सर्राफा बाजार में इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशक और ज्वेलरी खरीदार दोनों ही असमंजस में हैं कि गिरते दामों को अवसर माना जाए या अभी और इंतजार किया जाए। 16 फरवरी को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सोने में हल्की मजबूती देखने को मिली है।
India Bullion and Jewellers Association के आंकड़ों के अनुसार, चांदी आज ₹2,949 प्रति किलो सस्ती होकर ₹2,39,484 पर पहुंच गई। वहीं 24 कैरेट सोना ₹1,315 प्रति 10 ग्राम की तेजी के साथ ₹1,54,080 पर कारोबार कर रहा है। हालांकि यह बढ़त सीमित है और सोना अभी भी अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे बना हुआ है।
18 दिन में इतनी बड़ी गिरावट
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीते 18 दिनों में चांदी के दामों में ₹1,46,449 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। 29 जनवरी को चांदी ने ₹3,85,933 का ऑल टाइम हाई बनाया था, लेकिन अब यह उस स्तर से काफी नीचे आ चुकी है।
इसी तरह सोना भी अपने रिकॉर्ड हाई ₹1,76,121 प्रति 10 ग्राम से ₹22,041 सस्ता हो चुका है। इतनी तेज गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है। आमतौर पर इस तरह की बड़ी गिरावट कम ही देखने को मिलती है, खासकर चांदी में।
चांदी और सोने की चाल में फर्क
बुलियन बाजार में इस समय एक खास ट्रेंड दिखाई दे रहा है जिसे ‘डायवर्जेंस’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि सोना और चांदी अलग-अलग दिशा में चल रहे हैं। जहां चांदी में गिरावट जारी है, वहीं सोना निचले स्तरों पर कुछ मजबूती दिखा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अक्सर किसी बड़ी चाल से पहले दिखाई देती है।
चांदी एक औद्योगिक धातु भी है और इसकी मांग इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल और अन्य उद्योगों से जुड़ी होती है। इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। वहीं सोना अभी भी सुरक्षित निवेश यानी ‘सेफ हेवन’ माना जाता है।
गिरावट की वजहें क्या हैं?
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, रिकॉर्ड स्तर के बाद बड़े निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली इस गिरावट की प्रमुख वजह है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और ग्लोबल कमोडिटी फंड्स की पोजिशनिंग का भी असर पड़ा है।
चांदी में ज्यादा वोलाटिलिटी होने के कारण इसमें गिरावट तेज रही है। सोना अपेक्षाकृत स्थिर रहा, लेकिन वह भी दबाव से अछूता नहीं रहा।
क्या अभी खरीदारी का सही समय है?
इतिहास बताता है कि जब कीमतें अपने उच्चतम स्तर से 15 से 20 प्रतिशत तक नीचे आ जाती हैं, तो वह लंबी अवधि के निवेश के लिए अच्छा अवसर हो सकता है। हालांकि बाजार अभी भी अस्थिर है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश यानी एसआईपी रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा।
अगर आप शादी या अन्य जरूरतों के लिए गहने खरीदना चाहते हैं, तो मौजूदा स्तर को अनुकूल माना जा सकता है। लेकिन निवेश के नजरिए से सावधानी जरूरी है।
अलग-अलग शहरों में अलग रेट क्यों?
अक्सर दिल्ली, मुंबई या अन्य शहरों में सोने-चांदी के दाम अलग-अलग नजर आते हैं। इसका कारण यह है कि IBJA द्वारा जारी दरों में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मुनाफा शामिल नहीं होता। साथ ही राज्यों के टैक्स नियम और ट्रांसपोर्टेशन लागत भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।


