मनीषा शर्मा। उत्तर भारत के साथ-साथ राजस्थान में भी ठंड लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य के कई हिस्सों में तापमान गिरने के साथ घना कोहरा छाने लगा है। सुबह और शाम के समय सड़कों पर विजिबिलिटी काफी कम हो रही है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग ने अगले 2 से 3 दिनों के लिए कड़ाके की ठंड, शीतलहर और न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट का अनुमान जताया है। इसी के चलते कई जिलों में प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है।
कोटा, बूंदी और बारां में अवकाश की घोषणा
जिन जिलों में स्कूल बंद करने का निर्णय लिया गया है, उनमें कोटा, बूंदी, बारां, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर शामिल हैं। बूंदी जिले में जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा के आदेश के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों में 6 और 7 जनवरी को दो दिन की छुट्टी घोषित की गई है। आदेश का पालन नहीं करने वाले विद्यालयों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
कोटा जिले में ठंड का असर छोटे बच्चों पर अधिक न पड़े, इसके लिए 3 से 6 वर्ष तक के आंगनबाड़ी केंद्रों में 14 जनवरी तक अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं के कारण छोटे बच्चों का स्कूल आना-जाना जोखिम भरा हो सकता है।
बारां जिले में भी बढ़ती ठंड और शीतलहर को देखते हुए कक्षा 1 से 8 तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में 6 और 7 जनवरी को अवकाश रहेगा। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्कूल में 8वीं तक की कक्षाएं संचालित मिलीं, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में भी स्कूल बंद
श्रीगंगानगर में 5वीं तक के सभी स्कूलों में 12 जनवरी तक छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल का समय बदलकर सुबह 10:30 बजे से शाम 3 बजे तक कर दिया गया है। शिक्षकों और परीक्षाओं का समय पहले की तरह ही जारी रहेगा।
हनुमानगढ़ जिले में भी जिला कलेक्टर खुशहाल यादव ने आदेश जारी कर 10 जनवरी तक कक्षा 1 से 8 के छात्रों के लिए अवकाश घोषित किया है। हालांकि, 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं पहले की तरह चलती रहेंगी ताकि बोर्ड और महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित न हो।
बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता
प्रशासन का साफ कहना है कि बढ़ती ठंड के बीच बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। शीतलहर के दौरान सुबह का समय विशेष रूप से जोखिम भरा माना जाता है, इसलिए छुट्टियों और समय परिवर्तन से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों को ठंड से बचाव के उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करें।


