राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बुधवार को अजमेर प्रवास के दौरान राजस्व मंडल अजमेर के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर राजस्व मंडल के अध्यक्ष हेमन्त गेरा ने मंडल द्वारा किए जा रहे न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में मंडल के सभी सदस्यों से अपेक्षा की गई कि वे काश्तकारों के हित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करें और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में ठोस प्रयास करें।
राजस्व मंडल की पहचान ‘न्याय के मंदिर’ के रूप में
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्व मंडल की पहचान न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में एक न्याय के मंदिर के रूप में है। उन्होंने कहा कि इस संस्था की गरिमा को बनाए रखना बार और बेंच दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व न्याय प्रणाली का मूल उद्देश्य किसानों और काश्तकारों को समय पर न्याय दिलाना है और इस लक्ष्य से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजस्व मंडल राजस्थान का सबसे बड़ा न्यायिक संस्थान है और यहां कार्य करने का उनका अनुभव अत्यंत संतोषजनक रहा है। रोजाना पांच हजार से अधिक काश्तकारों का यहां आना इस बात का प्रमाण है कि आमजन और किसान वर्ग का इस संस्था पर गहरा विश्वास है।
अध्यक्ष हेमन्त गेरा से बढ़ेगी कार्यों की गति
मुख्य सचिव ने राजस्व मंडल के वर्तमान अध्यक्ष हेमन्त गेरा की सराहना करते हुए कहा कि वे नियमों की गहरी समझ रखने वाले, अनुभवी और किसानों के हित में निर्णय लेने वाले अधिकारी हैं। उनके नेतृत्व में मंडल के कार्यों में निश्चित रूप से तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व के साथ यदि सभी सदस्य समन्वय बनाकर काम करें, तो लंबित मामलों के निस्तारण में उल्लेखनीय प्रगति संभव है।
लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण पर जोर
वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्यभर के राजस्व न्यायालयों और विशेष रूप से राजस्व मंडल में बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित हैं। इन मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए कार्यशैली में सुधार और प्रक्रियाओं को तेज करने की आवश्यकता है। उन्होंने नोटिस तामील की प्रक्रिया को तेज करने, सदस्यों की नियमित बैठक सुनिश्चित करने और समयबद्ध सुनवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि न्याय प्रक्रिया में देरी से किसानों और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी होती है, इसलिए प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सार्वजनिक भूमि और संसाधनों की सुरक्षा पर बल
मुख्य सचिव ने मंदिरों, नदियों, नालों और अन्य सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि इन मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो और राजस्व न्यायालय ऐसे प्रकरणों में त्वरित और प्रभावी निर्णय दें। उन्होंने बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि अधिवक्ता पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हों, तो पीठ को भी हर समय तत्पर रहना चाहिए।
तकनीक से सरल होगी न्याय प्रक्रिया
राजस्व मंडल के कार्यों में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल माध्यमों से न्याय प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाया जा सकता है। ई-फाइलिंग, ऑनलाइन नोटिस और केस ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाओं से न केवल समय की बचत होगी बल्कि आमजन को भी राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाकर राजस्व न्यायालयों की कार्यक्षमता में बड़ा सुधार किया जा सकता है।
नए भवन निर्माण के निर्देश
मुख्य सचिव ने वर्तमान बजट में राजस्व मंडल के नए भवन के लिए आवंटित 150 करोड़ रुपये की राशि का उल्लेख करते हुए निर्देश दिए कि भवन निर्माण कार्य समय पर प्रारंभ किया जाए। उन्होंने कहा कि बेहतर आधारभूत ढांचा न्यायिक कार्यों की गुणवत्ता और गति दोनों को प्रभावित करता है।
इसके साथ ही उन्होंने राजस्व नियमों से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों के साथ नियमित चर्चा करने और अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि राजस्व संबंधी निर्णयों को लिखना एक महत्वपूर्ण विधा है और इसके लिए समय-समय पर प्रशिक्षण आवश्यक है।
आपसी समन्वय से मिलेगा समय पर न्याय
वी. श्रीनिवास ने कहा कि व्यक्ति को समय पर न्याय मिलना प्रशासन और न्यायिक तंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि राजस्व मंडल इस दिशा में और बेहतर प्रदर्शन करेगा।
अभिनंदन और उपस्थिति
इस अवसर पर राजस्व मंडल अभिभाषक संघ के अध्यक्ष शंकर लाल जाट, सचिव मनीष पाण्डिया, वरिष्ठ अधिवक्ता ओ. एल. दवे सहित संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का अभिनंदन किया। बैठक में रजिस्ट्रार महावीर प्रसाद, संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड़, जिला कलेक्टर लोक बन्धु तथा अन्य अधिकारी और अधिवक्ता उपस्थित रहे।


