latest-newsराजस्थानसीकर

RTE प्रवेश में हजारों बच्चों की उम्मीद टूटी, पहले चरण में कम एडमिशन

RTE प्रवेश में हजारों बच्चों की उम्मीद टूटी, पहले चरण में कम एडमिशन

राजस्थान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश पाने की उम्मीद लगाए बैठे हजारों बच्चों और उनके अभिभावकों को इस बार पहले चरण में बड़ा झटका लगा है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलता है, लेकिन इस बार आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में बच्चे इस सुविधा से वंचित रह गए हैं।

इस वर्ष जिले में कुल 78 हजार 184 विद्यार्थियों ने RTE के तहत आवेदन किया था, जो यह दर्शाता है कि इस योजना के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इनमें से 55 हजार 565 विद्यार्थियों को प्रारंभिक लॉटरी प्रक्रिया में ही बाहर होना पड़ा। इसके बाद जिन 22 हजार 619 बच्चों का चयन हुआ, उनमें से भी केवल 9 हजार 360 बच्चों को ही पहले चरण में प्रवेश मिल सका। इस प्रकार कुल 69 हजार 564 बच्चों की निशुल्क शिक्षा की उम्मीद पहले चरण में ही टूट गई, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करें तो यह स्पष्ट होता है कि समस्या केवल चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि चयन के बाद की प्रक्रिया भी बड़ी बाधा बन रही है। चयनित 22 हजार 619 बच्चों में से 17 हजार 826 विद्यार्थियों की ही स्कूलों में रिपोर्टिंग हो पाई। इनमें से भी दस्तावेज सत्यापन के बाद केवल 9 हजार 360 बच्चों का ही अंतिम रूप से प्रवेश हो सका। इसका मतलब है कि लगभग 4,793 बच्चे ऐसे भी रहे, जो लॉटरी में चयनित होने के बावजूद समय पर रिपोर्टिंग नहीं कर पाए या दस्तावेजों की खामियों के कारण प्रवेश से वंचित रह गए।

इस स्थिति ने अभिभावकों के बीच निराशा का माहौल पैदा कर दिया है। कई अभिभावकों का कहना है कि उन्हें प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं मिल पाई, जिसके कारण वे समय पर आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं कर सके। वहीं, कुछ मामलों में स्कूलों की ओर से भी सहयोग की कमी देखने को मिली, जिससे बच्चों का प्रवेश प्रभावित हुआ।

ब्लॉक स्तर पर देखें तो प्रवेश की स्थिति में भी काफी असमानता नजर आती है। पिपराली ब्लॉक में सबसे अधिक प्रवेश हुए हैं, जहां 158 निजी स्कूलों में 20 हजार 352 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 4 हजार 771 बच्चों का लॉटरी में चयन हुआ और 3 हजार 376 बच्चों ने रिपोर्टिंग की। दस्तावेज सत्यापन के बाद यहां 1 हजार 632 बच्चों को प्रवेश मिल चुका है, जबकि 169 बच्चों को प्रोविजनल प्रवेश दिया गया है। इसके विपरीत नेछवा ब्लॉक में सबसे कम प्रवेश हुए हैं। यहां 24 स्कूलों में 2 हजार 26 आवेदन आए, जिनमें से 634 बच्चों का चयन हुआ और 515 बच्चों ने रिपोर्टिंग की, लेकिन अंततः केवल 264 बच्चों को ही प्रवेश मिल सका।

इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है, जो निजी स्कूलों की भूमिका से जुड़ा हुआ है। कई अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि बड़े निजी स्कूल आरटीई के तहत प्रवेश देने से कतरा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली पुनर्भरण राशि स्कूलों की वास्तविक फीस का केवल 20 से 30 प्रतिशत ही होती है। ऐसे में बड़े स्कूलों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते वे आरटीई के तहत प्रवेश देने में रुचि नहीं दिखाते। इस संबंध में कई शिकायतें भी शिक्षा विभाग को मिली हैं, जिनमें कार्रवाई की मांग की गई है।

आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर कमजोर वर्ग के बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। इसके बदले में राज्य सरकार स्कूलों को निर्धारित राशि का भुगतान करती है। केंद्र सरकार के प्रावधान के अनुसार यह सुविधा कक्षा आठ तक लागू होती है, लेकिन राजस्थान में इसे बढ़ाकर कक्षा 12 तक लागू किया गया है, जो राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है।

हालांकि, इस बार के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि योजना के क्रियान्वयन में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए, तो अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सकता है। इसके अलावा, अभिभावकों को समय-समय पर जागरूक करना भी जरूरी है, ताकि वे सभी औपचारिकताओं को समय पर पूरा कर सकें।

अब सभी की नजर दूसरे चरण पर टिकी हुई है, जो 21 अप्रैल से शुरू होने वाला है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि दूसरे चरण में भी 10 प्रतिशत से अधिक प्रवेश होने की संभावना कम है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि इस वर्ष कुल आवेदकों में से 75 से 80 प्रतिशत बच्चे निशुल्क प्रवेश से वंचित रह सकते हैं।

इस संबंध में सज्जन सिंह ने बताया कि पहले चरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दूसरे चरण की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे तय समय पर रिपोर्टिंग कर बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करें और किसी भी समस्या की स्थिति में शिक्षा विभाग से संपर्क करें।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading