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संसाधन संकट के दौर में सौर ऊर्जा ही भविष्य: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी

संसाधन संकट के दौर में सौर ऊर्जा ही भविष्य: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि आज जब पूरा विश्व प्राकृतिक संसाधनों की गंभीर कमी से जूझ रहा है, ऐसे समय में भारतीय संस्कृति का वह मूल विचार अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है, जिसमें संसाधनों को केवल उपयोग की वस्तु नहीं बल्कि पूजनीय माना गया है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की शिक्षा देती है, जो आज की वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकती है। देवनानी ने यह विचार रविवार को जयपुर के वी.टी. रोड ग्राउंड, मानसरोवर में आयोजित भारत रिन्यूएबल एक्सपो 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के अंतर्गत चयनित लाभार्थियों को पुरस्कार भी प्रदान किए।

ऊर्जा संकट और नए विकल्पों की आवश्यकता

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में पेट्रोल, डीजल, कोयला, जल और शुद्ध वायु जैसे पारंपरिक संसाधन लगातार कम होते जा रहे हैं। इन संसाधनों पर अत्यधिक निर्भरता ने न केवल पर्यावरणीय संकट को जन्म दिया है, बल्कि मानव जीवन और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया है। उन्होंने कहा कि मानवता को सुरक्षित रखने के लिए अब ऊर्जा के नए और स्वच्छ स्रोतों को अपनाना समय की आवश्यकता बन चुका है। नवीकरणीय ऊर्जा, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, इस दिशा में एक प्रभावी और स्थायी समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है।

सूर्य ऊर्जा: प्रकृति का अनमोल उपहार

देवनानी ने कहा कि भगवान सूर्य की ऊर्जा मानवता के लिए सबसे बड़ा और अक्षय ऊर्जा स्रोत है। भारत जैसे देश में, जहां वर्ष के अधिकांश समय प्रचुर सूर्य प्रकाश उपलब्ध रहता है, सौर ऊर्जा का उपयोग भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि आज पूरे भारत में सौर ऊर्जा का विकास तेज गति से हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं, तकनीकी नवाचारों और निजी निवेश के चलते यह क्षेत्र निरंतर विस्तार कर रहा है।

राजस्थान: सौर ऊर्जा की अपार संभावनाओं वाला राज्य

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है और साथ ही खनिज संपदा व सौर ऊर्जा की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। सीमावर्ती जिले बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर और फलोदी सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान को प्रकृति ने प्रचुर सूर्य प्रकाश और विशाल भू-भाग का वरदान दिया है। यही कारण है कि आज राजस्थान देश के अग्रणी सोलर और विंड एनर्जी उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है।

थार से विकास की नई कहानी

देवनानी ने कहा कि थार के मरुस्थल से लेकर राज्य के विभिन्न अंचलों तक विकसित किए गए सोलर पार्क, विंड फार्म और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स न केवल ऊर्जा उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित कर रहे हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत संरचना का विकास हुआ है और युवाओं को तकनीकी एवं गैर-तकनीकी रोजगार के अवसर मिले हैं।

भारत रिन्यूएबल एक्सपो 2026: स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में संकल्प

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत रिन्यूएबल एक्सपो 2026 केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक मजबूत संकल्प और साझा प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे समय में भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से अग्रसर है और राजस्थान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

निवेश, नीति और भविष्य की संभावनाएं

देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बनाई गई प्रगतिशील नीतियां, निवेश के अनुकूल वातावरण और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ने राजस्थान को रिन्यूएबल एनर्जी निवेश का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में भी राजस्थान अपार संभावनाओं वाला राज्य है। आने वाले वर्षों में ये क्षेत्र न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देंगे।

गणमान्य जनों की उपस्थिति

समापन समारोह में विधायक पुष्पेन्द्र सिंह राणावत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान की भूमिका की सराहना की और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

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