बल्कि छोटे कैफे, चाय स्टॉल और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान भी इस तरह के सॉफ्टवेयर का उपयोग कर टैक्स चोरी करने की कोशिश कर रहे हैं।
जांच के बाद हो सकती है बड़ी कार्रवाई
आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मेंगो मसाला रेस्तरां के मामले में सर्वे के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। यदि जांच में टैक्स चोरी की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ आयकर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।


