शोभना शर्मा। भारत की सुरक्षा व्यवस्था दुनिया की सबसे मजबूत व्यवस्थाओं में गिनी जाती है। सीमा पर जहां BSF, ITBP और सेना तैनात रहती है, वहीं आतंरिक सुरक्षा और स्पेशल ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी NSG (National Security Guard) संभालती है। इन्हें आमतौर पर ब्लैक कैट कमांडो कहा जाता है।
NSG कमांडो देश के सबसे कठिन हालातों में काम करते हैं। चाहे आतंकवाद से लड़ाई हो, बंधक मुक्ति अभियान, हाईजैक की स्थिति या फिर VIP सुरक्षा—हर चुनौती में NSG सबसे आगे खड़ा रहता है।
NSG कमांडो बनने की योग्यता
NSG कमांडो की भर्ती सीधे तौर पर नहीं होती। इसमें शामिल होने के लिए पहले किसी केंद्रीय सुरक्षा बल या सेना का हिस्सा होना जरूरी है। सेना, BSF, CRPF, CISF और ITBP जैसे बलों से चुने गए सबसे जांबाज जवानों को NSG में शामिल किया जाता है।
योग्यता इस प्रकार है:
भारतीय नागरिक होना जरूरी।
आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट।
न्यूनतम लंबाई 157 सेंटीमीटर।
महिला और पुरुष दोनों आवेदन कर सकते हैं।
शादीशुदा और अविवाहित उम्मीदवार दोनों के लिए अवसर।
चयन प्रक्रिया और कठोर ट्रेनिंग
एनएसजी कमांडो बनने का रास्ता आसान नहीं होता। चयनित जवानों को कई कठिन परीक्षाओं और ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है।
प्रारंभिक टेस्ट – 26 टास्क को सिर्फ 25 मिनट में पूरा करना होता है।
ट्रेनिंग अवधि – 90 दिन की कड़ी ट्रेनिंग, जिसमें शारीरिक, मानसिक और रणनीतिक क्षमता की परीक्षा होती है।
इस दौरान:
लगभग 50,000 से अधिक कारतूस चलाने की प्रैक्टिस।
25 सेकंड में 14 टारगेट पर फायर करने की क्षमता विकसित करनी होती है।
जंगल, रेगिस्तान और कठिन इलाकों में जीवित रहने की ट्रेनिंग।
बंधक मुक्ति और आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन्स के लिए विशेष प्रशिक्षण।
कहा जाता है कि 100 जवानों में से केवल 20 ही इस कठिन ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा कर पाते हैं।
सैलरी और भत्ते
NSG कमांडो को अच्छी सैलरी और सुविधाएं दी जाती हैं।
सैलरी: ₹80,000 से ₹1,60,000 प्रति माह।
ड्रेस भत्ता: ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए ₹27,800 और नॉन-ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए ₹21,275 सालाना।
इसके अलावा, स्वास्थ्य सुविधाएं, बीमा, और ऑपरेशन के दौरान विशेष भत्ते मिलते हैं।
जरूरी स्किल्स
एनएसजी कमांडो बनने के लिए सिर्फ शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि अनुशासन और मानसिक दृढ़ता भी जरूरी है।
निडर और अनुशासित होना।
कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता।
गोपनीयता बनाए रखने की आदत।
हर समय शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहना।
टीमवर्क और लीडरशिप दोनों में सक्षम होना।
करियर और स्कोप
एनएसजी कमांडो का करियर गर्व से भरा हुआ है। यह नौकरी सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि राष्ट्र सेवा का प्रतीक है। रिटायरमेंट के बाद भी ये कमांडो ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स, सुरक्षा एजेंसियों या सेना-पुलिस में प्रशिक्षक के रूप में योगदान दे सकते हैं।


