राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने वर्ष 2026 में धुलंडी के अवसर पर 4 मार्च को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में रजिस्ट्रार (प्रशासन) शिवानी सिंह की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। आदेश के अनुसार, यह निर्णय 21 नवंबर 2025 को जारी पूर्व अधिसूचना में आंशिक संशोधन करते हुए लिया गया है।
दरअसल, वर्ष 2026 के लिए जारी न्यायालयीन कैलेंडर में होली और धुलंडी के अवकाश को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इसी कारण प्रशासन ने स्पष्टता लाते हुए 4 मार्च 2026 को भी सार्वजनिक अवकाश की श्रेणी में शामिल कर लिया है।
पूर्व कैलेंडर में क्या था प्रावधान
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा पहले जारी वर्ष 2026 के कैलेंडर के अनुसार 2 मार्च 2026, सोमवार को होलिका दहन के अवसर पर अवकाश घोषित था। इसके अतिरिक्त 3 मार्च 2026, मंगलवार को धुलंडी के उपलक्ष्य में अवकाश निर्धारित किया गया था।
हालांकि 4 मार्च 2026, बुधवार को केवल बैंक अवकाश की श्रेणी में रखा गया था और न्यायालयों के लिए नियमित कार्य दिवस माना गया था। यही बिंदु विवाद और असमंजस का कारण बना। अधिवक्ताओं और न्यायालय से जुड़े पक्षों ने यह तर्क दिया कि वास्तविक रूप से प्रदेशभर में धुलंडी का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा, इसलिए न्यायालयों में कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।
संशोधित नोटिफिकेशन से स्थिति स्पष्ट
नए आदेश के तहत अब 4 मार्च 2026 को भी धुलंडी के उपलक्ष्य में हाईकोर्ट और राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतों में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस प्रकार 2 मार्च से 4 मार्च तक लगातार तीन दिनों तक न्यायालयीन कार्य बंद रहेगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम न्यायिक कार्य की सुचारू व्यवस्था और अधिवक्ताओं की व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। संशोधन के बाद अब कैलेंडर में अवकाश संबंधी कोई भ्रम नहीं रहेगा और सभी न्यायालयों को एक समान निर्देश लागू होंगे।
बार एसोसिएशन की मांग बनी आधार
इस निर्णय के पीछे बार एसोसिएशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजीत जोशी और लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीप सिंह उदावत ने रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर 4 मार्च को अवकाश घोषित करने की मांग की थी।
अधिवक्ताओं का कहना था कि 3 मार्च को होलिका दहन होने के बाद अगले दिन प्रदेशभर में धुलंडी का पर्व मनाया जाएगा। चूंकि बड़ी संख्या में वकील विभिन्न जिलों से जोधपुर आकर प्रैक्टिस करते हैं, ऐसे में त्योहार के दिन न्यायालय पहुंचना उनके लिए व्यवहारिक रूप से कठिन होता है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि त्योहार के दौरान परिवहन व्यवस्था प्रभावित रहती है और सामाजिक दायित्वों के कारण न्यायालयीन उपस्थिति में बाधा आती है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से संशोधन की मांग की गई थी।
अधीनस्थ अदालतों पर भी लागू होगा आदेश
यह अवकाश केवल हाईकोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतों पर भी लागू होगा। इससे प्रदेशभर में न्यायालयीन कार्यवाही एक समान रूप से स्थगित रहेगी। न्यायिक प्रशासन के अनुसार, अवकाश घोषित करने से पहले संबंधित पक्षों की राय और व्यावहारिक परिस्थितियों का आकलन किया गया। त्योहारों के दौरान न्यायालयों में उपस्थिति कम रहने की संभावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया, ताकि बाद में मामलों की सुनवाई प्रभावित न हो।
न्यायालयीन व्यवस्था और भविष्य की स्पष्टता
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा समय रहते कैलेंडर में संशोधन किए जाने से भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक असुविधा की संभावना कम हो गई है। अदालतों में सूचीबद्ध मामलों और सुनवाई की तिथियों को भी इस संशोधन के अनुरूप समायोजित किया जाएगा।
न्यायालय प्रशासन का मानना है कि त्योहारों के दौरान स्पष्ट अवकाश नीति से अधिवक्ताओं, वादकारियों और न्यायालय कर्मियों को सुविधा मिलती है। साथ ही न्यायिक कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए पूर्व योजना आवश्यक होती है।
धुलंडी के अवसर पर घोषित यह अतिरिक्त अवकाश न्यायालयीन कैलेंडर में पारदर्शिता और व्यावहारिकता दोनों को संतुलित करने का प्रयास माना जा रहा है। अब 4 मार्च 2026 को प्रदेशभर की अदालतों में सार्वजनिक अवकाश रहेगा और नियमित कार्यवाही अगले निर्धारित कार्य दिवस से पुनः प्रारंभ होगी।


