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फागी-दूदू सड़क चौड़ीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब, तोड़फोड़ पर रोक

फागी-दूदू सड़क चौड़ीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब, तोड़फोड़ पर रोक

शोभना शर्मा।  राजस्थान हाईकोर्ट ने फागी–दूदू सड़क मार्ग की चौड़ाई बढ़ाने और सौंदर्यीकरण से जुड़े मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब कर लिया है। यह मामला उस समय अदालत पहुंचा जब नगर पालिका फागी द्वारा बिना व्यक्तिगत नोटिस दिए स्थानीय लोगों के दशकों पुराने पट्टे निरस्त कर संपत्तियों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू करने की तैयारी की गई। हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए फिलहाल याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है।

यह मामला न्यायमूर्ति अनुरूप सिंघी की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। अदालत में स्थानीय नागरिकों की ओर से याचिका दायर कर नगर पालिका फागी की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि फागी–दूदू सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के नाम पर नगर पालिका ने मनमाने ढंग से उनके वैध पट्टे निरस्त कर दिए और अतिक्रमण बताकर निर्माण हटाने की चेतावनी दी जा रही है, जबकि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई नोटिस तक नहीं दिया गया।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रमुख स्थानीय निकाय सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग के सचिव, फागी उपखंड अधिकारी, नगर पालिका फागी के अधिशासी अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने इन सभी अधिकारियों को 13 जनवरी तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट आदेश पारित करते हुए कहा गया है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट लक्ष्मीकांत शर्मा मालपुरा ने अदालत को बताया कि संबंधित लोगों के पास करीब 60 वर्ष पुराने वैध पट्टे हैं। ये पट्टे नगर पालिका अथवा तत्कालीन सक्षम प्राधिकरण द्वारा विधिवत जारी किए गए थे और लंबे समय से इन संपत्तियों पर आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके बावजूद नगर पालिका फागी ने बिना किसी व्यक्तिगत नोटिस के नगर पालिका अधिनियम की धारा 73(बी) का सहारा लेते हुए केवल एक सार्वजनिक सूचना जारी कर इन पट्टों को निरस्त कर दिया।

याचिका में यह भी कहा गया कि कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति के पट्टे को निरस्त करने या उसकी संपत्ति को अतिक्रमण घोषित करने से पहले उसे सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। लेकिन नगर पालिका ने इस मूलभूत प्रक्रिया का पालन नहीं किया और सीधे ही संपत्तियों को अवैध बताकर निर्माण हटाने की चेतावनी देना शुरू कर दिया। इससे स्थानीय लोगों में भारी रोष और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया।

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में यह माना कि बिना नोटिस और सुनवाई के इस तरह की कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। अदालत का यह आदेश फागी क्षेत्र के उन दर्जनों लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनकी संपत्तियां सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही थीं।

फागी–दूदू सड़क मार्ग का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है, लेकिन इस परियोजना के नाम पर अपनाई जा रही प्रक्रिया अब कानूनी जांच के दायरे में आ गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सभी की नजरें राज्य सरकार और नगर पालिका फागी द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। आने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि सड़क चौड़ीकरण की योजना किस तरह आगे बढ़ेगी और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कैसे की जाएगी।

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