मनीषा शर्मा। अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 814वें उर्स का आगाज राजनीतिक और सामाजिक संदेश के साथ हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से बुधवार को चादर पेश की गई, जिसे कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद इमरान प्रतापगढ़ी विशेष तौर पर लेकर दरगाह पहुंचे। दरगाह में चादर पेश करने के बाद बुलंद दरवाजे पर खड़गे का संदेश पढ़ा गया। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और स्थानीय नेताओं की मौजूदगी ने आयोजन को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया। उर्स के मौके पर जहां दुआओं और सद्भावना का संदेश दिया गया, वहीं मंच से देश की नीतियों और जनता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर आवाज भी उठी।
मजदूरों के अधिकार पर बड़ा आरोप
सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने संबोधन में कहा कि संसद में लाए गए बिल के जरिए मजदूरों के अधिकार कमजोर करने की कोशिश की गई। उनके अनुसार जब यह बिल पेश हुआ, तब देर रात तक सदन चलाया गया और विपक्ष की चिंताओं को अनदेखा किया गया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने संसद के अंदर भी इसका विरोध किया और सड़क पर भी लोगों के साथ खड़ी रही। प्रतापगढ़ी ने विशेष रूप से मनरेगा का जिक्र किया और कहा कि यूपीए सरकार ने 12 करोड़ से अधिक मजदूरों को रोजगार की गारंटी दी थी, जबकि मौजूदा सरकार उस सुरक्षा कवच को खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। उनका कहना था कि नाम बदलने की राजनीति केवल दिखावा है, असल मुद्दा मजदूरों के अधिकार और रोजगार पर असर है।
अरावली मुद्दे पर सरकार को घेरा
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अरावली पर्वतमाला संबंधी बयान पर प्रतापगढ़ी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे कानून लाना चाहती है, जिनसे पर्यावरण और पर्वतमाला दोनों को नुकसान पहुंचेगा। उनके अनुसार यह कदम उद्योगपतियों के हित में है, जबकि आम लोगों के जल, जंगल और जमीन पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली जैसे बड़े शहर पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहे हैं और ऐसे फैसले स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।
“हम दो हमारे एक” का राजनीतिक तंज
भाषण में प्रतापगढ़ी ने केंद्र सरकार पर बहुमत का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में निजीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है और बड़ी नीतियां कुछ चुनिंदा समूहों के हित में दिखाई देती हैं। राहुल गांधी के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह नीति “हम दो हमारे एक” की तरह दिखाई देती है, जिसमें संसाधन कुछ व्यक्तियों तक सीमित किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न राज्यों में प्राकृतिक संसाधन चुनिंदा हाथों में सौंपे जा रहे हैं।
चुनाव, वोटर लिस्ट और लोकतंत्र पर सवाल
प्रतापगढ़ी ने वोटर लिस्ट और चुनावी माहौल को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कई राज्यों में मतदाता सूची में गड़बड़ियां देखी गईं, लेकिन शिकायतों का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धनबल और एजेंसियों के इस्तेमाल से चुनावी मुकाबला असंतुलित हो जाता है। उनके अनुसार संसाधनों में असमानता लोकतंत्र की निष्पक्षता पर असर डाल सकती है।
महंगाई पर केंद्र सरकार पर तंज
महंगाई को लेकर सांसद ने कहा कि रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर सोना-चांदी तक, लगभग हर चीज महंगी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे मध्यमवर्ग और गरीब परिवारों पर गंभीर असर पड़ रहा है। प्रतापगढ़ी के अनुसार सरकार बाजार पर नियंत्रण करने में विफल रही है और जनता की मुश्किलों को स्वीकारने के बजाय बहस को दूसरी दिशा में मोड़ दिया जाता है। शादियों और सामाजिक जरूरतों पर बढ़ता खर्च आम लोगों के लिए चिंता का कारण बन चुका है।
बांग्लादेश पर विदेश नीति को लेकर टिप्पणी
विदेश नीति के सवाल पर इमरान प्रतापगढ़ी ने बांग्लादेश के संदर्भ में भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश की मौजूदा स्थिति पर भारत को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उनका दावा था कि गंभीर मुद्दों पर सरकार का मौन रहना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और सुरक्षा से जुड़े प्रश्न केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर भी असर डालते हैं।
उर्स के मंच से मिला सामाजिक संदेश
राजनीतिक तकरार से अलग, उर्स के कार्यक्रम ने फिर एक बार यह संदेश दिया कि अजमेर की दरगाह हमेशा एकता, भाईचारे और इंसानियत का प्रतीक रही है। खड़गे का संदेश भी इसी समझ और सद्भाव पर केंद्रित रहा। उर्स के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और दरगाह पर चादर पेश कर अमन-चैन की दुआ की। धार्मिक आयोजन के बीच सामाजिक-राजनीतिक विमर्श ने यह दिखाया कि लोगों के मुद्दे और आस्था, दोनों एक साथ चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।


