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कॉन्स्टेबल भर्ती में हाइट विवाद पर हाईकोर्ट सख्त

कॉन्स्टेबल भर्ती में हाइट विवाद पर हाईकोर्ट सख्त

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने कॉन्स्टेबल भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने भर्ती के दौरान एक ही अभ्यर्थी की ऊंचाई माप में दो अलग-अलग वर्षों में आए अंतर को गंभीरता से लेते हुए एम्स जोधपुर के निदेशक को स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ ने यह आदेश अभ्यर्थी उमराम की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में वर्ष 2023 और 2025 की मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट विसंगति दिखाई दे रही है, इसलिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

2023 की भर्ती में 168 सेंटीमीटर मापी गई थी हाइट

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उमराम ने वर्ष 2023 में आयोजित कॉन्स्टेबल भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था। उस समय विभाग द्वारा उसकी ऊंचाई 168 सेंटीमीटर मापी गई थी, जो भर्ती विज्ञापन में निर्धारित न्यूनतम मानक के अनुरूप थी। हालांकि उस भर्ती प्रक्रिया में उमराम का नाम अंतिम मेरिट सूची में शामिल नहीं हो सका, जिसके कारण उसे नियुक्ति नहीं मिल पाई। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी और अगले अवसर पर फिर से भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का फैसला किया।

2025 की भर्ती में हाइट कम मापे जाने पर विवाद

वकील ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित नई कॉन्स्टेबल भर्ती प्रक्रिया में उमराम ने एक बार फिर आवेदन किया। इस बार जब उसकी शारीरिक माप ली गई तो विभाग ने उसकी ऊंचाई 167.4 सेंटीमीटर दर्ज की। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि दो वर्षों के अंतराल में किसी वयस्क व्यक्ति की ऊंचाई कम होना सामान्य स्थिति में संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में जहां उसकी ऊंचाई 168 सेंटीमीटर मापी गई थी, वहीं वर्ष 2025 में इसे 167.4 सेंटीमीटर दर्ज किया गया, जो एक स्पष्ट विसंगति को दर्शाता है।

वकील ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता अनुसूचित जनजाति के टीएसपी क्षेत्र से संबंधित है। यदि उसे टीएसपी क्षेत्र के उम्मीदवार के रूप में मिलने वाली छूट के आधार पर देखा जाएगा तो उसकी चयन संभावनाएं काफी कम हो जाएंगी। इसी आधार पर अदालत से अनुरोध किया गया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए किसी स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से अभ्यर्थी की ऊंचाई की दोबारा जांच करवाई जाए।

मेडिकल रिपोर्ट में अंतर को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों वर्षों की मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन किया। अदालत ने माना कि वर्ष 2023 और 2025 की रिपोर्ट में ऊंचाई के आंकड़ों में अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि न्यायहित में यह आवश्यक है कि अभ्यर्थी की ऊंचाई की जांच किसी स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड द्वारा करवाई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

एम्स जोधपुर को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने इस संबंध में एम्स जोधपुर के निदेशक को निर्देश दिया कि वे कम से कम दो चिकित्सकों का एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित करें। यह मेडिकल बोर्ड वर्ष 2025 के भर्ती विज्ञापन में निर्धारित मानकों के अनुसार याचिकाकर्ता की ऊंचाई की जांच करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

15 हजार रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का आदेश

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह भी निर्देश दिया कि वह 12 मार्च तक “राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जोधपुर” के नाम पर 15 हजार रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करवाए। अदालत ने कहा कि डिमांड ड्राफ्ट जमा कराने के बाद उसका प्रमाण और अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति राज्य सरकार के वकील को सौंपना आवश्यक होगा।

इसके बाद सरकारी वकील को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि एम्स जोधपुर द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख पर अदालत में पेश की जाए।

18 मार्च को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च 2026 की तारीख निर्धारित की है। उस दिन मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। इस मामले को पुलिस भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रकरण के रूप में देखा जा रहा है। अदालत का यह आदेश यह संकेत भी देता है कि भर्ती प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की विसंगति को गंभीरता से लिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।

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