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RPSC लेक्चरर भर्ती में सैकड़ों पद खाली

RPSC लेक्चरर भर्ती में सैकड़ों पद खाली

राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से पॉलिटिकल साइंस और कॉमर्स विषय के लेक्चरर (प्राध्यापक) पदों का फाइनल रिजल्ट 1 अप्रैल को जारी कर दिया गया है। पात्रता जांच और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद घोषित इस परिणाम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में पद खाली रह गए हैं। इस भर्ती प्रक्रिया में न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाने के कारण सैकड़ों अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए, जिससे शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया दोनों पर चर्चा शुरू हो गई है।

पॉलिटिकल साइंस में केवल 6 अभ्यर्थी सफल

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली स्थिति पॉलिटिकल साइंस विषय में सामने आई है। इस विषय में कुल 225 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन फाइनल रिजल्ट में केवल 6 अभ्यर्थियों को ही चयनित किया गया है। इसका मतलब है कि 219 पद खाली रह गए हैं।

यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि अधिकांश अभ्यर्थी निर्धारित न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर सके। आयोग के नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए 40 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 5 प्रतिशत की छूट के साथ न्यूनतम अंक अनिवार्य थे। इतनी बड़ी संख्या में पदों का खाली रह जाना भर्ती प्रक्रिया की गुणवत्ता और परीक्षा की कठिनाई स्तर को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल

पॉलिटिकल साइंस लेक्चरर भर्ती परीक्षा 6 जुलाई 2025 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के लिए कुल 84,846 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 45,674 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए।

हालांकि, परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को अयोग्य भी घोषित किया गया। आयोग ने 386 कैंडिडेट्स को इसलिए अयोग्य करार दिया क्योंकि उन्होंने 10 प्रतिशत से अधिक प्रश्नों में दिए गए विकल्पों में से कोई उत्तर नहीं चुना था। यह नियम परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लागू किया गया था, लेकिन इसके कारण भी कई अभ्यर्थी अंतिम चयन सूची से बाहर हो गए।

कटऑफ में ‘कैंडिडेट नॉट अवेलेबल’ का उल्लेख

रिजल्ट जारी होने के बाद कटऑफ सूची में एक और दिलचस्प स्थिति देखने को मिली। सामान्य, एसटी सामान्य और एक्स सर्विसमैन सामान्य श्रेणियों को छोड़कर अधिकांश कैटेगिरी में “NA” यानी “कैंडिडेट नॉट अवेलेबल” लिखा गया है।

इसका अर्थ है कि इन श्रेणियों में न्यूनतम अंक प्राप्त करने वाला कोई भी अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं था। यह स्थिति भर्ती प्रक्रिया के लिए असामान्य मानी जा रही है और इससे आयोग की चयन प्रणाली पर बहस तेज हो गई है।

कॉमर्स विषय में भी पद रहे खाली

केवल पॉलिटिकल साइंस ही नहीं, बल्कि कॉमर्स विषय में भी बड़ी संख्या में पद खाली रह गए हैं। कॉमर्स में कुल 340 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। दस्तावेज सत्यापन के बाद आयोग ने 265 अभ्यर्थियों को मुख्य सूची में सफल घोषित किया, जबकि 17 अभ्यर्थियों को आरक्षित सूची में शामिल किया गया। इसके बावजूद 58 पद खाली रह गए, क्योंकि कई अभ्यर्थी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाए। यह स्थिति दर्शाती है कि दोनों विषयों में उम्मीदवारों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा।

न्यूनतम अंक की बाध्यता बनी कारण

इस भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ा कारण न्यूनतम अंक की बाध्यता रही। आयोग ने स्पष्ट किया था कि बिना 40 प्रतिशत अंक प्राप्त किए कोई भी अभ्यर्थी चयन के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत की छूट दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त संख्या में उम्मीदवार इस सीमा को पार नहीं कर सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का स्तर अपेक्षाकृत कठिन रहा होगा या फिर अभ्यर्थियों की तैयारी में कमी रही, जिसके कारण यह स्थिति बनी।

भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इतनी बड़ी संख्या में पदों का खाली रह जाना केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। स्कूलों और कॉलेजों में पहले से ही शिक्षकों की कमी की समस्या बनी हुई है, ऐसे में सैकड़ों पद खाली रहना चिंता का विषय है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही इन पदों को भरने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। साथ ही, आयोग को भी अपनी चयन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न की समीक्षा करने की आवश्यकता हो सकती है।

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