latest-newsजयपुरराजनीतिराजस्थान

एकल पट्टा केस में हाईकोर्ट की सुनवाई, धारीवाल की याचिका पर सरकार का बड़ा तर्क

एकल पट्टा केस में हाईकोर्ट की सुनवाई, धारीवाल की याचिका पर सरकार का बड़ा तर्क

एकल पट्टा प्रकरण में शुक्रवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पूर्व मंत्री शांति धारीवाल की याचिका की वैधता पर ही सवाल खड़ा कर दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की बेंच में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और स्पेशल पीपी अनुराग शर्मा ने अदालत को बताया कि इस मामले में धारीवाल का नाम न तो एफआईआर में दर्ज है और न ही उन्हें चालान में आरोपी बनाया गया है। ऐसे में उनकी ओर से दायर की गई याचिका मेंटिनेबल नहीं मानी जा सकती।

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि यह मामला राज्य सरकार और न्यायालय के बीच का है, जिसमें धारीवाल को सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने या याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। इस तर्क के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी तक स्थगित कर दी। अब इस तारीख को यह स्पष्ट हो सकेगा कि अदालत धारीवाल की याचिका पर क्या रुख अपनाती है।

धारीवाल की दलील: एसीबी कोर्ट के आदेश गलत

दरअसल, पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने एसीबी कोर्ट में लंबित प्रोटेस्ट पिटीशन और अन्य आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनकी ओर से कहा गया कि एफआईआर से लेकर चालान तक कहीं भी उनका नाम आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है। एसीबी द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ किसी अपराध की पुष्टि नहीं की गई थी।

धारीवाल का तर्क है कि जब जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कोई आपराधिक साक्ष्य नहीं पाया और उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया, तब एसीबी कोर्ट द्वारा अग्रिम जांच के आदेश देना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने इसे कानून के दायरे से बाहर बताया और इस आधार पर हाईकोर्ट से राहत की मांग की।

परिवादी का आरोप: मामला लटकाने की कोशिश

मामले में इंटरवीनर के रूप में शामिल परिवादी अशोक पाठक ने अदालत में धारीवाल के इरादों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धारीवाल इस प्रकरण को लंबित रखना चाहते हैं ताकि मौजूदा सरकार का कार्यकाल निकल जाए और मामला ठंडे बस्ते में चला जाए।

परिवादी पक्ष का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

2011 में जारी हुआ था एकल पट्टा

इस पूरे विवाद की जड़ वर्ष 2011 में जारी किए गए एकल पट्टे से जुड़ी है। जयपुर विकास प्राधिकरण ने 29 जून 2011 को गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम एकल पट्टा जारी किया था। बाद में इस पट्टे को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगे।

वर्ष 2013 में रामशरण सिंह ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद एसीबी ने जांच शुरू की और तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी, शैलेंद्र गर्ग सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनके खिलाफ एसीबी कोर्ट में चालान पेश किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण ने 25 मई 2013 को यह एकल पट्टा निरस्त कर दिया था। इससे स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर संदेह और विवाद की स्थिति थी।

वसुंधरा सरकार में दर्ज हुआ केस

एकल पट्टा मामले में 3 दिसंबर 2014 को तत्कालीन वसुंधरा सरकार के दौरान एसीबी ने औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया था। आरोपियों के खिलाफ चालान भी पेश किया गया। जांच के दौरान पूर्व मंत्री शांति धारीवाल से भी पूछताछ की गई थी, हालांकि उन्हें आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया।

इसके बाद प्रदेश में सरकार बदलने पर गहलोत सरकार के कार्यकाल में एसीबी ने इस मामले में तीन अलग-अलग क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश कीं। इन क्लोजर रिपोर्ट में संधू, दिवाकर और सैनी को क्लीन चिट दी गई। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में बहस छिड़ी रही।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में सुनवाई

मामले की जटिलता और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है। अब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि एसीबी की क्लोजर रिपोर्ट, एसीबी कोर्ट के आदेश और धारीवाल की याचिका के संदर्भ में आगे की कानूनी दिशा क्या होगी।

यह मामला केवल एक प्रशासनिक निर्णय या पट्टा निरस्तीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली, राजनीतिक हस्तक्षेप और न्यायिक समीक्षा जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं। 28 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत यह स्पष्ट कर सकती है कि धारीवाल की याचिका स्वीकार्य है या नहीं और एसीबी कोर्ट की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading